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दलितों की खामोशी खिला सकती है गुल

Fri, 18 May 2018 12:04 AM IST
Updated Fri, 18 May 2018 12:04 AM IST
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दलितों की खामोशी खिला सकती है गुल
बिजनौर। नूरपुर विधानसभा चुनाव में दलितों की खामोशी कोई गुल खिला सकती है। दलितों ने चुनाव में अपने पत्ते नहीं खोले हैं। नूरपुर सीट पर दलितों के वोट निर्णायक स्थित में है। दलितों को अपने पाले में करने के लिए सपा व भाजपा में शह-मात का खेल शुरू हो गया है। सपा के साथ भले ही बसपा का गठबंधन है पर चुनाव में बसपा नेताओं ने अभी तक दूरी बना रखा है ये नेता चुनाव से नदारद हैं।
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नूरपुर विधानसभा चुनाव में वोटरों को अपने पाले में लाने का खेल तेजी से शुरू हो गया है। सपा व बसपा में दलितों वोटरों को अपने पाले में करने के लिए मारामारी चल रही है। सपा प्रत्याशी नईमुल हसन बसपा के साथ गठबंधन के सहारे दलितों को पूरी तरह रिझाने में लगे हैं। भाजपा नेता भी दलितों पर डोरे डाल रहे हैं। उन्हें बता रहे हैं कि दलितों का भाजपा के अलावा कोई हितैषी नहीं है। दलितों को दोनों दलों के नेता तरह-तरह के प्रलोभन दे रहे हैं। दलित अभी तक खामोश हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दलितों की खामोशी चुनाव में कोई गुल खिला सकती है। नूरपुर विधानसभा में 306217 मतदाता है। इनमें 40 हजार दलित मतदाता है। दलित वोट इस सीट पर निर्णायक हालात में हैं। सपा का बसपा व रालोद के साथ उपचुनाव में भले ही गठबंधन है, पर अभी तक चुनाव में बसपा नेता नजर नहीं आए। इसे लेकर नूरपुर क्षेत्र के दलित भी आश्चर्य में हैं। बसपा नेताओं को अभी तक पार्टी हाईकमान से चुनाव के लिए कोई झंडी नहीं मिली है। बसपा नेता हाईकमान के हुक्म मिलने का इंतजार कर रहे हैं। दलित इलाके में सपा व भाजपा के नेता स्थानीय मुद्दों को तरजीह दे रहे हैं। छोटी-छोटी समस्या के जरिये वोटरों को लुभाया जा रहा है। दोनों दलों ने अपनी टोलियों को दलितों के इलाके में लगा रखा है। भाजपा ने दलितों को पाले में लाने के लिए नहटौर के दलित विधायक ओम कुमार को लगा रखा है। ओमकुमार नूरपुर क्षेत्र की दलित बस्तियों में डेरा डाल रखा है। अभी कई दलित नेताओं को और चुनाव में उतारने की भाजपा नेताओं की तैयारी है। सपा व भाजपा की 40 हजार दलित वोटों पर कड़ी नजर है। जिस ओर दलित जाएंगे चुनाव में पलड़ा उधर का ही भारी रहेगा।
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