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बासमती चावलों से महकदार हो रहे किसानों के खेत

Mon, 11 Sep 2017 01:24 AM IST
Updated Mon, 11 Sep 2017 01:24 AM IST
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बासमती चावलों से महकदार हो रहे किसानों के खेत
बिजनौर। जिले के किसानों को बासमती चावल की खेती भाने लगी है। इस बार जिले में पिछले साल से भी ज्यादा बासमती चावल बोया गया है। बासमती चावल के खेतों वाले क्षेत्र इसकी खुशबू से महक रहे हैं। इस बार फसल में कोई बीमारी भी नहीं है। इससे किसानों को फसल से खासा मुनाफा होना तय माना जा रहा है।
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जिले में पहले बासमती चावल की बंपर खेती होती थी। जिले में पैदा होने वाला बासमती चावल ईरान सहित कई खाड़ी देशों को बेचा जाता था, लेकिन कई सालों तक चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगने के कारण बासमती चावल बोने वाले किसानों को घाटा आने लगा था। उन्होंने इस चावल की खेती बंद कर दी थी। बीते साल बासमती चावल के निर्यात पर लगी रोक हटा दी गई थी। जिले के किसानों ने भी फिर से इस प्रजाति की खेती शुरू कर दी थी। बीते साल जिले में करीब 28 हजार हेक्टेयर बासमती चावल बोया गया था, हालांकि फसल में बीमारी आने के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था। जिले में इस साल 30 हजार हेक्टेयर जमीन में बासमती प्रजाति बोयी गई है। इस बार फसल में कोई बीमारी भी नहीं आई है। इससे इस साल किसानों को फायदा होना तय है।
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किसानों द्वारा बोया जाने वाला साधारण प्रजाति का चावल तीन हजार क्विंटल तक बिकता है, जबकि बासमती चावल की फसल खेत से ही सात से आठ हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बिक जाती है। इस चावल से सुगंध आती है। यहां तक कि जहां यह फसल बोयी जाती है, वहां का पूरा क्षेत्र भी बासमती की खुशबू से महका रहता है। इसकी खाड़ी देशों में बहुत डिमांड है। जिला कृषि अधिकारी डा.अवधेश मिश्र के अनुसार बासमती चावल की खेती में किसानों का रुझान बढ़ा है। फसल में इस बार बीमारी न आने के कारण अच्छी पैदावार होने का अनुमान है।
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बीते साल किसानों ने बासमती की पीबी-6 प्रजाति बोई थी। इस प्रजाति में बीमारी आ गई थी। इस बार किसानों ने पीबी-9, पूसावन, 1121 व 1509 प्रजाति बोई हैं। इन प्रजातियों में बीमारी नहीं आई है। पहले इस चावल की बुआई का एरिया रिकॉर्ड नहीं किया जाता था। पंजाब आदि राज्यों के व्यापारी जिले से कम कीमत पर किसानों से चावल खरीदकर ले जाते थे, लेकिन अब जिले में ही कई कंपनियां आकर चावल खरीदती है।
े अजीत चौधरी
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