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Bijnor News: बारिश में 18 मार्ग ध्वस्त, पैदल चौकी पहुंच रहे कर्मी
Sun, 07 Sep 2025 12:42 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Sun, 07 Sep 2025 12:42 AM IST
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कालागढ़ वन मार्ग के झिरना सोत में रपटा बह जाने पर मार्ग को पैदल तय करते अधिकारी। स्रोत विभाग।
कालागढ़। मानसून के दौरान हुई तेज बारिश ने कार्बेट टाइगर रिजर्व के लगभग 18 मार्ग ध्वस्त कर दिए। वनों में स्थित चौकियों पर पहुंचने के लिए कर्मियों को 10-15 किमी तक पैदल चलना पड़ रहा है।
15 जून से कालागढ़ क्षेत्र में हो रही वर्षा ने कार्बेट टाइगर रिजर्व के मार्गों को ध्वस्त कर दिया। रपटे व पिचिंग बह गई। वन कर्मियों को एंटी पोचिंग चौकियों तक पहुंचने के लिए 10 से 15 किमी तक कीचड़ व खूंखार वन्यजीवों के बीच पैदल चलना पड़ रहा है। अब वन विभाग ने मोटर बोट व हाथियों से चौकियों पर राशन आदि पहुंचाने की तैयारी की है।
वनों में पानी होने पर सांप आदि का खतरा भी बढ़ गया है। कालागढ़, झिरना व ढेला के वनों में रास्ते ध्वस्त हैं। झिरना सोत, जमनाग्वाड़, पटेरपानी, बुक्साड़, गौजपानी व हल्दूखेड़ा वन मार्ग बदहाल हैं। रामगंगा बांध के नियंत्रण कक्ष के अनुसार 15 जून से 06 सितंबर तक 852.4 मिमी वर्षा दर्ज की जा चुकी है।
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यह हैं एंटी पोचिंग चौकी : वनों के दुर्गम क्षेत्र में अवैध शिकार व बाहरी घुसपैठ रोकने के लिए वन विभाग ने कुछ छिपी हुई चौकियां बनाई हैं। जहां से कैमरों आदि से वनों के रास्तों की निगरानी की जाती है। इन पर 24 घंटे सशस्त्र कर्मी तैनात रहते हैं।
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15 जून से कालागढ़ क्षेत्र में हो रही वर्षा ने कार्बेट टाइगर रिजर्व के मार्गों को ध्वस्त कर दिया। रपटे व पिचिंग बह गई। वन कर्मियों को एंटी पोचिंग चौकियों तक पहुंचने के लिए 10 से 15 किमी तक कीचड़ व खूंखार वन्यजीवों के बीच पैदल चलना पड़ रहा है। अब वन विभाग ने मोटर बोट व हाथियों से चौकियों पर राशन आदि पहुंचाने की तैयारी की है।
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वनों में पानी होने पर सांप आदि का खतरा भी बढ़ गया है। कालागढ़, झिरना व ढेला के वनों में रास्ते ध्वस्त हैं। झिरना सोत, जमनाग्वाड़, पटेरपानी, बुक्साड़, गौजपानी व हल्दूखेड़ा वन मार्ग बदहाल हैं। रामगंगा बांध के नियंत्रण कक्ष के अनुसार 15 जून से 06 सितंबर तक 852.4 मिमी वर्षा दर्ज की जा चुकी है।
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यह हैं एंटी पोचिंग चौकी : वनों के दुर्गम क्षेत्र में अवैध शिकार व बाहरी घुसपैठ रोकने के लिए वन विभाग ने कुछ छिपी हुई चौकियां बनाई हैं। जहां से कैमरों आदि से वनों के रास्तों की निगरानी की जाती है। इन पर 24 घंटे सशस्त्र कर्मी तैनात रहते हैं।