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नवासा-ए-रसूल की याद में निकले जुलूस में खामोश रहे अजादार
Updated Mon, 17 Sep 2018 12:55 AM IST
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अमरोहा। सूरज की तपिश से तपती सड़कों पर चलते अजादार। ऊंटों पर सवार बच्चे। आगे बढ़ते आराईश। खामोश लब और दिल में इमाम हुसैन का गम। कुछ ऐसा माहौल था रविवार को पांचवें मुहर्रम पर शहर में नवासा-ए-रसूल की याद में निकले जुलूस का। ये जुलूस अंजुमन तहफ्फुजे अजादारी के तत्वाधान में मोहल्ला सद्दो इमामबाड़ा से बरामद हुआ।
रविवार को जुलूस सुबह नौ बजे मौहल्ला सद्दो अजाखाना रफाती से बरामद होकर काजी जादा, नक्शबी, नौगईयां, चाहगौरी, मजापोता, कोट, दानिशमंदान, बगला, शफातपोता, कटरा, गुजरी, मच्छरट्टा, मंडी चौब, दरबारे कलां, अहमद नगर, कटकुई, काली पगड़ी, लकड़ा, हक्कानी, सट्टी, जाफरी से पचदरा होता हुआ वापस सद्दो में जाकर समाप्त हुआ। नगरवासियों ने जगह-जगह अजादारों का चाय, पानी, कॉफी पिलाकर स्वागत किया। तेज गर्मी में नागरिकों ने अजादारों के लिए पानी के पंखे लगाए। मुहर्रम के चलते शाम छह बजे से विभिन्न मौहल्लों में मजलिसों का सिलसिला शुरू हो जाता है। जबकि जुलूस के बाद मजलिसे होती हैं।
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रविवार को जुलूस सुबह नौ बजे मौहल्ला सद्दो अजाखाना रफाती से बरामद होकर काजी जादा, नक्शबी, नौगईयां, चाहगौरी, मजापोता, कोट, दानिशमंदान, बगला, शफातपोता, कटरा, गुजरी, मच्छरट्टा, मंडी चौब, दरबारे कलां, अहमद नगर, कटकुई, काली पगड़ी, लकड़ा, हक्कानी, सट्टी, जाफरी से पचदरा होता हुआ वापस सद्दो में जाकर समाप्त हुआ। नगरवासियों ने जगह-जगह अजादारों का चाय, पानी, कॉफी पिलाकर स्वागत किया। तेज गर्मी में नागरिकों ने अजादारों के लिए पानी के पंखे लगाए। मुहर्रम के चलते शाम छह बजे से विभिन्न मौहल्लों में मजलिसों का सिलसिला शुरू हो जाता है। जबकि जुलूस के बाद मजलिसे होती हैं।
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