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गैर जमानती अपराधों में अब मिल सकेगी अग्रिम जमानत
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बेगुनाहों को झूठे मुकदमों में नहीं जाना पड़ेगा जेल
बिजनौर। उत्तर प्रदेश में 43 साल बाद गैर जमानती अपराधों के मामलों में आरोपी को अग्रिम जमानत मिल जाने का प्रावधान लागू हो जाने से वकीलों में खुशी की लहर दौड़ गई। यूपी में इमरजेंसी के दौरान 1976 में अग्रिम जमानत का प्रावधान खत्म कर दिया गया था।
उत्तर प्रदेश में अग्रिम जमानत का प्रावधान खत्म हो जाने के कारण कई मामलों में निर्दोष लोगों को भी जेल जाना पड़ता था। अग्रिम जमानत को फिर से लागू किए जाने के लिए काफी समय से मांग चल रही थी। हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट ने भी अग्रिम जमानत उत्तर प्रदेश में लागू करने के लिए राज्य सरकार से कहा था। पर इसके बावजूद भी विभिन्न कारणों से यह मामला लटका था। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा एक जून को इस संबंध में लाए गए विधेयक को मंजूरी दिए जाने के बाद छह जून को राज्य सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर अग्रिम जमानत को यूपी में लागू कर दिया है। वकीलों ने राज्य सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एसके बबली का कहना है कि अग्रिम जमानत का प्रावधान यूपी में लागू किए जाना सरकार का उचित निर्णय है। बहुत सारे ऐसे मामलों में बेगुनाह लोगों, निर्दोष महिलाओं व कुंवारी लड़कियों को जेल जाना पड़ता था। इससे उनका भविष्य खराब हो जाता था। अग्रिम जमानत का प्रावधान लागू हो जाने से बेगुनाह लोगों को न्याय मिल सकेगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता विनीत विश्नोई के अनुसार अग्रिम जमानत का निर्णय आम जनता के लिए बहुत सुखदायी रहेगा। इसकी मांग वर्षों से लंबित थी। अनेक मामलों में बेगुनाहों को जेल जाना पड़ता था। अब अग्रिम जमानत का प्रावधान लागू हो जाने के बाद ऐसे लोगों या बेगुनाह लोगों को न्याय मिल सकेगा जिन्हें जबरदस्ती झूठा फंसाया जाने का अंदेशा हो।
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पूर्व डीजीसी सत्यव्रत चौहान के अनुसार अग्रिम जमानत लागू करने का वर्तमान सरकार का निर्णय बहुत ही अच्छा व प्रेरणादायक है। इससे निर्दोष व संभ्रांत लोगों का पुलिस उत्पीड़न रूकेगा व बिना किसी अपराध से जेल जाने से बचने पर उन्हें राहत मिलेगी। इससे स्वतंत्रता के अधिकार का हनन भी रुकेगा।
जिला बार के महासचिव नवदीप सिंह के अनुसार अधिवक्ता समुदाय अग्रिम जमानत दिए जाने के निर्णय का स्वागत करता है। हमारे समाज में विभिन्न परिस्थितियों में झूठे मुकदमे लिखाए जाने का चलन है। जिस कारण प्रतिष्ठित लोगों व महिलाओं को भी बेहद परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह प्रावधान लागू हो जाने के बाद बेगुनाह लोगों को राहत मिलेगी। इस कानून के बन जाने से जनता में कानून के प्रति विश्वास बढ़ेगा और झूठे मुकदमों पर अंकुश लगेगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रवीर सिंह के अनुसार अग्रिम जमानत के विधेयक का पारित होना न्यायिक व्यवस्था में एक अच्छा कदम है। यूपी में इस कानून के लागू न होने से अनेक निर्दोष लोगों को जेल जाना पड़ता था तथा उनकी स्वतंत्रता का हनन होता था। यह एक स्वागत योग्य कदम है जिसका अधिवक्ता समुदाय स्वागत करता है।
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बिजनौर। उत्तर प्रदेश में 43 साल बाद गैर जमानती अपराधों के मामलों में आरोपी को अग्रिम जमानत मिल जाने का प्रावधान लागू हो जाने से वकीलों में खुशी की लहर दौड़ गई। यूपी में इमरजेंसी के दौरान 1976 में अग्रिम जमानत का प्रावधान खत्म कर दिया गया था।
उत्तर प्रदेश में अग्रिम जमानत का प्रावधान खत्म हो जाने के कारण कई मामलों में निर्दोष लोगों को भी जेल जाना पड़ता था। अग्रिम जमानत को फिर से लागू किए जाने के लिए काफी समय से मांग चल रही थी। हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट ने भी अग्रिम जमानत उत्तर प्रदेश में लागू करने के लिए राज्य सरकार से कहा था। पर इसके बावजूद भी विभिन्न कारणों से यह मामला लटका था। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा एक जून को इस संबंध में लाए गए विधेयक को मंजूरी दिए जाने के बाद छह जून को राज्य सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर अग्रिम जमानत को यूपी में लागू कर दिया है। वकीलों ने राज्य सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एसके बबली का कहना है कि अग्रिम जमानत का प्रावधान यूपी में लागू किए जाना सरकार का उचित निर्णय है। बहुत सारे ऐसे मामलों में बेगुनाह लोगों, निर्दोष महिलाओं व कुंवारी लड़कियों को जेल जाना पड़ता था। इससे उनका भविष्य खराब हो जाता था। अग्रिम जमानत का प्रावधान लागू हो जाने से बेगुनाह लोगों को न्याय मिल सकेगा।
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वरिष्ठ अधिवक्ता विनीत विश्नोई के अनुसार अग्रिम जमानत का निर्णय आम जनता के लिए बहुत सुखदायी रहेगा। इसकी मांग वर्षों से लंबित थी। अनेक मामलों में बेगुनाहों को जेल जाना पड़ता था। अब अग्रिम जमानत का प्रावधान लागू हो जाने के बाद ऐसे लोगों या बेगुनाह लोगों को न्याय मिल सकेगा जिन्हें जबरदस्ती झूठा फंसाया जाने का अंदेशा हो।
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पूर्व डीजीसी सत्यव्रत चौहान के अनुसार अग्रिम जमानत लागू करने का वर्तमान सरकार का निर्णय बहुत ही अच्छा व प्रेरणादायक है। इससे निर्दोष व संभ्रांत लोगों का पुलिस उत्पीड़न रूकेगा व बिना किसी अपराध से जेल जाने से बचने पर उन्हें राहत मिलेगी। इससे स्वतंत्रता के अधिकार का हनन भी रुकेगा।
जिला बार के महासचिव नवदीप सिंह के अनुसार अधिवक्ता समुदाय अग्रिम जमानत दिए जाने के निर्णय का स्वागत करता है। हमारे समाज में विभिन्न परिस्थितियों में झूठे मुकदमे लिखाए जाने का चलन है। जिस कारण प्रतिष्ठित लोगों व महिलाओं को भी बेहद परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह प्रावधान लागू हो जाने के बाद बेगुनाह लोगों को राहत मिलेगी। इस कानून के बन जाने से जनता में कानून के प्रति विश्वास बढ़ेगा और झूठे मुकदमों पर अंकुश लगेगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रवीर सिंह के अनुसार अग्रिम जमानत के विधेयक का पारित होना न्यायिक व्यवस्था में एक अच्छा कदम है। यूपी में इस कानून के लागू न होने से अनेक निर्दोष लोगों को जेल जाना पड़ता था तथा उनकी स्वतंत्रता का हनन होता था। यह एक स्वागत योग्य कदम है जिसका अधिवक्ता समुदाय स्वागत करता है।