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टीकाकरण से आठ वर्षीय बच्चे की मौत, हंगामा
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आराजी कंदला गांव में बच्चे की मौत
हरेवली। गांव आराजी कंदला में आठ माह के बच्चे की मौत हो गई। परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग के टीकाकरण से बच्चे की मौत होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि टीकाकरण से पहले बच्चा स्वस्थ था। परिजनों ने बच्चे को बिना किसी कार्रवाई के दफना दिया।
गांव आराजी कांधला निवासी दीपक कुमार और सुनीता ने बताया कि बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में टीकाकरण के लिए आई थी। टीका लगने के बाद उनके पुत्र की तबियत खराब हो गई। जिसका उपचार स्थानीय चिकित्सकों से कराया। लेकिन रात में उसकी तबीयत और ज्यादा खराब हो गई। रात्रि में वह बच्चे को उपचार के लिए बाहर लेकर जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों ने जमकर हंगामा किया। मामले की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंची। टीम में एआरओ प्रदीप चौहान, डॉ. नीरज और एएनएम अर्चना ने परिजनों को समझाया कि वैक्सीन के कारण बच्चे की मौत नहीं हुई है। संभवत: बच्चे को हार्ट प्रॉब्लम हो या ऑक्सीजन की कमी हो।
वहीं, चिकित्सा अधिकारी रजनीश कुमार का कहना है कि गांव में 45 बच्चों का टीकाकरण किया गया। वैक्सीन की कोई कमी नहीं है। इस टीकाकरण से कोई नुकसान नहीं होता। अगर टीके से नुकसान होता है तो 15-20 मिनट के दौरान पता चल जाता है। बच्चे की मौत 24 घंटे बाद हुई है। यह टीका काला पीलिया, निमोनिया, टिटनेस, खसरा, गलघोंटू, काली खांसी से बचाता है। फिर भी मामले की जांच कराई जा रही है।
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हरेवली। गांव आराजी कंदला में आठ माह के बच्चे की मौत हो गई। परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग के टीकाकरण से बच्चे की मौत होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि टीकाकरण से पहले बच्चा स्वस्थ था। परिजनों ने बच्चे को बिना किसी कार्रवाई के दफना दिया।
गांव आराजी कांधला निवासी दीपक कुमार और सुनीता ने बताया कि बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में टीकाकरण के लिए आई थी। टीका लगने के बाद उनके पुत्र की तबियत खराब हो गई। जिसका उपचार स्थानीय चिकित्सकों से कराया। लेकिन रात में उसकी तबीयत और ज्यादा खराब हो गई। रात्रि में वह बच्चे को उपचार के लिए बाहर लेकर जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों ने जमकर हंगामा किया। मामले की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंची। टीम में एआरओ प्रदीप चौहान, डॉ. नीरज और एएनएम अर्चना ने परिजनों को समझाया कि वैक्सीन के कारण बच्चे की मौत नहीं हुई है। संभवत: बच्चे को हार्ट प्रॉब्लम हो या ऑक्सीजन की कमी हो।
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वहीं, चिकित्सा अधिकारी रजनीश कुमार का कहना है कि गांव में 45 बच्चों का टीकाकरण किया गया। वैक्सीन की कोई कमी नहीं है। इस टीकाकरण से कोई नुकसान नहीं होता। अगर टीके से नुकसान होता है तो 15-20 मिनट के दौरान पता चल जाता है। बच्चे की मौत 24 घंटे बाद हुई है। यह टीका काला पीलिया, निमोनिया, टिटनेस, खसरा, गलघोंटू, काली खांसी से बचाता है। फिर भी मामले की जांच कराई जा रही है।
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