{"_id":"59fa1dcf4f1c1bd7538ba9ed","slug":"201509563855-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सोशल आडिटरों की नई प्रकिया पर रोक लगाने की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सोशल आडिटरों की नई प्रकिया पर रोक लगाने की मांग
Updated Thu, 02 Nov 2017 01:23 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धामपुर (ब्यूरो)। उत्तर प्रदेश सोशल ऑडिट महासंघ के जिलाध्यक्ष रवि चौहान ने सरकार से बिजनौर जिले में सोशल आडिटरों के हो रहे साक्षात्कार को हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की है।
विज्ञापन
जिलाध्यक्ष ने बुधवार को गांव हबीबवाला में वार्ता में बताया कि हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को 2016 के चयनित सोशल ऑडिटर से ही वर्तमान में ग्राम पंचायतों में हुए विकास कार्यों का आडिट कराने के आदेश दिए हैं। पर सरकार कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन कर नए सिरे से चयन करने को बिजनौर जिले में साक्षात्कार प्रक्रिया को चालू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यूपी में वर्ष 2016 -17 में करीब 45,000 आडिटर समूचे प्रदेश में कार्य कर रहे हैं। इस मौके पर नरेश कुमार, मनजीत सिंह, इंतजार अहमद, अतीक अहमद, लक्ष्मण सिंह, रजनीश कुमार, अनुज कुमार, अन्य सोशल ऑडिटर मौजूद रहे।
विज्ञापन