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बज्म-ए-जिगर की शेरी नशिस्त, शायर सम्मानित
Updated Mon, 09 Jul 2018 12:33 AM IST
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नजीबाबाद। बज्म-ए-जिगर की शेरी नशिस्त में उर्दू अदब की खिदमत करने वाले शायरों को सम्मानित किया गया। शेरी नशिस्त में शायरों ने ताजा कलाम से दिल जीत लिया।
बज्म- ए- जिगर की ओर से मो. सन्तोमालन में शेरी नशिस्त का आयोजन किया गया। शायर मौसूफ वासिफ के आवास पर आयोजित शेरी नशिस्त में पहुंचे शायरों को खिताब करते हुए मुख्य अतिथि जानेमाने शायर महेंद्र अश्क ने कहा कि नजीबाबाद सरजमी ने उर्दू की खिदमत करने वाले कई दानिश्वर दिए हैं।
मौलाना मौ. अली जौहर, अल्लामा ताजवर नजीबाबाद, अख्तर साबरी, अजमल खां अजमल जैसे शायरों ने शायरी के साथ उर्दू अदब की खिदमत की। उन्होंने नौजवान शायरों से समाज की भावनाओं के अनुरूप शायरी देकर उर्दू अदब को बढ़ावा देने के लिए अपनी शायरी को मुकाम तक पहुंचाने की सलाह दी।
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अकरम जलालाबादी ने नात-ए-पाक कोई भी वरिरद नहीं इस कलाम से..,किया।
शेरी नशिस्त में मुजक्किर नजीबाबादी का कलाम अजब मेरा फसाना हो गया है.., ये दिल किसका दीवाना हो गया है.., शकील वफा जलालाबादी का कलाम जिन्दगी उम्र भर सताएगी.., शादाब जफर शादाब का कलाम मेरे बच्चे यू बोले शाम को जब काम से लौटा.., लोगों ने पसंद किया। इनके अतिरिक्त अल्ताफ रजा खां का कलाम जमी नहीं तो फलकदार कर दिया जाए.., महताब खां चाद का कलाम अब चरागों पे इल्जाम आने लगेे हैं.., शहबाज इब्ने मख्फी का कलाम चांदनी सी चटकने लगी साया खुद मुंह छिपाने लगा.., और कार्यक्रम मौसफ वासिफ का कलाम ये तेरी भूल से हुआ या मेरी भूल से कलाम काफी सराहा गया।
शादाब जफर के संचालन में आयोजित शेरी नशिस्त में, काजी विकाउल हक, डा.तय्यब जमाल, मुख्तार शाद, अब्दुल रज्जाक , डा. साबिर गमगीन ने कलाम पेश किए। शेरी नशिस्त के अंत में उर्दू की खिदमत करने वाले शायरों को सम्मानित किया गया।
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बज्म- ए- जिगर की ओर से मो. सन्तोमालन में शेरी नशिस्त का आयोजन किया गया। शायर मौसूफ वासिफ के आवास पर आयोजित शेरी नशिस्त में पहुंचे शायरों को खिताब करते हुए मुख्य अतिथि जानेमाने शायर महेंद्र अश्क ने कहा कि नजीबाबाद सरजमी ने उर्दू की खिदमत करने वाले कई दानिश्वर दिए हैं।
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मौलाना मौ. अली जौहर, अल्लामा ताजवर नजीबाबाद, अख्तर साबरी, अजमल खां अजमल जैसे शायरों ने शायरी के साथ उर्दू अदब की खिदमत की। उन्होंने नौजवान शायरों से समाज की भावनाओं के अनुरूप शायरी देकर उर्दू अदब को बढ़ावा देने के लिए अपनी शायरी को मुकाम तक पहुंचाने की सलाह दी।
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अकरम जलालाबादी ने नात-ए-पाक कोई भी वरिरद नहीं इस कलाम से..,किया।
शेरी नशिस्त में मुजक्किर नजीबाबादी का कलाम अजब मेरा फसाना हो गया है.., ये दिल किसका दीवाना हो गया है.., शकील वफा जलालाबादी का कलाम जिन्दगी उम्र भर सताएगी.., शादाब जफर शादाब का कलाम मेरे बच्चे यू बोले शाम को जब काम से लौटा.., लोगों ने पसंद किया। इनके अतिरिक्त अल्ताफ रजा खां का कलाम जमी नहीं तो फलकदार कर दिया जाए.., महताब खां चाद का कलाम अब चरागों पे इल्जाम आने लगेे हैं.., शहबाज इब्ने मख्फी का कलाम चांदनी सी चटकने लगी साया खुद मुंह छिपाने लगा.., और कार्यक्रम मौसफ वासिफ का कलाम ये तेरी भूल से हुआ या मेरी भूल से कलाम काफी सराहा गया।
शादाब जफर के संचालन में आयोजित शेरी नशिस्त में, काजी विकाउल हक, डा.तय्यब जमाल, मुख्तार शाद, अब्दुल रज्जाक , डा. साबिर गमगीन ने कलाम पेश किए। शेरी नशिस्त के अंत में उर्दू की खिदमत करने वाले शायरों को सम्मानित किया गया।