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देश की रक्षा करने वाले फौजी अपने ही घर में उपेक्षा का शिकार
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देश की रक्षा करने वाले फौजी अपने ही घर में उपेक्षा का शिकार
बिजनौर। देेश की सीमा पर दुश्मन के छक्के छुड़ाने वाला सैनिक अपने घर की सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं। छोटी-छोटी समस्या के लिए थाने, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इन सैन्यकर्मियों के मुख्यालय से आने वाले पत्र भी प्रशासनिक अफसरों के लिए कोई मायने नहीं रखते। फौजियों की छुट्टियां इन छोटी-छोटी समस्याओं को खत्म कराने में अफसरों के कार्यालय की दौड़धूप करने में ही खत्म हो जाती हैं। इन फौजियों की समस्या को हम अपनी समस्या समझें तो हमारे फौजी हम पर उसी तरह अभिमान करेंगे जैसे हम उन पर करते हैं।
पूर्व डीएम जगतराज और एसपी प्रभाकर चौधरी ने अपने कार्यकाल में आदेश दिए थे कि सैन्यकर्मी, अर्द्धसैनिक और अधिकारियों को किसी भी सरकारी कार्यालय में आने पर पूर्ण सम्मान दिया जाए। उनकी समस्या सुनी जाए। प्राथमिकता के आधार पर उसका निस्तारण कराया जाए, लेकिन ये आदेश कभी लागू नहीं हुआ। आज भी जवान अपनी समस्याओं को लेकर परेशान हैं। कुछ तो छोटी- छोटी समस्या को लेकर परेशान हैं।
‘छुट्टियों में आकर काटते हैं नगरपालिका के चक्कर’
असम राइफल के जवान नूरपुर के मोहल्ला रामनगर निवासी जागेश कुमार जूझ रहे हैं। घर के आगे कच्चे रास्ते को बनवाने के लिए वह हर बार छुट्टियों में नगरपालिका के चक्कर काटते हैं, लेकिन आज तक उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। जागेश कुमार असम राइफल में कार्यरत हैं। उसकी तैनाती मणिपुर में है। मूल रूप से स्योहारा के गांव विशनपुरा कोट निवासी जागेश के अनुसार उसने करीब पांच वर्ष पूर्व स्योहारा रोड पर मोहल्ला रामनगर में मकान बनाया था। उनका परिवार इसी मकान में रहता है। मकान के आगे का रास्ता कच्चा है। इसमें बरसात के दिनों में घुटनों तक पानी भर जाता है। जागेश जब छुट्टियों में आते हैं तो नगरपालिका के दफ्तर में जाकर रास्ते में सीसी रोड बनवाने की मांग करते हैं, लेकिन आज तक उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। जागेश का कहना है कि वह पालिका के चक्कर काट काटकर थक चुके हैं और उसकी परिवार के साथ बिताने के लिए साल में मिलने वाली उसकी छुट्टियां रास्ता बनवाने के चक्कर में निकल जाती हैं। उन्होंने नगरपालिका से अपने घर के सामने सीसी रोड का निर्माण कराए जाने की मांग की है। इस संबंध में पालिकाध्यक्ष फारीना इरशाद का कहना है कि मामला उनकी जानकारी में नहीं है। शीघ्र ही उक्त सड़क का निर्माण करा दिया जाएगा।
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‘अफसरों और नेताओं के आगे हाथ जोड़ने पड़ते हैं ’
