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प्रभारी मंत्री जिले की सड़कों की हालत भी देख ले
Updated Fri, 08 Sep 2017 12:28 AM IST
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बिजनौर । मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ के सड़कों को गड्ढा मुक्त कराने का सपना अब तक पूरा नहीं हुआ। अफसर कभी खनन बंद होने व कभी बरसात का बहाना बनाकर सड़कों को गड्ढा मुक्त कराने से बचते रहे हैं। अफसरों ने सड़कों को गड्ढा मुक्त कराने में कोई दिलचस्पी नहीं ली। बरसात में गड्ढों से भरी सड़कों की हालत और भी ज्यादा बदतर हो गई है। इन सड़कों से जैसे तैसे वाहन गुजर रहे हैं। प्रभारी मंत्री जी जनपद की सड़कों की सच्चाई खुद देखिए। अधिकारी आपको सच्चाई नहीं बताने वाले।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूबे की सभी सड़कों को गड्ढा मुक्त कराने के निर्देश दिए थे। जिले के अफसरों ने सड़कों को गड्ढा मुक्त कराने की कार्य योजना तो तैयार की पर सड़कों के गड्ढे नहीं भरवाए। 15 जून के बाद मुख्यमंत्री ने सड़कों को गड्ढामुक्त कराने का समय बढ़ा दिया। इसके बाद भी सड़कें गड्ढा मुक्त नहीं हो र्पाइं। बरसात के दिनों में इन सड़कों की हालत और भी बदतर हो गई है।
बिजनौर में सेंटमेरी के पास चौराहे की हालत बहुत ही खराब है। बैराज मार्ग से ईदगाह जाने वाली सड़क की हालत बहुत खस्ता थी। इन गड्ढों में 15 जून से पहले पत्थर डाल दिया गया था। तारकोल आज तक भी नहीं डाला गया। बिजनौर शहर में कलक्ट्रेट से जेल साइड जाने वाले रास्ते में गड्ढे ही गड्ढे हैं। इन्हें ठीक कराने में कभी किसी की रुचि नहीं रही। मुख्यमंत्री जी की घोषणा को देख नगर पालिका ने गड्ढ़ों में मिट्टी भरवा दी थी। बारिश में यह बह गई।
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मुख्य मार्गों तक में बन गए गड्ढे
नूरपुर। नूरपुर-स्योहारा मार्ग उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड को सीधे जोड़ता है। स्योहारा से आगे रामगंगा नदी पर पुल बन जाने के बाद से यह मार्ग काफी व्यस्त हो गया है। लोनिवि ने करीब पांच वर्ष पूर्व 43 करोड़ की लागत से उस मार्ग की चौड़ाई बढ़ाकर हाटमिक्स से बनवाया था। पांच साल से सड़क की मरम्मत न होने के चलते यह मार्ग पूरी तरह से टूटकर गड्ढों में तब्दील हो गया है। इस मार्ग पर आए दिन हादसे होते रहते हैं। तीन दिन पूर्व गड्ढे में अनियंत्रित होकर एक स्कूल का वाहन सड़क किनारे पानी भरी खाई में पलट गया। गांव ताजपुर, पोटा, ढीकली आदि के ग्रामीणों ने उक्त सड़क को दोबारा बनवाए जाने की मांग की है। फीना से धनौरा को जाने वाले मार्ग की हालत भी बुरी है। इस मार्ग का अमरोहा जनपद में आने वाला करीब दस किमी टुकड़ा बनाया जा चुका है। बिजनौर में आने वाला फीना से मुस्तफाबाद तक आठ किमी मार्ग अभी भी अधबना है।
गड्ढों से भर गई सड़कें
कालागढ़। कालागढ़ का मुख्य मार्ग गड्ढों से सराबोर हो चुका है। वहीं कॉलोनी में सड़कों के नाम पर केवल गड्ढे और पत्थर ही हैं। कालागढ़ के शिविर प्रबंध खंड के ईई शेर सिंह का कहना है कि कालागढ़ की सड़कों की मरम्मत लोक निर्माण विभाग ने कराई थी। कालागढ़ में सड़कों की दशा बहुत ही खराब है। हाइडिल कालोनी से पुराना कालागढ़ तक सड़कें बदहाल हैं।
गड्ढों के चलते सड़कों पर चलना भी हुआ दूभर
