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सर्जन नहीं फिर भी रेफर होकर आ रहे मरीज
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सर्जन नहीं फिर भी रेफर होकर आ रहे मरीज
बिजनौर। जिला अस्पताल में सर्जन नहीं होने के बावजूद जिले के सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सक सर्जरी संबंधी केस भी जिला अस्पताल के लिए रेफर कर रहे हैं। जिला अस्पताल में रेफर होकर आने वाले मरीजों के तीमारदार इमरजेंसी चिकित्सकों से झगड़ा करते हैं। इमरजेंसी चिकित्सकों ने सीएचसी, पीएचसी प्रभारियों से सर्जरी संबंधी केस सीधे मेरठ रेफर करने की सलाह है।
जिले में कुल 22 प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थित हैं। इनमें 11 प्राथमिक और 11 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। यहां आने वाले मरीजों को गंभीर हालत होने पर जिला अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है। वर्तमान में जिला अस्पताल में कोई सर्जन नहीं है। यहां तैनात रहे सर्जन वीके शुक्ला को करीब दो साल पहले शासन ने प्रमोशन देकर बरेली जिले का मुख्य चिकित्साधिकारी बना दिया था। इसके बाद से जिला अस्पताल सर्जन की बाट जोह रहा है। कई बार डिमांड भेजने के बाद भी जिला अस्पताल को सर्जन नहीं मिला। इस कारण सर्जरी संबंधी कोई भी केस आने पर उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। नियमानुसार सीएचसी, पीएचसी के डॉक्टर भी मरीज को सीधे मेरठ रेफर कर सकते हैं। जिला अस्पताल में सर्जन नहीं होने से पित्त की थैली, पथरी, किडनी की पथरी, आंतों में रुकावट, हर्निया, गांठें, फोड़े आदि के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। इन ऑपरेशनों के लिए लोगों को बाहरी शहरों की ओर रुख करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक सुखवीर सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल के हालात को देखते हुए सीएचसी, पीएचसी वाले डॉक्टर भी मरीज को सीधे मेरठ रेफर कर सकते हैं। इसके लिए जिला अस्पताल को माध्यम बनाने की आवश्यकता नहीं है।
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बिजनौर। जिला अस्पताल में सर्जन नहीं होने के बावजूद जिले के सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सक सर्जरी संबंधी केस भी जिला अस्पताल के लिए रेफर कर रहे हैं। जिला अस्पताल में रेफर होकर आने वाले मरीजों के तीमारदार इमरजेंसी चिकित्सकों से झगड़ा करते हैं। इमरजेंसी चिकित्सकों ने सीएचसी, पीएचसी प्रभारियों से सर्जरी संबंधी केस सीधे मेरठ रेफर करने की सलाह है।
जिले में कुल 22 प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थित हैं। इनमें 11 प्राथमिक और 11 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। यहां आने वाले मरीजों को गंभीर हालत होने पर जिला अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है। वर्तमान में जिला अस्पताल में कोई सर्जन नहीं है। यहां तैनात रहे सर्जन वीके शुक्ला को करीब दो साल पहले शासन ने प्रमोशन देकर बरेली जिले का मुख्य चिकित्साधिकारी बना दिया था। इसके बाद से जिला अस्पताल सर्जन की बाट जोह रहा है। कई बार डिमांड भेजने के बाद भी जिला अस्पताल को सर्जन नहीं मिला। इस कारण सर्जरी संबंधी कोई भी केस आने पर उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। नियमानुसार सीएचसी, पीएचसी के डॉक्टर भी मरीज को सीधे मेरठ रेफर कर सकते हैं। जिला अस्पताल में सर्जन नहीं होने से पित्त की थैली, पथरी, किडनी की पथरी, आंतों में रुकावट, हर्निया, गांठें, फोड़े आदि के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। इन ऑपरेशनों के लिए लोगों को बाहरी शहरों की ओर रुख करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक सुखवीर सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल के हालात को देखते हुए सीएचसी, पीएचसी वाले डॉक्टर भी मरीज को सीधे मेरठ रेफर कर सकते हैं। इसके लिए जिला अस्पताल को माध्यम बनाने की आवश्यकता नहीं है।
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