नगीना के पास गांव पखनपुर निवासी सोमपाल सिंह हिसार में बीएसएफ में डीडी क्लर्क हैं। 29 अप्रैल को उनके भाई सतीश कुमार पर उसके ससुरालवालों ने हमला किया। सोमपाल सिंह ने बिजनौर थाने और पुलिस कंट्रोल रूम में भी कॉल किया, लेकिन कोई पुलिसकर्मी उनके भाई के पास नहीं पहुंचा। एसपी देहात को बताने पर पुलिस उनके भाई को गंभीर घायल अवस्था में थाने लेकर आई। सोमपाल सिंह के अनुसार उन्होंने थाना प्रभारी व एसएसआई से फोन पर उसके भाई को उपचार दिलाने को कहा तो उल्टा उनसे ही अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। सोमपाल के अधिकारियों के बात करने पर भी कुछ न हुआ। पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट को झूठा बताकर केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी और बिजनौर पुलिस ने उन्हें भी झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। 20 मई को वे अवकाश पर आए तो सबसे पहले एसपी सिटी से मिले। उन्होंने आश्वासन दिया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कहा कि वे अपने परिवार को छोड़कर देश की रक्षा करते हैं, लेकिन उनके परिवार की रक्षा नहीं की जा रही है। कहा कि अपने परिवार की रक्षा के लिए उन्हें अफसरों और नेताओं के हाथ पैर जोड़ने पड़ते हैं।
‘अधिकारी सिर्फ देते हैं आश्वासन’
सीआरपीएफ में कांस्टेबल के रूप में असम में तैनात जसवीर सिंह मूल रूप से धामपुर के गांव सरकथलमाधो के निवासी हैं। जसवीर की गांव में खेती की जमीन है। आरोप है कि कुछ समय पहले गांव के कुछ लोगों ने उसकी जमीन का कुछ हिस्सा कब्जा लिया। इसकी शिकायत उनकी पत्नी संगीता रानी ने चार मई को एसडीएम से की। एसडीएम धीरेंद्र सिंह के आदेश पर लेखपाल ने पैमाइश के बाद हदबंदी कर दी थी, लेकिन आरोपियों ने उसे उखाड़ दिया और जमीन पर फिर से कब्जा जमा लिया। जसवीर छुट्टी लेकर आए और फिर से पत्नी के साथ एसडीएम से मिले। एसडीएम ने इस मामले में कानूनी रूप से पैमाइश करा कर हदबंदी करने की बात कही है। एसडीएम ने कहा कि जमीन पर अवैध तौर पर कब्जा करने वालों पर कार्रवाई होगी। उनकी जमीन को हरहाल में कब्जामुक्त कराने का प्रयास होगा।
‘विभाग और अधिकारी नहीं ले रहे रुचि’
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस में कार्यरत गांव खानपुर माधो उर्फ तिमरपुर निवासी दिलेराम की 27 बीघा भूमि पर एक माफिया ने कब्जा कर रखा है। कई माह की जद्दोजहद के बाद उसका मुकदमा दर्ज हुआ, लेकिन जमीन से अवैध कब्जा अब तक नहीं हटवाया गया है। मुकदमा भी डीएम को प्रार्थनापत्र देने के बाद दर्ज हुआ। दिलेराम बताते हैं कि उनकी जमीन को कब्जा मुक्त कराने में न राजस्व विभाग की रुचि है और न ही पुलिस की। दिलेराम कहते हैं कि मंडावर थाने के एक दरोगा ने तो उसे उकसाना चाहा। कहा कि कैसा फौजी है, अपनी जमीन खाली नहीं करा सकता।
‘ऐसे संवेदनशील अधिकारी की है जरूरत’
बीएसएफ के डिप्टी नागेंद्र पाल बताते हैं कि चांदपुर में उनके घर के सामने पानी भरा रहता था। पानी भरने का कारण परेशानी होती थी। इसकी शिकायत उन्होंने हर स्तर पर की लेकिन कुछ नहीं हुआ। कुछ पत्रकारों ने डीएम बी चंद्रकला को उनकी समस्या बताई। उस समय वह बंग्लादेश के बार्डर पर थे। डीएम चंद्रकला जी ने फोन कर उनकी समस्या सुनी। उसी दिन नायब तहसीलदार उनके घर गए। मामले की जानकारी ली। दूसरे दिन तहसीलदार, तीसरे दिन एसडीएम मौके पर गए और चौथे दिन काम शुरू हो गया। एक सप्ताह में उनकी समस्या का निदान हो गया। वे कहते हैं कि ऐसे संवेदनशील अधिकारी की जरूरत है।