धामपुर। नगर क्षेत्र के मार्ग की स्थिति खस्ताहाल बनी है। मार्गों में इस कदर गड्ढे है कि मार्ग पर चलना दूभर हो रहा है, जबकि इस मार्ग से उत्तराखंड व यूपी सरकार के मंत्रियों का आना जाना लगा रहता है। देहरादून जाने को केवल यही मार्ग है। नगीना हाईवे 74 की स्थिति तो पूरी तरह से नाजुक है। बाहरी क्षेत्र में तो क्या शहर के भीतरी क्षेत्र में मार्ग की स्थिति बदहाल है। नगर में कई स्थानों पर बड़े गड्ढे हैं। एसडीएम आजाद भगत सिंह का कहना है कि वे इस संबंध में संबंधित विभाग के अधिकारियों से बैठक करेंगे और समस्या का निदान कराने का प्रयास करेंगे।
सड़क ने लिया तालाब का रूप
शेरकोट। पानीपत-खटीमा हाईवे मार्ग स्थित चुंगी नंबर पांच के निकट तालाब का रूप ले चुका है, जबकि इस सड़क पर इन गड्ढों के कारण पिछले एक माह के भीतर कई लोगों की हादसों में मौत हो चुकी है।
कई सड़के हुई गड्ढो में तब्दील
नहटौर। नहटौर-धामपुर व नूरपुर मार्ग की सड़क गड्ढों में तब्दील होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क में गड्ढे होने से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। गड्ढा मुक्त करने के लिए ईट व मिट्टी से भराव करना मुसीबत का सबब बन गया है। धूल मिट्टी उड़ने से राहगीरों का चलना मुश्किल हो गया है। नहटौर-धामपुर मार्ग की खस्ता हालत को देखते हुए लोग अन्य रास्तों से जाने को मजबूर हैं।
बाईपास मार्ग बना तालाब
नजीबाबाद। उत्तराखंड को जोड़ने वाला पूर्वी गंगनहर बाईपास मार्ग कई जगहों पर तालाब में तब्दील हो चुका है। मार्ग पर हुए गड्ढों की समय रहते मरम्मत न कराने से ऐसे हालात बने। बाईपास मार्ग के एक ओर काफी गहराई में खेत और जंगल क्षेत्र के खड्ड हैं तो दूसरी ओर गहरी गंगनहर है, जिससे किसी भी क्षण गंभीर हादसे की आशंका बनी है। बिजनौर मार्ग को कोतवाली मार्ग से जोड़ने वाला नहर बाईपास मार्ग वर्षों से बदहाल है। इसके बावजूद मार्ग की मरम्मत करना गवारा नहीं किया गया। नजीबाबाद में धर्मकांटा चौराहा, रेलवे क्रॉसिंग, कृष्णा टाकीज चौराहा, जलालाबाद से बिजनौर दिशा, मंडावली और भागूवाला क्षेत्र में नेशनल हाईवे कई जगह बदहाल है। जिनकी मरम्मत के लिए अब तक भी उचित कदम नहीं उठाया गया है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूबे की सभी सड़कों को गड्ढा मुक्त कराने के निर्देश दिए थे। जिले के अफसरों ने सड़कों को गड्ढा मुक्त कराने की कार्य योजना तो तैयार की पर सड़कों के गड्ढे नहीं भरवाए। 15 जून के बाद मुख्यमंत्री ने सड़कों को गड्ढामुक्त कराने का समय बढ़ा दिया। इसके बाद भी सड़कें गड्ढा मुक्त नहीं हो र्पाइं। बरसात के दिनों में इन सड़कों की हालत और भी बदतर हो गई है।
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बिजनौर में सेंटमेरी के पास चौराहे की हालत बहुत ही खराब है। बैराज मार्ग से ईदगाह जाने वाली सड़क की हालत बहुत खस्ता थी। इन गड्ढों में 15 जून से पहले पत्थर डाल दिया गया था। तारकोल आज तक भी नहीं डाला गया। बिजनौर शहर में कलक्ट्रेट से जेल साइड जाने वाले रास्ते में गड्ढे ही गड्ढे हैं। इन्हें ठीक कराने में कभी किसी की रुचि नहीं रही। मुख्यमंत्री जी की घोषणा को देख नगर पालिका ने गड्ढ़ों में मिट्टी भरवा दी थी। बारिश में यह बह गई।
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मुख्य मार्गों तक में बन गए गड्ढे
