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शुक्रिया और तौबा करने का दिन है शब ए बरात

Fri, 19 Apr 2019 12:31 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 19 Apr 2019 12:31 AM IST
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शुक्रिया और तौबा करने का दिन है शब ए बरात
शब ए बरात पर आतिशबाजी नाजायज
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गजरौला शिव। इस्लामी महीनों के एतबार से यह महीना शाबान का होता है। इस महीने की 14 वीं रात को शब ए बारात कहा जाता है। इस दिन मस्जिदों और घरों में इबादत की जाती है और अगले दिन नफ्ली नफिल रोजे रखे जाते हैं। हाफिज सिराज वाली मस्जिद नई बस्ती बिजनौर के इमाम और खतीब कारी शमीम बताते हैं कि इस दिन अगर इंसान चाहे तो अल्लाह के सामने तौबा करके अपने गुनाहों को कबूल करके माफ करा सकता है।

इस रात में अधिकतर मुसलमान पूरी रात जागकर इबादत करते हैं। इस रात मस्जिदों में नमाजियों की संख्या बढ़ जाती है। नमाजी ईशा की नमाज के बाद कब्रिस्तान में पहुंचकर अपने अजीज मरहूमों को खिराजे अकीदत पेश करते हैं। उनकी मगफिरत के लिए अल्लाह से दुआएं मांगी जाती हैं। अगले दिन नफली रोजे भी रखे जाते हैं। एक हदीस में हजरत मोहम्मद साहब ने हजरत रजि अल्लाह ताला से फरमाया की आयशा इस साल में कितने बच्चे पैदा होने वाले हैं और कितने साल में मरने वाले हैं, सब लिख लिए जाते हैं। कहा जाता है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों के बहुत करीब होता है और इंसान रो-रोकर दुआएं मांगते हैं। शब ए बरात की रात में अल्लाह फरिश्तों से एलान कर आते हैं कि जो भी बंदा अपने गुनाहों की माफी मांगता है उसके गुनाह माफ कर दिए जाते हैं, उसे परेशानी से निजात मिल जाती है। अक्शा मस्जिद के इमाम मुफ्ती वकार अहमद बताते हैं कि इस्लाम धर्म में ईद उल फितर और ईद उल अजहा के अलावा और कोई त्योहार नहीं है। शब-ए-बारात इबादत की रात है। उन्होंने कहा कि इस रात को हलवा करना आतिशबाजी छोड़ना गलत और शरीयत के खिलाफ है। इस रात मुसलमान मर्द और औरतें नफिल नमाज कुरान पाक व तस्बीहात पढ़ें।
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