फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   पांच बच्चों की मौत के बाद भी आराम कर रहे चिकित्सक, स्टाफ नर्स के कक्ष पर लटका ताला

पांच बच्चों की मौत के बाद भी आराम कर रहे चिकित्सक, स्टाफ नर्स के कक्ष पर लटका ताला

Thu, 21 Dec 2017 12:26 AM IST
Updated Thu, 21 Dec 2017 12:26 AM IST
विज्ञापन
पांच बच्चों की मौत के बाद भी आराम कर रहे चिकित्सक, स्टाफ नर्स के कक्ष पर लटका ताला
बिजनौर। धारणा बन गई है कि जिला अस्पताल गरीबों के लिए है और गरीबों की कोई सुनता नहीं है। यह धारणा ऐसे ही नहीं बनी है। जिला अस्पताल का स्टाफ अपने रवैये से इसे सच भी साबित कर देता है। जिला महिला अस्पताल में पांच बच्चों की मौत से पांच परिवारों की खुशियां भले ही मातम में बदल गई हों, लेकिन अस्पताल स्टाफ के व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया है। अमर उजाला टीम ने शाम को करीब सात बजे जिला अस्पताल में जाकर स्थिति देखी तो चिकित्सक का कमरा खाली मिला। चिकित्सक ऊपर की मंजिल पर आराम कर रही थीं। स्टाफ नर्स के कक्ष पर ताला लगा था। यहां तक कि महिलाओं व नवजात की देखभाल के लिए भी स्टाफ का कोई सदस्य विजिट करता नहीं मिला।
विज्ञापन

सोमवार रात जिला अस्पताल में 14 घंटे में पांच बच्चों की मौत के बाद से प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मचा है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने जांच समिति बनाई है। लेकिन अस्पताल में मरीजों की ड्यूटी चिकित्सकों व स्टाफ नर्स को करनी है अधिकारियों को नहीं। अगर अस्पताल के स्टाफ का रवैया न बदले तो फिर क्या किया जा सकता है। अमर उजाला ने बच्चों की मौत के प्रकरण को गंभीरता से लिया है। अमर उजाला टीम ने बुधवार शाम करीब सात बजे जिला अस्पताल में स्टिंग आपरेशन किया तो स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों व स्टाफ नर्स की सच्चाई सामने आ गई। इतनी बड़ी घटना होने पर भी करीब सात बजे महिला जिला अस्पताल में कोई महिला चिकित्सक नहीं मिलीं। शाम के समय डा.रूमाना की ड्यूटी थी। डा.रूमाना इस दौरान किसी कमरे में मरीजों का परीक्षण भी नहीं कर रहीं थी। स्टाफ नर्स के कमरे पर ताला लटका मिला। कमरों में भी कोई स्टाफ नर्स नहीं दिखी। अमर उजाला टीम को देखकर एक स्टाफ नर्स कहीं से दौड़ती हुई आई।
विज्ञापन

अमर उजाला टीम को देखकर दौड़ते हुए आईं चिकित्सक
अमर उजाला टीम को एक स्टाफ नर्स ने बताया कि ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ऊपर वाले कमरे में आराम कर रही हैं। कोई सूचना देने पर वे आ जाती हैं। स्टाफ नर्स पर ताला लटका होने के बारे में पूछने पर स्टाफ नर्स चुप हो गई। इतने में ही किसी ने चिकित्सक को सूचना दे दी तो चिकित्सक दौड़ते हुए अपने कक्ष में आ गईं।
विज्ञापन
विज्ञापन

स्टाफ नर्स ही लिखती हैं दवा
तीन दिन से जिला महिला अस्पताल में भर्ती महिला के पति बांकपुर गढ़ी निवासी खिलेंद्र ने बताया कि तीन-तीन दिन बीतने पर भी चिकित्सक जच्चा-बच्चा को देखने के लिए चिकित्सक नहीं आती हैं। स्टाफ नर्स ही उनकी दवाई आदि देखती हैं।
गरीबों की नहीं सुनता कोई
हीमपुर थाने के गांव जलालपुर निवासी प्रसूता अंशु का कहना है कि उनका बच्चा सोमवार को हुआ है। अभी तक चिकित्सक ने बच्चे को नहीं देखा है। जिला अस्पताल गरीबों के लिए होते हैं, लेकिन यहां पर गरीबों को देखने वाला कोई नहीं है।

18 बच्चे हुए पैदा
मंगलवार सुबह आठ बजे से बुधवार सुबह आठ बजे तक जिला अस्पताल 18 बच्चे पैदा हुए हैं। सीएमएस डा.आभा वर्मा ने बताया कि 15 बच्चे सामान्य प्रसव से हुए हैं। तीन महिलाओं का आपरेशन हुआ है। सभी जच्चा व बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed