{"_id":"5b0ef9e44f1c1ba86e8b57f5","slug":"171527708132-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मितियों पर पतंजलि के उत्पाद बिक्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मितियों पर पतंजलि के उत्पाद बिक्री
Updated Thu, 31 May 2018 12:52 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिजनौर। अब सहकारी समितियों पर खाद के साथ-साथ पतंजलि के उत्पाद भी बिकेंगे। समितियों की आय को बरकरार रखने व किसानों को आयुर्वेदिक उत्पादों से जोड़ने के लिए यह पहल की जा रही है। इसके लिए तीन मंडलों का चयन पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत किया गया है।
सहकारी समितियों पर खाद की बिक्री होती है। खाद की बिक्री से होने वाली आमदनी से कर्मचारियों के वेतन का भुगतान किया जाता है। अब सरकार किसानों को जैविक खेती की ओर जागरूक कर रही है। इससे किसानों को अपने खेतों में रसायनिक उर्वरकों का प्रयोग नहीं करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। किसान जैविक खेती अपना रहे हैं। कई गांवों को जैविक खेती का मॉडल बनाया जा रहा है। रसायनिक उर्वरकों की बिक्री नहीं होगी तो कर्मचारियों की आय भी प्रभावित होगी। आय को प्रभावित होने से रोकने के लिए अब सहकारी समितियों पर पतंजलि के उत्पाद बेचे जाएंगे। स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद पतंजलि द्वारा ही बनाए गए पशु आहार की बिक्री की जाएगी। जैविक खेती से जुड़ रहे किसानों को आयुर्वेदिक तत्वों के लाभ भी बताए जाएंगे। इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए तीन मंडलों मुरादाबाद, मेरठ व सहारनपुर का चयन किया गया है। बिजनौर में 96 समितियां हैं। इनमे शुरूआत में 40 समितियों पर पतंजलि के उत्पाद बेचे जाएंगे।
सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता अमित त्यागी के अनुसार समितियों में जल्दी ही पतंजलि के उत्पाद बिकने शुरू होंगे। किसानों को आयुर्वेदिक पदार्थो के उपभोग के प्रति जागरूक किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
सहकारी समितियों पर खाद की बिक्री होती है। खाद की बिक्री से होने वाली आमदनी से कर्मचारियों के वेतन का भुगतान किया जाता है। अब सरकार किसानों को जैविक खेती की ओर जागरूक कर रही है। इससे किसानों को अपने खेतों में रसायनिक उर्वरकों का प्रयोग नहीं करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। किसान जैविक खेती अपना रहे हैं। कई गांवों को जैविक खेती का मॉडल बनाया जा रहा है। रसायनिक उर्वरकों की बिक्री नहीं होगी तो कर्मचारियों की आय भी प्रभावित होगी। आय को प्रभावित होने से रोकने के लिए अब सहकारी समितियों पर पतंजलि के उत्पाद बेचे जाएंगे। स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद पतंजलि द्वारा ही बनाए गए पशु आहार की बिक्री की जाएगी। जैविक खेती से जुड़ रहे किसानों को आयुर्वेदिक तत्वों के लाभ भी बताए जाएंगे। इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए तीन मंडलों मुरादाबाद, मेरठ व सहारनपुर का चयन किया गया है। बिजनौर में 96 समितियां हैं। इनमे शुरूआत में 40 समितियों पर पतंजलि के उत्पाद बेचे जाएंगे।
विज्ञापन
सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता अमित त्यागी के अनुसार समितियों में जल्दी ही पतंजलि के उत्पाद बिकने शुरू होंगे। किसानों को आयुर्वेदिक पदार्थो के उपभोग के प्रति जागरूक किया जाएगा।
विज्ञापन