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अभी तक किसी भी पार्टी के अधिक़ृत प्रत्याशी की घोषणा न करने से दावेदारों व उनके समर्थकों में भारी तनाव
Updated Thu, 02 Nov 2017 01:07 AM IST
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किसी भी पार्टी ने घोषित नहीं किया प्रत्याशी
- निकाय चुनाव के नामांकन में पांच दिन बचे हैं शेष
अमर उजाला ब्यूरो
अफजलगढ़।
निकाय चुनाव के नामांकन के मात्र पांच दिन बचे हैं, परंतु किसी भी पार्टी द्वारा अभी तक अपना प्रत्याशी घोषित न करने के कारण पार्टी से टिकट पाने वाले दावेदारों और उनके समर्थकों में भारी बेचैनी है। यहां निकाय चुनाव में चेयरपर्सन पद के लिए लगभग एक दर्जन उम्मीदवार मैदान में हैं। जिनमें निर्दलीय लड़ने वाले उम्मीदवारों की संख्या ज्यादा है। जबकि मतदाताओं की नजरें भाजपा, सपा के टिकट पर लगी हैं।
भाजपा से जहां सलीम अंसारी अपनी पत्नी शहाना सलीम को, शमीम अहमद अपनी पत्नी रेशमा खातून, इशरार कस्सार अपनी पत्नी रोशन जहां के लिए दावेदारी कर रहे हैं। वहीं सपा के नगराध्यक्ष इरशाद ठेकेदार अपनी पत्नी शहनाज बेगम का टिकट सपा से फाइनल मान कर संपर्क में जुटे हैं। परंतु उनकी परेशानी यह है कि सपा के अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन और विधायक शेख सुलेमान, बसपा से निष्कासित शेख इरशाद की पत्नी और पूर्व चेयरपर्सन शाहिदा इरशाद को समर्थन की घोषणा कर चुके हैं। उन्हें सपा से टिकट दिलाने की भरपूर कोशिश में लगे हैं। अब देखना यह है कि सपा 25 साल से सपा को समर्थित इरशाद ठेकेदार की पत्नी को अपना उम्मीदवार घोषित करती है या कुछ दिन पूर्व सपा में शामिल हुए शेख इरशाद की पत्नी को टिकट मिलता है। उधर, दूसरी ओर निवर्तमान पालिकाध्यक्ष जावेद विकार भी अपनी पत्नी तबस्सुम जावेद को चुनाव में उतारा है। लेकिन उनकी राह इस बार इतनी आसान नहीं है। झोझा बिरादरी में इस बार पांच के करीब उम्मीदवार मैदान में हैं। हिंदुओं के स्वर्ण जाति के वोट उनकी पकड़ से बाहर हैं। वहीं, इस्माइल तुर्क अपनी पत्नी रजिया एमए, नफीस कुरैशी अपनी पत्नी खुर्शीदा नफीस, इकबाल कुरैशी अपनी पत्नी शाहीन इकबाल को निर्दलीय चुनाव मैदान में उतारने की बात कहकर वोट मांग रहे हैं। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी अपना प्रत्याशी मैदान में उतार देती है तो भाजपा, सपा उम्मीदवारों का गणित गड़बड़ा सकता है। बसपा का भी कोई प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं है।
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- निकाय चुनाव के नामांकन में पांच दिन बचे हैं शेष
अमर उजाला ब्यूरो
अफजलगढ़।
निकाय चुनाव के नामांकन के मात्र पांच दिन बचे हैं, परंतु किसी भी पार्टी द्वारा अभी तक अपना प्रत्याशी घोषित न करने के कारण पार्टी से टिकट पाने वाले दावेदारों और उनके समर्थकों में भारी बेचैनी है। यहां निकाय चुनाव में चेयरपर्सन पद के लिए लगभग एक दर्जन उम्मीदवार मैदान में हैं। जिनमें निर्दलीय लड़ने वाले उम्मीदवारों की संख्या ज्यादा है। जबकि मतदाताओं की नजरें भाजपा, सपा के टिकट पर लगी हैं।
भाजपा से जहां सलीम अंसारी अपनी पत्नी शहाना सलीम को, शमीम अहमद अपनी पत्नी रेशमा खातून, इशरार कस्सार अपनी पत्नी रोशन जहां के लिए दावेदारी कर रहे हैं। वहीं सपा के नगराध्यक्ष इरशाद ठेकेदार अपनी पत्नी शहनाज बेगम का टिकट सपा से फाइनल मान कर संपर्क में जुटे हैं। परंतु उनकी परेशानी यह है कि सपा के अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन और विधायक शेख सुलेमान, बसपा से निष्कासित शेख इरशाद की पत्नी और पूर्व चेयरपर्सन शाहिदा इरशाद को समर्थन की घोषणा कर चुके हैं। उन्हें सपा से टिकट दिलाने की भरपूर कोशिश में लगे हैं। अब देखना यह है कि सपा 25 साल से सपा को समर्थित इरशाद ठेकेदार की पत्नी को अपना उम्मीदवार घोषित करती है या कुछ दिन पूर्व सपा में शामिल हुए शेख इरशाद की पत्नी को टिकट मिलता है। उधर, दूसरी ओर निवर्तमान पालिकाध्यक्ष जावेद विकार भी अपनी पत्नी तबस्सुम जावेद को चुनाव में उतारा है। लेकिन उनकी राह इस बार इतनी आसान नहीं है। झोझा बिरादरी में इस बार पांच के करीब उम्मीदवार मैदान में हैं। हिंदुओं के स्वर्ण जाति के वोट उनकी पकड़ से बाहर हैं। वहीं, इस्माइल तुर्क अपनी पत्नी रजिया एमए, नफीस कुरैशी अपनी पत्नी खुर्शीदा नफीस, इकबाल कुरैशी अपनी पत्नी शाहीन इकबाल को निर्दलीय चुनाव मैदान में उतारने की बात कहकर वोट मांग रहे हैं। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी अपना प्रत्याशी मैदान में उतार देती है तो भाजपा, सपा उम्मीदवारों का गणित गड़बड़ा सकता है। बसपा का भी कोई प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं है।
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