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जमानत अजी निरस्त
Updated Fri, 24 Aug 2018 12:29 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश तिवारी ने खनन के नाम पर 20 लाख रुपये हड़पने के आरोपी मोहम्मद आसिफ की जमानत याचिका निरस्त कर दी है।
शासकीय अधिवक्ता श्याम स्वरूप शर्मा के अनुसार बिजनौर के मोहल्ला चाहशीरी निवासी मुजाहिद ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि थाना मंडावली निवासी मोहम्मद आसिफ और उसकी पत्नी अंजुम आठ जनवरी 2014 को दिन के 12 बजे उसके घर आए। आसिफ से उसकी मित्रता थी, जिसका लाभ उठाते हुए दंपति ने जिला हरिद्वार में खनन कार्य में साझीदार बनने के लिए कहा। मुजाहिद ने उनकी बातों को विश्वास करके आठ जनवरी 2014 को पांच लाख, तीन फरवरी को दस लाख, नौ फरवरी 2014 को पांच लाख कुल 20 लाख रुपये आसिफ और उसकी पत्नी अंजुम को दिए। पैसों की रसीद और साझेदारी डीड हरिद्वार में रजिस्टर्ड कराने की बात तय हुई। हरिद्वार में उसने बिना पढ़े डीड पर हस्ताक्षर कर दिए। जब घर आकर उसने डीड को पढ़ा तो पता चला कि कारोबार चलाने के लिए दस लाख रुपये की जरूरत थी। पार्टनरशिप डीड में उसे दस प्रतिशत का हिस्सेदार रखा गया था और उसके द्वारा एक लाख रुपये अदा करने की बात लिखी गई थी। अभियोग पंजीकृत होने के चार-पांच दिन बाद आसिफ और उसके साथियों ने उसके साथ काम करने से इंकार कर दिया। जब मुजाहिद ने उससे अपने पैसे मांगे तो एक जून 2018 को आसिफ अपने साथियों के साथ उसके पास आया और उसकी कनपटी पर तमंचा रखते हुए उसे धमकाया। जिला जज ने इस मामले में पर्याप्त आधार न पाते हुए आसिफ की जमानत याचिका निरस्त कर दी है।
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बिजनौर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश तिवारी ने खनन के नाम पर 20 लाख रुपये हड़पने के आरोपी मोहम्मद आसिफ की जमानत याचिका निरस्त कर दी है।
शासकीय अधिवक्ता श्याम स्वरूप शर्मा के अनुसार बिजनौर के मोहल्ला चाहशीरी निवासी मुजाहिद ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि थाना मंडावली निवासी मोहम्मद आसिफ और उसकी पत्नी अंजुम आठ जनवरी 2014 को दिन के 12 बजे उसके घर आए। आसिफ से उसकी मित्रता थी, जिसका लाभ उठाते हुए दंपति ने जिला हरिद्वार में खनन कार्य में साझीदार बनने के लिए कहा। मुजाहिद ने उनकी बातों को विश्वास करके आठ जनवरी 2014 को पांच लाख, तीन फरवरी को दस लाख, नौ फरवरी 2014 को पांच लाख कुल 20 लाख रुपये आसिफ और उसकी पत्नी अंजुम को दिए। पैसों की रसीद और साझेदारी डीड हरिद्वार में रजिस्टर्ड कराने की बात तय हुई। हरिद्वार में उसने बिना पढ़े डीड पर हस्ताक्षर कर दिए। जब घर आकर उसने डीड को पढ़ा तो पता चला कि कारोबार चलाने के लिए दस लाख रुपये की जरूरत थी। पार्टनरशिप डीड में उसे दस प्रतिशत का हिस्सेदार रखा गया था और उसके द्वारा एक लाख रुपये अदा करने की बात लिखी गई थी। अभियोग पंजीकृत होने के चार-पांच दिन बाद आसिफ और उसके साथियों ने उसके साथ काम करने से इंकार कर दिया। जब मुजाहिद ने उससे अपने पैसे मांगे तो एक जून 2018 को आसिफ अपने साथियों के साथ उसके पास आया और उसकी कनपटी पर तमंचा रखते हुए उसे धमकाया। जिला जज ने इस मामले में पर्याप्त आधार न पाते हुए आसिफ की जमानत याचिका निरस्त कर दी है।