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250 करोड़ के ऑर्डर को हरी झंडी की उम्मीद
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नगीना में काष्ठ कला के नमूने।
- फोटो : BIJNOR
250 करोड़ के ऑर्डर को हरी झंडी की उम्मीद
बिजनौर। नगीना के काष्ठकला उद्योग से संकट के बादल छंटते दिख रहे हैं। पेंडिंग में डाले गए करीब 250 करोड़ के ऑर्डर को फिर से हरी झंडी मिलने की उम्मीद जग गई है। इससे काष्ठकला उद्यमियों ने अपनी फर्म भी शुरू कर दी हैं। ऑर्डर बहाल होने पर उद्यमी अपना माल सप्लाई करना शुरू कर देंगे।
नगीना के काष्ठकला उद्योग का टर्नओवर 300 करोड़ से भी अधिक का है। यहां तैयार होने वाले माल का 80 प्रतिशत हिस्सा विदेशों को निर्यात होता है। एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल होने के बाद काष्ठकला उद्योग को और पंख लगे हैं। काष्ठकला उद्यमियों को पहले ही निर्यातकों से सामान बनाने का ऑर्डर मिल जाता है। इसके बाद उद्यमी सामान बनाने में लग जाते हैं। इस साल के लिए काष्ठकला उद्यमियों को निर्यातकों से करीब 250 करोड़ रुपये के माल का ऑर्डर मिला था। यह माल देश में भी सप्लाई होना था। लेकिन कोरोना महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन में विदेशों के लिए भी यात्रा बंद होने से निर्यातों ने ऑर्डर को पेंडिंग में डाल दिया था। लेकिन अब 250 करोड़ के ऑर्डर के फिर से बहाल होने की आस जगी है। निर्यातों ने उद्यमियों को इसके संकेत दिए हैं। निर्यातकों से बात होने के बाद उद्यमियों ने अपनी फर्म खोलकर काम शुरू भी कर दिया है। ऑर्डर बहाल होने पर व स्थिति सामान्य होने पर यहां का माल बिकना शुरू हो जाएगा। हालांकि ऑर्डर की राशि घटेगी या उतनी ही रहेगी इसके बारे में अभी कुछ नहीं पता है। इस संबंध में काष्ठकला उद्यमी इरशाद मुल्तानी का कहना है कि अभी तो ऑर्डर पेंडिंग ही हैं, लेकिन निर्यातकों से बातचीत में राहत मिलने की उम्मीद है। उद्यमियों ने अपने कारखाने खोलकर काम करना शुरू कर दिया है। विदेशों में जिन चीजों की डिमांड है वह बनाई जा रही हैं। काष्ठकला उद्योग से हजारों मजदूरों को मजदूरी मिलती है। इस बारे में वे अफसरों के भी संपर्क में हैं।
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बिजनौर। नगीना के काष्ठकला उद्योग से संकट के बादल छंटते दिख रहे हैं। पेंडिंग में डाले गए करीब 250 करोड़ के ऑर्डर को फिर से हरी झंडी मिलने की उम्मीद जग गई है। इससे काष्ठकला उद्यमियों ने अपनी फर्म भी शुरू कर दी हैं। ऑर्डर बहाल होने पर उद्यमी अपना माल सप्लाई करना शुरू कर देंगे।
नगीना के काष्ठकला उद्योग का टर्नओवर 300 करोड़ से भी अधिक का है। यहां तैयार होने वाले माल का 80 प्रतिशत हिस्सा विदेशों को निर्यात होता है। एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल होने के बाद काष्ठकला उद्योग को और पंख लगे हैं। काष्ठकला उद्यमियों को पहले ही निर्यातकों से सामान बनाने का ऑर्डर मिल जाता है। इसके बाद उद्यमी सामान बनाने में लग जाते हैं। इस साल के लिए काष्ठकला उद्यमियों को निर्यातकों से करीब 250 करोड़ रुपये के माल का ऑर्डर मिला था। यह माल देश में भी सप्लाई होना था। लेकिन कोरोना महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन में विदेशों के लिए भी यात्रा बंद होने से निर्यातों ने ऑर्डर को पेंडिंग में डाल दिया था। लेकिन अब 250 करोड़ के ऑर्डर के फिर से बहाल होने की आस जगी है। निर्यातों ने उद्यमियों को इसके संकेत दिए हैं। निर्यातकों से बात होने के बाद उद्यमियों ने अपनी फर्म खोलकर काम शुरू भी कर दिया है। ऑर्डर बहाल होने पर व स्थिति सामान्य होने पर यहां का माल बिकना शुरू हो जाएगा। हालांकि ऑर्डर की राशि घटेगी या उतनी ही रहेगी इसके बारे में अभी कुछ नहीं पता है। इस संबंध में काष्ठकला उद्यमी इरशाद मुल्तानी का कहना है कि अभी तो ऑर्डर पेंडिंग ही हैं, लेकिन निर्यातकों से बातचीत में राहत मिलने की उम्मीद है। उद्यमियों ने अपने कारखाने खोलकर काम करना शुरू कर दिया है। विदेशों में जिन चीजों की डिमांड है वह बनाई जा रही हैं। काष्ठकला उद्योग से हजारों मजदूरों को मजदूरी मिलती है। इस बारे में वे अफसरों के भी संपर्क में हैं।
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