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48 किसानों के खेतों पर लगेंगे ड्रिप संयंत्र
Updated Mon, 04 Dec 2017 11:58 PM IST
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धामपुर। गन्ना विभाग ने कम लागत पर गन्ने की अधिक पैदावार लेने को किसानों के गन्ने की फसल की सिंचाई करने को ड्रिप संयंत्र के माध्यम से सिंचाई करने की जरूरत पर जोर दिया है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस विधि के अंतर्गत सरकार की ओर से किसानों के खेेतों पर ड्रिप संयंत्र लगाया जाएगा। जिस पर करीब 1.35 हजार की लागत आएगी। योजना के तहत किसानों को प्रोत्साहित करने को एक लाख का अनुदान दिया जाएगा। धामपुर गन्ना विकास परिषद क्षेत्र में करीब 48 किसानों को योजना से लाभान्वित करने को लक्ष्य है। इनमें से 15 किसानों का चयन कर लिया गया है।
गन्ना विकास परिषद के निरीक्षक देवेंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि इस विधि से गन्ने की सिंचाई करने से पानी की बचत होगी। पूरे खेत में समान पानी की बौछारों ( बारिशनुमा ) से सिंचाई होगी। किसान कम लागत पर इस विधि से गन्ने की सिंचाई करके सामान्य तौर अन्य विधि से सिंचाई करने की तुुलना में करीब 30 प्रतिशत से ज्यादा गन्ने की उपज ले सकता है। सबसे बड़ी बात है कि किसान इस विधि से गन्ने की सिंचाई करते वक्त यूरिया खाद को पानी में विलय पर बौछार विधि से सिंचाई कर सकता है। इस विधि से सिंचाई करने पर फसल में रोग नहीं आता। खरपतवार कम उगते हैं। गन्ने में रिकवरी बढ़ती है। पानी की बचत होगी। पैदावार बढ़ेगी। कीटों का प्रकोप कम होगा। रोग नहीं आएगा। एससीडीआई ने बताया कि पिछले बार गन्ना विकास परिषद में चार किसानों ने इस संयंत्र को स्थापित कराया था। उनके गन्ने की पैदावार अन्य विधि की तुलना में ज्यादा निकल रही है। इस विधि का प्रयोग विशेष की शरदकालीन गन्ने की सिंचाई के लिए ज्यादा लाभकारी होता है। सरकार की ओर से इस योजना के तहत संयंत्र लगाने वालों को एक लाख का अनुदान दिया जा रहा है। वैसे इस संयंत्र को स्थापित कराने में सरकार का एक लाख 35 हजार की खर्चा आ रहा है, लेकिन सरकार अधिक से अधिक गन्ना किसानों को लाभान्वित करने के लिए इनमें से एक लाभ का अनुदान दे रही है। इस प्रकार से किसानों को केवल 35 हजार रुपये की धनराशि खर्च करनी होगी। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत अफजलगढ़ में 43 स्योहारा में 27 किसानों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है।
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गन्ना विकास परिषद के निरीक्षक देवेंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि इस विधि से गन्ने की सिंचाई करने से पानी की बचत होगी। पूरे खेत में समान पानी की बौछारों ( बारिशनुमा ) से सिंचाई होगी। किसान कम लागत पर इस विधि से गन्ने की सिंचाई करके सामान्य तौर अन्य विधि से सिंचाई करने की तुुलना में करीब 30 प्रतिशत से ज्यादा गन्ने की उपज ले सकता है। सबसे बड़ी बात है कि किसान इस विधि से गन्ने की सिंचाई करते वक्त यूरिया खाद को पानी में विलय पर बौछार विधि से सिंचाई कर सकता है। इस विधि से सिंचाई करने पर फसल में रोग नहीं आता। खरपतवार कम उगते हैं। गन्ने में रिकवरी बढ़ती है। पानी की बचत होगी। पैदावार बढ़ेगी। कीटों का प्रकोप कम होगा। रोग नहीं आएगा। एससीडीआई ने बताया कि पिछले बार गन्ना विकास परिषद में चार किसानों ने इस संयंत्र को स्थापित कराया था। उनके गन्ने की पैदावार अन्य विधि की तुलना में ज्यादा निकल रही है। इस विधि का प्रयोग विशेष की शरदकालीन गन्ने की सिंचाई के लिए ज्यादा लाभकारी होता है। सरकार की ओर से इस योजना के तहत संयंत्र लगाने वालों को एक लाख का अनुदान दिया जा रहा है। वैसे इस संयंत्र को स्थापित कराने में सरकार का एक लाख 35 हजार की खर्चा आ रहा है, लेकिन सरकार अधिक से अधिक गन्ना किसानों को लाभान्वित करने के लिए इनमें से एक लाभ का अनुदान दे रही है। इस प्रकार से किसानों को केवल 35 हजार रुपये की धनराशि खर्च करनी होगी। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत अफजलगढ़ में 43 स्योहारा में 27 किसानों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है।
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