नूरपुर। नूरपुर-स्योहारा मार्ग उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड को सीधे जोड़ता है। स्योहारा से आगे रामगंगा नदी पर पुल बन जाने के बाद से यह मार्ग काफी व्यस्त हो गया है। लोनिवि ने करीब पांच वर्ष पूर्व 43 करोड़ की लागत से उस मार्ग की चौड़ाई बढ़ाकर हाटमिक्स से बनवाया था। पांच साल से सड़क की मरम्मत न होने के चलते यह मार्ग पूरी तरह से टूटकर गड्ढों में तब्दील हो गया है। इस मार्ग पर आए दिन हादसे होते रहते हैं। तीन दिन पूर्व गड्ढे में अनियंत्रित होकर एक स्कूल का वाहन सड़क किनारे पानी भरी खाई में पलट गया। गांव ताजपुर, पोटा, ढीकली आदि के ग्रामीणों ने उक्त सड़क को दोबारा बनवाए जाने की मांग की है। फीना से धनौरा को जाने वाले मार्ग की हालत भी बुरी है। इस मार्ग का अमरोहा जनपद में आने वाला करीब दस किमी टुकड़ा बनाया जा चुका है। बिजनौर में आने वाला फीना से मुस्तफाबाद तक आठ किमी मार्ग अभी भी अधबना है।
गड्ढों से भर गई सड़कें
कालागढ़। कालागढ़ का मुख्य मार्ग गड्ढों से सराबोर हो चुका है। वहीं कॉलोनी में सड़कों के नाम पर केवल गड्ढे और पत्थर ही हैं। कालागढ़ के शिविर प्रबंध खंड के ईई शेर सिंह का कहना है कि कालागढ़ की सड़कों की मरम्मत लोक निर्माण विभाग ने कराई थी। कालागढ़ में सड़कों की दशा बहुत ही खराब है। हाइडिल कालोनी से पुराना कालागढ़ तक सड़कें बदहाल हैं।
गड्ढों के चलते सड़कों पर चलना भी हुआ दूभर
धामपुर। नगर क्षेत्र के मार्ग की स्थिति खस्ताहाल बनी है। मार्गों में इस कदर गड्ढे है कि मार्ग पर चलना दूभर हो रहा है, जबकि इस मार्ग से उत्तराखंड व यूपी सरकार के मंत्रियों का आना जाना लगा रहता है। देहरादून जाने को केवल यही मार्ग है। नगीना हाईवे 74 की स्थिति तो पूरी तरह से नाजुक है। बाहरी क्षेत्र में तो क्या शहर के भीतरी क्षेत्र में मार्ग की स्थिति बदहाल है। नगर में कई स्थानों पर बड़े गड्ढे हैं। एसडीएम आजाद भगत सिंह का कहना है कि वे इस संबंध में संबंधित विभाग के अधिकारियों से बैठक करेंगे और समस्या का निदान कराने का प्रयास करेंगे।
सड़क ने लिया तालाब का रूप
शेरकोट। पानीपत-खटीमा हाईवे मार्ग स्थित चुंगी नंबर पांच के निकट तालाब का रूप ले चुका है, जबकि इस सड़क पर इन गड्ढों के कारण पिछले एक माह के भीतर कई लोगों की हादसों में मौत हो चुकी है।
कई सड़के हुई गड्ढो में तब्दील
नहटौर। नहटौर-धामपुर व नूरपुर मार्ग की सड़क गड्ढों में तब्दील होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क में गड्ढे होने से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। गड्ढा मुक्त करने के लिए ईट व मिट्टी से भराव करना मुसीबत का सबब बन गया है। धूल मिट्टी उड़ने से राहगीरों का चलना मुश्किल हो गया है। नहटौर-धामपुर मार्ग की खस्ता हालत को देखते हुए लोग अन्य रास्तों से जाने को मजबूर हैं।
बाईपास मार्ग बना तालाब
नजीबाबाद। उत्तराखंड को जोड़ने वाला पूर्वी गंगनहर बाईपास मार्ग कई जगहों पर तालाब में तब्दील हो चुका है। मार्ग पर हुए गड्ढों की समय रहते मरम्मत न कराने से ऐसे हालात बने। बाईपास मार्ग के एक ओर काफी गहराई में खेत और जंगल क्षेत्र के खड्ड हैं तो दूसरी ओर गहरी गंगनहर है, जिससे किसी भी क्षण गंभीर हादसे की आशंका बनी है। बिजनौर मार्ग को कोतवाली मार्ग से जोड़ने वाला नहर बाईपास मार्ग वर्षों से बदहाल है। इसके बावजूद मार्ग की मरम्मत करना गवारा नहीं किया गया। नजीबाबाद में धर्मकांटा चौराहा, रेलवे क्रॉसिंग, कृष्णा टाकीज चौराहा, जलालाबाद से बिजनौर दिशा, मंडावली और भागूवाला क्षेत्र में नेशनल हाईवे कई जगह बदहाल है। जिनकी मरम्मत के लिए अब तक भी उचित कदम नहीं उठाया गया है।