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बालकों के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया
Updated Mon, 01 Oct 2018 12:05 AM IST
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बालकों के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया
धामपुर। सरस्वती शिशु मंदिर में चल रहा तीन दिवस कार्यशाला का समापन हो गया। रविवार को समापन पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रदेश निरीक्षक नेत्रपाल ने कहा कि बालकों के प्रारंभिक गुरु माता पिता होते हैं। जबकि बालक के सर्वांगीण विकास में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। उन्होंने कहा कि हमें बालक बालिकाओं की शिक्षा के प्रति जागरूक रहना चाहिए। प्रथम व पंचम सत्र में प्रांतीय संगठन मंत्री तपन कुमार ने बालक के पंच कोषों के विकास की विधियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि गुरू का कर्तव्य बालक को उसकी रुचि के देखते हुए शिक्षा देनी चाहिए। हमें उन पर जबरन कोई भी पद्घति नहीं थोपनी चाहिए। बालक से बालक बनकर ही पूरी जानकारी हासिल करनी चाहिए। बालकों के बौद्घिक विकास के लिए साप्ताहिक क्रियाकलाप करते रहना जरूरी है। इस अवसर पर 22 जिलों के 47 प्रधानाचार्यों ने भाग लिया। कार्यक्रम में रामकिशोर श्री वास्तव, मदनपाल सिंह, शिवकुमार शर्मा, मेहर सिंह, राकेश कुमार, संजीव राजपूत आदि रहे।
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धामपुर। सरस्वती शिशु मंदिर में चल रहा तीन दिवस कार्यशाला का समापन हो गया। रविवार को समापन पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रदेश निरीक्षक नेत्रपाल ने कहा कि बालकों के प्रारंभिक गुरु माता पिता होते हैं। जबकि बालक के सर्वांगीण विकास में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। उन्होंने कहा कि हमें बालक बालिकाओं की शिक्षा के प्रति जागरूक रहना चाहिए। प्रथम व पंचम सत्र में प्रांतीय संगठन मंत्री तपन कुमार ने बालक के पंच कोषों के विकास की विधियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि गुरू का कर्तव्य बालक को उसकी रुचि के देखते हुए शिक्षा देनी चाहिए। हमें उन पर जबरन कोई भी पद्घति नहीं थोपनी चाहिए। बालक से बालक बनकर ही पूरी जानकारी हासिल करनी चाहिए। बालकों के बौद्घिक विकास के लिए साप्ताहिक क्रियाकलाप करते रहना जरूरी है। इस अवसर पर 22 जिलों के 47 प्रधानाचार्यों ने भाग लिया। कार्यक्रम में रामकिशोर श्री वास्तव, मदनपाल सिंह, शिवकुमार शर्मा, मेहर सिंह, राकेश कुमार, संजीव राजपूत आदि रहे।