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बिजनौर। देेश की सीमा पर दुश्मन के छक्के छुड़ाने वाला सैनिक अपने घर की सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं। छोटी-छोटी समस्या के लिए थाने, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इन सैन्यकर्मियों के मुख्यालय से आने वाले पत्र भी प्रशासनिक अफसरों के लिए कोई मायने नहीं रखते। फौजियों की छुट्टियां इन छोटी-छोटी समस्याओं को खत्म कराने में अफसरों के कार्यालय की दौड़धूप करने में ही खत्म हो जाती हैं। इन फौजियों की समस्या को हम अपनी समस्या समझें तो हमारे फौजी हम पर उसी तरह अभिमान करेंगे जैसे हम उन पर करते हैं।
पूर्व डीएम जगतराज और एसपी प्रभाकर चौधरी ने अपने कार्यकाल में आदेश दिए थे कि सैन्यकर्मी, अर्द्धसैनिक और अधिकारियों को किसी भी सरकारी कार्यालय में आने पर पूर्ण सम्मान दिया जाए। उनकी समस्या सुनी जाए। प्राथमिकता के आधार पर उसका निस्तारण कराया जाए, लेकिन ये आदेश कभी लागू नहीं हुआ। आज भी जवान अपनी समस्याओं को लेकर परेशान हैं। कुछ तो छोटी- छोटी समस्या को लेकर परेशान हैं।
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‘छुट्टियों में आकर काटते हैं नगरपालिका के चक्कर’
असम राइफल के जवान नूरपुर के मोहल्ला रामनगर निवासी जागेश कुमार जूझ रहे हैं। घर के आगे कच्चे रास्ते को बनवाने के लिए वह हर बार छुट्टियों में नगरपालिका के चक्कर काटते हैं, लेकिन आज तक उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। जागेश कुमार असम राइफल में कार्यरत हैं। उसकी तैनाती मणिपुर में है। मूल रूप से स्योहारा के गांव विशनपुरा कोट निवासी जागेश के अनुसार उसने करीब पांच वर्ष पूर्व स्योहारा रोड पर मोहल्ला रामनगर में मकान बनाया था। उनका परिवार इसी मकान में रहता है। मकान के आगे का रास्ता कच्चा है। इसमें बरसात के दिनों में घुटनों तक पानी भर जाता है। जागेश जब छुट्टियों में आते हैं तो नगरपालिका के दफ्तर में जाकर रास्ते में सीसी रोड बनवाने की मांग करते हैं, लेकिन आज तक उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। जागेश का कहना है कि वह पालिका के चक्कर काट काटकर थक चुके हैं और उसकी परिवार के साथ बिताने के लिए साल में मिलने वाली उसकी छुट्टियां रास्ता बनवाने के चक्कर में निकल जाती हैं। उन्होंने नगरपालिका से अपने घर के सामने सीसी रोड का निर्माण कराए जाने की मांग की है। इस संबंध में पालिकाध्यक्ष फारीना इरशाद का कहना है कि मामला उनकी जानकारी में नहीं है। शीघ्र ही उक्त सड़क का निर्माण करा दिया जाएगा।
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‘अफसरों और नेताओं के आगे हाथ जोड़ने पड़ते हैं ’
