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आंकड़ों में खेल : बिजनौर कोविड वार्ड में बीस दिन में 200 मौत स्वास्थ्य विभाग बता रहा संक्रमण से केवल 85 मौत

Wed, 12 May 2021 12:13 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Wed, 12 May 2021 12:13 AM IST
सार

20 अप्रैल से 10 मई तक हर दिन दस लोगों की जान गई, बीस दिन में इस वार्ड में जिले के करीब 300 मरीज भर्ती हुए थे, स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में अभी 85 मौत कोरोना के कारण हुई 

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200 killed in twenty days in Kovid ward.
कोरोना का कहर - फोटो : पीटीआई

विस्तार

बिजनौर में कोरोना को लेकर भले ही सरकारी आंकड़े राहत देने वाले हों। लेकिन हकीकत यह है कि जिला अस्पताल में सस्पेक्टेड कोविड वार्ड में हर रोज औसतन दस मरीजों की मौत हो रही है। 20 अप्रैल से दस मई तक ही 200 मरीज यहां दम तोड़ चुके हैं। इसके अलावा रोजाना दस से ज्यादा लोग अपने घरों या निजी अस्पतालों में दम तोड़ रहे हैं। इन्हें भी अगर इनमें जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा 20 से भी ज्यादा मौत प्रतिदिन का हो जाता है। यह आंकडे़ आपको डराने के लिए नहीं, बल्कि सतर्क करने के लिए हैं।
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इस समय कोरोना संक्रमण पीक पर है। ऐसे में जरा सी लापरवाही आपकी और आपके परिवार की जान को जोखिम में डाल सकती है। प्रतिदिन बीमारी से दम तोड़ने वाले लोगाें में भले ही कोरोना की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन लक्षण कोरोना से मिलते जुलते थे। इस समय जिला अस्पताल में दो वार्ड सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं। एक एल-2 कोविड वार्ड, जहां कोरोना से पीड़ित मरीज भर्ती हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सस्पेक्टेड कोरोना वार्ड। कोरोनाकाल की शुरूआत से अब तक स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में 85 लोगों की कोरोना से जान गई है।
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वहीं, सस्पेक्टेड कोविड वार्ड में पिछले बीस दिन में भर्ती कराए गए करीब 300 मरीज में से 200 अपनी जान गवां चुके हैं। इनमें से करीब छह मरीज रेफर किए गए। जिला अस्पताल के सूत्रों की मानें तो 29 अप्रैल को सबसे ज्यादा 25 से लोगों की मौत हुई। मरने वालों में अधिकांश की हालत खराब थी और उन्हें जांच कराने तक का मौका नहीं मिला। इलाज मिल पाता, इससे पहले ही उनकी मौत हो गई। यह आंकड़े तो जिला अस्पताल के हैं। इसके अलावा भी जिले में प्रतिदिन 10 से 15 मौत बुखार और कोरोना से हो रही हैं।
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डर नहीं सतर्कता की जरूरत
हमने जो मौत के आंकड़े बताए हैं, उनसे डरने की बजाय सतर्कता बढ़ाने की जरूरत है। रोज पुलिस बिना मास्क हजारों रुपये जुर्माना वसूल रही है। 200 से ज्यादा लोगों का चालान किया जा रहा है। आंकड़े बता रहे है कि लोग किस तरह लापरवाह हो रहे हैं, वे खुद और दूसरों की जान खतरे में डाल रहे हैं। इस जानलेवा बीमारी से सतर्क होकर ही बचा जा सकता है। इसलिए सरकार की गाइडलाइन का पालन करें और कोई दिक्कत होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क कर दवाई लें।

कब चलेंगे 24 वेंटिलेटर
कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए परिजन वेंटिलेकर बेड के लिए आसपास के जिलों में संपर्क कर रहे हैं। मरीज की जान बचाने के लिए वे कुछ भी कीमत देने के लिए तैयार हैं। वहीं, जिला अस्पताल में पिछले एक साल से 24 वेंटिलेटर शो पीस बने हुए हैं। जिला अस्पताल प्रशासन इसके लिए योग्य स्टॉफ न होने का हवाला देता है, लेकिन सवाल यह भी उठता है कि यदि यह वेंटिलेटर चल रहे होते तो क्या सस्पेक्टेड वार्ड में मरने वाले 200 मरीजों में से कुछ की जान बचाई जा सकती थी। अब यह वेंटिलेटर कब और कैसे चलेंगे, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

 

प्रतिदिन कुल मौत का आंकड़ा बीस के पार
जिला अस्पताल में औसतन रोज दस मौत हो रही हैं। इसके अलावा जिलेभर में दस से ज्यादा लोग ऐसे हैं, जो प्राइवेट अस्पतालों में या घरों पर ही दम तोड़ रहे हैं। अधिकांश की कोरोना जांच नहीं हुई, लेकिन सांस लेने में परेशानी, फेफड़ों में संक्रमण जैसी समस्या अधिकांश को हो रही। यदि कुल आंकड़े पर नजर डालें तो हर रोज बीस से ज्यादा लोग बीमारी से जान गवां रहे हैं। इन मौतों के आगे स्वास्थ्य विभाग भी लाचार नजर आ रहा है। ऐसे में लोगाें को खुद ही सतर्क रहने की जरूरत है।

85 प्रतिशत को फेफड़ों का इंफेक्शन
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. ज्ञानचंद कहते हैं कि जो लोग कोविड सस्पेक्टेड वार्ड में भर्ती होने आ रहे हैं, उनमें 85 प्रतिशत को सांस लेने में तकलीफ, फेफड़ों में संक्रमण, न्यूमोनिया के लक्षण थे। अधिकांश मौत इन्हीं समस्या से पीड़ित मरीजों की हुई है। इस समय दस वेंटिलेटर संचालित कर दिए गए हैं। चार वेंटिलेटर खराब हैं और दस वेंटिलेटर मुरादाबाद जिला अस्पताल को भेज दिए गए हैं। मौत के आंकड़े के बारे में पता कराया जा रहा है।

जानकारी में नहीं: डीएम
डीएम रमाकांत पांडेय ने कहा कि यह मेरी जानकारी में नहीं है। कोरोना से मरने वालों की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध है। सस्पेक्टेड वार्ड में जिनकी मौत हुई है, उन्हें कोरोना से जोड़ना ठीक नहीं। उनकी मौत का कारण क्या रहा, इसका पता कराया जाएगा।

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