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टीबी की चपेट में जिले के नौनिहाल
Updated Wed, 21 Feb 2018 12:00 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर । जिले के नौनिहाल भी टीबी रोग से ग्रसित हो रहे हैं। बच्चों में छाती और गांठ वाला टीबी पाया जा रहा है। टीबी रोगियों व उनके परिजनों की लापरवाही से ये मामले सामने आए हैं। पिछले कुछ समय में टीबी से ग्रसित 69 बच्चे मिल चुके हैं। बच्चों में टीबी के मरीज बढ़ रहे हैं। इन बच्चों को ठीक करना स्वास्थ्य विभाग के लिए भी चुनौती बना हुआ है।
टीबी को खत्म करने के लिए शासन की ओर से पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। टीबी एक संक्रामक बीमारी है। टीबी से ग्रसित रोगियों के बलगम या श्वास द्वारा इसके बैक्टिरिया स्वस्थ व्यक्ति के शरी में जाकर उसे भी रोग से ग्रसित कर देते हैं। टीबी मनुष्य के शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। टीबी मरीजों का उपचार करने में स्वास्थ्य विभाग लापरवाही नहीं करता है, लेकिन टीबी के रोगियों या उनके परिजनों की लापरवाही की वजह से यह रोग बच्चों को भी अपना शिकार बना रहा है। रोगियों की लापरवाही से बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। पिछले कुछ समय में टीबी के 69 रोगी मिल चुके हैं। इनकी उम्र 14 साल से कम है। बच्चों में टीबी की जांच बलगम के नमूने से नहीं हो पाती है। इसके लिए सीबीनाट मशीन से एक्सरे के जरिए टीबी का पता लगाया जाता है।
ऐसे फैलता है टीबी
टीबी वाले मरीज के कहीं पर भी थूकने या खांसते वक्त मुंह पर कपड़ा न रखने से इसका बैक्टीरिया दूसरों के शरीर में चला जाता है। टीबी के मरीज का जूठा खाने से भी रोग से ग्रसित होने की संभावना रहती है।
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टीबी के सामान्य रोगियों को लाइन वन व रोग से ज्यादा ग्रसित मरीजों को लाइन टू के अंतर्गत दवाई दी जाती हैं। मरीज जिस श्रेणी के रोग से ग्रसित होता है, उसके बैक्टिरिया से प्रभावित हुआ व्यक्ति भी उसी श्रेणी के टीबी की चपेट में आ जाता है।
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बिजनौर । जिले के नौनिहाल भी टीबी रोग से ग्रसित हो रहे हैं। बच्चों में छाती और गांठ वाला टीबी पाया जा रहा है। टीबी रोगियों व उनके परिजनों की लापरवाही से ये मामले सामने आए हैं। पिछले कुछ समय में टीबी से ग्रसित 69 बच्चे मिल चुके हैं। बच्चों में टीबी के मरीज बढ़ रहे हैं। इन बच्चों को ठीक करना स्वास्थ्य विभाग के लिए भी चुनौती बना हुआ है।
टीबी को खत्म करने के लिए शासन की ओर से पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। टीबी एक संक्रामक बीमारी है। टीबी से ग्रसित रोगियों के बलगम या श्वास द्वारा इसके बैक्टिरिया स्वस्थ व्यक्ति के शरी में जाकर उसे भी रोग से ग्रसित कर देते हैं। टीबी मनुष्य के शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। टीबी मरीजों का उपचार करने में स्वास्थ्य विभाग लापरवाही नहीं करता है, लेकिन टीबी के रोगियों या उनके परिजनों की लापरवाही की वजह से यह रोग बच्चों को भी अपना शिकार बना रहा है। रोगियों की लापरवाही से बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। पिछले कुछ समय में टीबी के 69 रोगी मिल चुके हैं। इनकी उम्र 14 साल से कम है। बच्चों में टीबी की जांच बलगम के नमूने से नहीं हो पाती है। इसके लिए सीबीनाट मशीन से एक्सरे के जरिए टीबी का पता लगाया जाता है।
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ऐसे फैलता है टीबी
टीबी वाले मरीज के कहीं पर भी थूकने या खांसते वक्त मुंह पर कपड़ा न रखने से इसका बैक्टीरिया दूसरों के शरीर में चला जाता है। टीबी के मरीज का जूठा खाने से भी रोग से ग्रसित होने की संभावना रहती है।
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टीबी के सामान्य रोगियों को लाइन वन व रोग से ज्यादा ग्रसित मरीजों को लाइन टू के अंतर्गत दवाई दी जाती हैं। मरीज जिस श्रेणी के रोग से ग्रसित होता है, उसके बैक्टिरिया से प्रभावित हुआ व्यक्ति भी उसी श्रेणी के टीबी की चपेट में आ जाता है।