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सरकारी अस्पतालों में नहीं डेंगू की पुख्ता जांच
Updated Sun, 03 Sep 2017 11:44 PM IST
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बिजनौर । जिले के सरकारी अस्पतालों में डेंगू की पुख्ता जांच के संसाधन उपलब्ध नहीं है। लैब से मरीज के सीरम को जांच के लिए मेरठ मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है या फिर मरीज को प्राइवेट लैब का सहारा लेना पड़ता है।
जिले में डेंगू और मलेरिया के मरीज बढ़ते जा रहे हैं। प्राइवेट व सरकारी अस्पताल में दर्जनों मरीज भर्ती है, लेकिन बिजनौर के सीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पताल में भी डेंगू की पुख्ता जांच नहीं है। डेंगू के लक्षण मिलने पर मरीज की एनएस वन और एंटी बॉडीज प्राथमिक जांच तो जिला अस्पताल में हो सकती है। एनएस वन , एंटी बॉडीज पॉजिटिव पाया जाता है तो डेंगू की पुख्ता पुष्टि करने के लिए जिला अस्पताल की लैब में मरीज का सिरम लेकर सीएमओ कार्यालय भेजा जाता है। इसके बाद इसको मेरठ मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है। वहां एलआईजा की जांच होती है। एलआईजा पॉजिटिव पाएं जाने पर डेंगू की पुष्टि हो जाती है। मेरठ से भी जांच हाकर आने में करीब तीन से चार दिन या उसके अधिक भी लग जाते है। चिकित्सकों का कहना है कि एनएस वन और एंटी बॉडिज पॉजिटिव पाए जाने पर ही मरीज को डेंगू का उपचार दिया जाता है। एलआईजा की जांच में डेंगू पुख्ता होने पर मरीज को और अच्छे से इलाज किया जाता है।
सीएमएस डॉ. राकेश दूबे ने बताया कि जिला अस्पताल में डेंगू की एनएस वन और एंटी बॉडिज प्राथमिक जांच हो जाती है, लेकिन एलआईजा की जांच मेरठ मेडिकल कॉलेज में होती है। एलआईजा की जांच के बाद ही डेंगू की पुष्टि होती है।
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एक साथ होती है करीब 70 जांच
जिला अस्पताल स्थित कार्यशाला इंचार्ज डॉ. संजय शंकर ने बताया कि मेरठ मेडिकल कॉलेज में एलआईजा की जांच मशीन पर करीब 70 जांच एक साथ होती है। जब तक वहां 70 मरीजों के सैंपिल नहीं आते है तो जांच नहीं होती है। कई बार इस कारण से कई दिन लग जाते है।
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जिले में डेंगू और मलेरिया के मरीज बढ़ते जा रहे हैं। प्राइवेट व सरकारी अस्पताल में दर्जनों मरीज भर्ती है, लेकिन बिजनौर के सीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पताल में भी डेंगू की पुख्ता जांच नहीं है। डेंगू के लक्षण मिलने पर मरीज की एनएस वन और एंटी बॉडीज प्राथमिक जांच तो जिला अस्पताल में हो सकती है। एनएस वन , एंटी बॉडीज पॉजिटिव पाया जाता है तो डेंगू की पुख्ता पुष्टि करने के लिए जिला अस्पताल की लैब में मरीज का सिरम लेकर सीएमओ कार्यालय भेजा जाता है। इसके बाद इसको मेरठ मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है। वहां एलआईजा की जांच होती है। एलआईजा पॉजिटिव पाएं जाने पर डेंगू की पुष्टि हो जाती है। मेरठ से भी जांच हाकर आने में करीब तीन से चार दिन या उसके अधिक भी लग जाते है। चिकित्सकों का कहना है कि एनएस वन और एंटी बॉडिज पॉजिटिव पाए जाने पर ही मरीज को डेंगू का उपचार दिया जाता है। एलआईजा की जांच में डेंगू पुख्ता होने पर मरीज को और अच्छे से इलाज किया जाता है।
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सीएमएस डॉ. राकेश दूबे ने बताया कि जिला अस्पताल में डेंगू की एनएस वन और एंटी बॉडिज प्राथमिक जांच हो जाती है, लेकिन एलआईजा की जांच मेरठ मेडिकल कॉलेज में होती है। एलआईजा की जांच के बाद ही डेंगू की पुष्टि होती है।
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एक साथ होती है करीब 70 जांच
जिला अस्पताल स्थित कार्यशाला इंचार्ज डॉ. संजय शंकर ने बताया कि मेरठ मेडिकल कॉलेज में एलआईजा की जांच मशीन पर करीब 70 जांच एक साथ होती है। जब तक वहां 70 मरीजों के सैंपिल नहीं आते है तो जांच नहीं होती है। कई बार इस कारण से कई दिन लग जाते है।