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एक माह में 20 मौत, अब भी दर्जनों बीमार
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एक माह में 20 मौत, अब भी दर्जनों बीमार
गजरौला शिव। एक ओर कोरोना का डर, दूसरी ओर गांव में बुखार और अन्य कारणों से लोगों की मौत ने दहशत का माहौल बना दिया है। बात बिजनौर शहर से सटे गांव स्वाहेड़ी खुर्द व स्वाहेड़ी बुजुर्ग की करें तो यहां एक माह में 20 लोगों की मौत हो गई है। अब भी दर्जनों लोग बीमार बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में बने वेलनैस सेंटर पर चलने वाली ओपीडी जरूरत के समय ही बंद कर दी गई। बीमारी को लेकर लोग डरे हुए हैं और स्वास्थ्य विभाग से यहां सर्वे कराने की मांग कर रहे हैं।
गांव में अभी भी बुखार से आसाराम, लाली देवी, मिथलेश देवी, सरोज देवी, कमला देवी आदि गांव में एक दर्जन से अधिक लोग बुखार पीड़ित हैं जो गांव में ही इलाज करा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक गांव में बुखार व अन्य बीमारी से स्वाहेड़ी खुर्द में मुलिया 50 वर्ष, विमला देवी 80 वर्ष, होरी सिंह सैनी 81 वर्ष, सीताराम सैनी 75 वर्ष दोनों सगे भाई थे, एक सप्ताह के अंदर दोनों की मौत हो गई। जबकि तेजपाल सिंह 70 वर्ष, शीला 68 वर्ष दोनों पति पत्नी थे। पति के मरने के बाद पत्नी शीला ने भी एक सप्ताह के बाद दम तोड़ दिया। स्वाहेड़ी बुजुर्ग में राजपाल सिंह रिटायर्ड पोस्टमास्टर 70 वर्ष, कामेश देवी 85 वर्ष, महिंद्र 70 वर्ष, शुभम बैंक कर्मचारी 26 वर्ष, सुदेश कुमार 45 वर्ष, गंगो देवी 65 वर्ष, सुक्खे सिंह 68 वर्ष, मोटी 55 वर्ष, रामपाल सिंह 70 वर्ष, मिथिलेश शर्मा 60 वर्ष, झड़िया 60 वर्ष, आमना 65 वर्ष, शरमी देवी 70 वर्ष, बृजेश देवी 52 वर्ष की मौत हो गई।
जंगल में करना पड़ा अंतिम संस्कार
बृजेश देवी के पति नरेंद्र सिंह ने बताया कि गंगा बैराज घाट पर भीड़ होने के कारण उन्हें बैराज घाट पर न ले जाकर अपने जंगल में बने ट्यूबवेल पर ही दाह संस्कार कर दिया है। गांव के लोग कोरोना बीमारी को देखते हुए बैराज गंगा घाट पर अब जाना पसंद नहीं कर रहे हैं। महेंद्री देवी के पौत्र मयंक चौधरी ने बताया कि उन्हें डायबिटीज थी। दो दिन पहले बुखार आया था डायबिटीज बढ़ने के कारण उनकी मौत हो गई। महेंद्री देवी को भी परिवार के लोगों ने अपने खेतों पर ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया।
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स्वाहेड़ी खुर्द में 14 मौत : किरन आर्य
स्वाहेड़ी बुजुर्ग की प्रधान किरन आर्य का कहना है कि गांव में एक सप्ताह में 14 लोगों की मौत हुई है। इतनी मौत तो एक-दो वर्ष के बीच भी नहीं होती थीं। गांव में अभी तक कोई स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं आई है, आशा ही बुखार पीड़ितों का हालचाल जानने के लिए आती हैं, बाकी कुछ नहीं है। गांव में बने वैलनेस सेंटर में कोई डॉक्टर नहीं है। फार्मेसिस्ट के सहारे ही चल रहा है।
स्वाहेड़ी खुर्द में छह की गई जान: ज्योति
स्वाहेड़ी खुर्द की प्रधान ज्योति देवी के अनुसार गांव में बुखार से दो लोगों की मौत हुई है। गांव में तीन महीने के बाद सफाई कार्य चालू कराया गया है। गांव में स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम नहीं आई है, न ही गांव में बुखार पीड़ितों की कोई सुध लेने वाला नहीं है।
मौतों से दहशत में हैं ग्रामीण
गांव के ही धीरेंद्र सिंह उर्फ छोटे का कहना है कि गांव में बुखार व अन्य बीमारी से 20 लोगों की मौत हो चुकी है। गांव में मातम और दहशत का माहौल है। लोगों को ओपीडी बंद होने से दवाई भी नहीं मिल रही। चरन सिंह आर्य का कहना है कि सरकारी अस्पताल में ओपीडी बंद होने से लोगों को दवाई भी नहीं मिल पा रही है। विनोद कुमार बिट्टू का कहना है कि महामारी को देखते हुए गांव के निजी डॉक्टर से ही लोग दवाई ले रहे हैं। प्राइवेट अस्पतालों में कोई देखने को तैयार नहीं था। गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम को सर्वे कर लोगों का इलाज कराना चाहिए।