नगीना के पास गांव पखनपुर निवासी सोमपाल सिंह हिसार में बीएसएफ में डीडी क्लर्क हैं। 29 अप्रैल को उनके भाई सतीश कुमार पर उसके ससुरालवालों ने हमला किया। सोमपाल सिंह ने बिजनौर थाने और पुलिस कंट्रोल रूम में भी कॉल किया, लेकिन कोई पुलिसकर्मी उनके भाई के पास नहीं पहुंचा। एसपी देहात को बताने पर पुलिस उनके भाई को गंभीर घायल अवस्था में थाने लेकर आई। सोमपाल सिंह के अनुसार उन्होंने थाना प्रभारी व एसएसआई से फोन पर उसके भाई को उपचार दिलाने को कहा तो उल्टा उनसे ही अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। सोमपाल के अधिकारियों के बात करने पर भी कुछ न हुआ। पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट को झूठा बताकर केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी और बिजनौर पुलिस ने उन्हें भी झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। 20 मई को वे अवकाश पर आए तो सबसे पहले एसपी सिटी से मिले। उन्होंने आश्वासन दिया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कहा कि वे अपने परिवार को छोड़कर देश की रक्षा करते हैं, लेकिन उनके परिवार की रक्षा नहीं की जा रही है। कहा कि अपने परिवार की रक्षा के लिए उन्हें अफसरों और नेताओं के हाथ पैर जोड़ने पड़ते हैं।
‘अधिकारी सिर्फ देते हैं आश्वासन’
सीआरपीएफ में कांस्टेबल के रूप में असम में तैनात जसवीर सिंह मूल रूप से धामपुर के गांव सरकथलमाधो के निवासी हैं। जसवीर की गांव में खेती की जमीन है। आरोप है कि कुछ समय पहले गांव के कुछ लोगों ने उसकी जमीन का कुछ हिस्सा कब्जा लिया। इसकी शिकायत उनकी पत्नी संगीता रानी ने चार मई को एसडीएम से की। एसडीएम धीरेंद्र सिंह के आदेश पर लेखपाल ने पैमाइश के बाद हदबंदी कर दी थी, लेकिन आरोपियों ने उसे उखाड़ दिया और जमीन पर फिर से कब्जा जमा लिया। जसवीर छुट्टी लेकर आए और फिर से पत्नी के साथ एसडीएम से मिले। एसडीएम ने इस मामले में कानूनी रूप से पैमाइश करा कर हदबंदी करने की बात कही है। एसडीएम ने कहा कि जमीन पर अवैध तौर पर कब्जा करने वालों पर कार्रवाई होगी। उनकी जमीन को हरहाल में कब्जामुक्त कराने का प्रयास होगा।
‘विभाग और अधिकारी नहीं ले रहे रुचि’
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस में कार्यरत गांव खानपुर माधो उर्फ तिमरपुर निवासी दिलेराम की 27 बीघा भूमि पर एक माफिया ने कब्जा कर रखा है। कई माह की जद्दोजहद के बाद उसका मुकदमा दर्ज हुआ, लेकिन जमीन से अवैध कब्जा अब तक नहीं हटवाया गया है। मुकदमा भी डीएम को प्रार्थनापत्र देने के बाद दर्ज हुआ। दिलेराम बताते हैं कि उनकी जमीन को कब्जा मुक्त कराने में न राजस्व विभाग की रुचि है और न ही पुलिस की। दिलेराम कहते हैं कि मंडावर थाने के एक दरोगा ने तो उसे उकसाना चाहा। कहा कि कैसा फौजी है, अपनी जमीन खाली नहीं करा सकता।
‘ऐसे संवेदनशील अधिकारी की है जरूरत’
बीएसएफ के डिप्टी नागेंद्र पाल बताते हैं कि चांदपुर में उनके घर के सामने पानी भरा रहता था। पानी भरने का कारण परेशानी होती थी। इसकी शिकायत उन्होंने हर स्तर पर की लेकिन कुछ नहीं हुआ। कुछ पत्रकारों ने डीएम बी चंद्रकला को उनकी समस्या बताई। उस समय वह बंग्लादेश के बार्डर पर थे। डीएम चंद्रकला जी ने फोन कर उनकी समस्या सुनी। उसी दिन नायब तहसीलदार उनके घर गए। मामले की जानकारी ली। दूसरे दिन तहसीलदार, तीसरे दिन एसडीएम मौके पर गए और चौथे दिन काम शुरू हो गया। एक सप्ताह में उनकी समस्या का निदान हो गया। वे कहते हैं कि ऐसे संवेदनशील अधिकारी की जरूरत है।