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आसमान में छाए बादलों से कांप रही खादर के किसानों की रूह
Updated Sun, 01 Jul 2018 12:44 AM IST
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बिजनौर। मानसून आ चुका है, आसमान में काले बादल दिन रात छा रहे हैं। इससे खादर क्षेत्र के किसानों में भय पैदा हो रहा है। पहाड़ों का पानी गंगा में आकर खादर क्षेत्र खेतों की फसल को बहाकर ले जाता है। रावली, रामसहायवाला, हिम्मतपुरबेला आदि गांवों में बाढ़ आ जाती है। गांवों के रास्तों पर नाव चलने लगती हैं। किसान दशकों से तटबंध बनाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन यह मांग अभी तक पूरी नहीं हुई है।
पहाड़ों पर हुई बारिश का पानी सहायक नदियों के जरिए गंगा नदी में समा जाता है। इससे गंगा नदी मैदान में आकर रौद्र रूप धारण कर लेती है। गांव नांगलसोती, रावली, ब्रह्मपुरी, मीरापुर, कोहरपुर, राजारामपुर, डैबलगढ़, सीमली, मिर्जापुर, गैबजीपुर, कुंदनपुर, टीप आदि गांवों में गंगा जमकर कटान करती है। गंगा के एक ओर उत्तराखंड व दूसरी ओर यूपी के गांव हैं। उत्तराखंड में तीन-चार साल पहले ही गंगा किनारे तटबंध बना दिए गए हैं। इससे अब गंगा का पानी यूपी के गांवों की ओर जोर मारता है। जिले से भी कटान को रोकने के लिए तटबंध बनाने के प्रस्ताव तीन सालों से शासन को भेजा जा रहा है, लेकिन अभी तक इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली है। हर चुनाव में गंगा कटान बड़ा मुद्दा होने के बाद भी तटबंध बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं लेता है।
प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही शुरू होगा काम
दो साल पहले खादर में गंगा ने काफी दूर तक कटान कर दिया था। कटान को रोकने के लिए बनाए गया एक अस्थायी तटबंध गंगा की धारा के बीच में आ गया था। इससे गंगा की एक धारा गांवों की ओर तेजी से आने लगी थी। तटबंध को हटाने से प्रशासनिक अमले ने हाथ खड़े कर दिए थे। तब अपने गांवों को बचाने के लिए उफान खा रही गंगा में किसानों ने नाव से जाकर उस तटबंध को नष्ट किया था। उधर, एक्सईन राजीव कपिल शर्मा का कहना है कि तटबंध बनाने का प्रस्ताव भेज दिया गया है, इसे मंजूरी मिलते ही काम शुरू हो जाएगा।
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पहाड़ों पर हुई बारिश का पानी सहायक नदियों के जरिए गंगा नदी में समा जाता है। इससे गंगा नदी मैदान में आकर रौद्र रूप धारण कर लेती है। गांव नांगलसोती, रावली, ब्रह्मपुरी, मीरापुर, कोहरपुर, राजारामपुर, डैबलगढ़, सीमली, मिर्जापुर, गैबजीपुर, कुंदनपुर, टीप आदि गांवों में गंगा जमकर कटान करती है। गंगा के एक ओर उत्तराखंड व दूसरी ओर यूपी के गांव हैं। उत्तराखंड में तीन-चार साल पहले ही गंगा किनारे तटबंध बना दिए गए हैं। इससे अब गंगा का पानी यूपी के गांवों की ओर जोर मारता है। जिले से भी कटान को रोकने के लिए तटबंध बनाने के प्रस्ताव तीन सालों से शासन को भेजा जा रहा है, लेकिन अभी तक इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली है। हर चुनाव में गंगा कटान बड़ा मुद्दा होने के बाद भी तटबंध बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं लेता है।
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प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही शुरू होगा काम
दो साल पहले खादर में गंगा ने काफी दूर तक कटान कर दिया था। कटान को रोकने के लिए बनाए गया एक अस्थायी तटबंध गंगा की धारा के बीच में आ गया था। इससे गंगा की एक धारा गांवों की ओर तेजी से आने लगी थी। तटबंध को हटाने से प्रशासनिक अमले ने हाथ खड़े कर दिए थे। तब अपने गांवों को बचाने के लिए उफान खा रही गंगा में किसानों ने नाव से जाकर उस तटबंध को नष्ट किया था। उधर, एक्सईन राजीव कपिल शर्मा का कहना है कि तटबंध बनाने का प्रस्ताव भेज दिया गया है, इसे मंजूरी मिलते ही काम शुरू हो जाएगा।
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