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गजरौला शिव। एक ओर कोरोना का डर, दूसरी ओर गांव में बुखार और अन्य कारणों से लोगों की मौत ने दहशत का माहौल बना दिया है। बात बिजनौर शहर से सटे गांव स्वाहेड़ी खुर्द व स्वाहेड़ी बुजुर्ग की करें तो यहां एक माह में 20 लोगों की मौत हो गई है। अब भी दर्जनों लोग बीमार बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में बने वेलनैस सेंटर पर चलने वाली ओपीडी जरूरत के समय ही बंद कर दी गई। बीमारी को लेकर लोग डरे हुए हैं और स्वास्थ्य विभाग से यहां सर्वे कराने की मांग कर रहे हैं।
गांव में अभी भी बुखार से आसाराम, लाली देवी, मिथलेश देवी, सरोज देवी, कमला देवी आदि गांव में एक दर्जन से अधिक लोग बुखार पीड़ित हैं जो गांव में ही इलाज करा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक गांव में बुखार व अन्य बीमारी से स्वाहेड़ी खुर्द में मुलिया 50 वर्ष, विमला देवी 80 वर्ष, होरी सिंह सैनी 81 वर्ष, सीताराम सैनी 75 वर्ष दोनों सगे भाई थे, एक सप्ताह के अंदर दोनों की मौत हो गई। जबकि तेजपाल सिंह 70 वर्ष, शीला 68 वर्ष दोनों पति पत्नी थे। पति के मरने के बाद पत्नी शीला ने भी एक सप्ताह के बाद दम तोड़ दिया। स्वाहेड़ी बुजुर्ग में राजपाल सिंह रिटायर्ड पोस्टमास्टर 70 वर्ष, कामेश देवी 85 वर्ष, महिंद्र 70 वर्ष, शुभम बैंक कर्मचारी 26 वर्ष, सुदेश कुमार 45 वर्ष, गंगो देवी 65 वर्ष, सुक्खे सिंह 68 वर्ष, मोटी 55 वर्ष, रामपाल सिंह 70 वर्ष, मिथिलेश शर्मा 60 वर्ष, झड़िया 60 वर्ष, आमना 65 वर्ष, शरमी देवी 70 वर्ष, बृजेश देवी 52 वर्ष की मौत हो गई।
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जंगल में करना पड़ा अंतिम संस्कार
बृजेश देवी के पति नरेंद्र सिंह ने बताया कि गंगा बैराज घाट पर भीड़ होने के कारण उन्हें बैराज घाट पर न ले जाकर अपने जंगल में बने ट्यूबवेल पर ही दाह संस्कार कर दिया है। गांव के लोग कोरोना बीमारी को देखते हुए बैराज गंगा घाट पर अब जाना पसंद नहीं कर रहे हैं। महेंद्री देवी के पौत्र मयंक चौधरी ने बताया कि उन्हें डायबिटीज थी। दो दिन पहले बुखार आया था डायबिटीज बढ़ने के कारण उनकी मौत हो गई। महेंद्री देवी को भी परिवार के लोगों ने अपने खेतों पर ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया।
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स्वाहेड़ी खुर्द में 14 मौत : किरन आर्य
स्वाहेड़ी बुजुर्ग की प्रधान किरन आर्य का कहना है कि गांव में एक सप्ताह में 14 लोगों की मौत हुई है। इतनी मौत तो एक-दो वर्ष के बीच भी नहीं होती थीं। गांव में अभी तक कोई स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं आई है, आशा ही बुखार पीड़ितों का हालचाल जानने के लिए आती हैं, बाकी कुछ नहीं है। गांव में बने वैलनेस सेंटर में कोई डॉक्टर नहीं है। फार्मेसिस्ट के सहारे ही चल रहा है।
स्वाहेड़ी खुर्द में छह की गई जान: ज्योति
स्वाहेड़ी खुर्द की प्रधान ज्योति देवी के अनुसार गांव में बुखार से दो लोगों की मौत हुई है। गांव में तीन महीने के बाद सफाई कार्य चालू कराया गया है। गांव में स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम नहीं आई है, न ही गांव में बुखार पीड़ितों की कोई सुध लेने वाला नहीं है।
मौतों से दहशत में हैं ग्रामीण
गांव के ही धीरेंद्र सिंह उर्फ छोटे का कहना है कि गांव में बुखार व अन्य बीमारी से 20 लोगों की मौत हो चुकी है। गांव में मातम और दहशत का माहौल है। लोगों को ओपीडी बंद होने से दवाई भी नहीं मिल रही। चरन सिंह आर्य का कहना है कि सरकारी अस्पताल में ओपीडी बंद होने से लोगों को दवाई भी नहीं मिल पा रही है। विनोद कुमार बिट्टू का कहना है कि महामारी को देखते हुए गांव के निजी डॉक्टर से ही लोग दवाई ले रहे हैं। प्राइवेट अस्पतालों में कोई देखने को तैयार नहीं था। गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम को सर्वे कर लोगों का इलाज कराना चाहिए।