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लंबी बीमारी के बाद असम ररायफल में तैनात जवान की उपचार के दौरान मौत, परिजनो में मचा कोहराम
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बीमारी से सेना के जवान की मौत
अफजलगढ़। गांव दल्लीवाला निवासी असम रायफल में तैनात 42 वर्षीय जवान महेश सिंह की बीमारी से मृत्यु हो गई। सैनिक अपने पीछे एक पुत्री, दो पुत्रों को छोड़ गया है। असम रायफल की टुकड़ी ने जवान को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। मंगलवार दोपहर रामगंगा घाट पर उसका अंतिम संस्कार किया गया।
सैनिक के भाई नरेश ने बताया कि उनका भाई महेश मणिपुर में असम रायफल की 33 रेजिमेंट में हवलदार के पद पर तैनात था। जिसकी बीमारी के चलते दोनों किडनी खराब हो गई थीं। लगभग छह वर्ष पहले उनकी माता लीला देवी ने अपनी एक किडनी महेश को दी थी। लेकिन एक वर्ष पहले महेश की फिर हालत खराब हो गई। बीते पांच वर्षों से महेश का आर्मी अस्पताल कोलकाता में उपचार चल रहा था। 20 अप्रैल की शाम उपचार के दौरान महेश की मौत हो गई। मंगलवार दोपहर जवान का शव उनके पैतृक गांव पहुंचा। जवान के घर अंतिम दर्शन करने वालों का तांता लग गया। जवान की शव यात्रा आर्मी बैंड के साथ रामगंगा घाट भूतपुरी पहुंची। जहां असम रायफल की एक टुकड़ी ने जवान को गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम सलामी दी। जवान के छोटे पुत्र विशाल ने मुखाग्नि दी। महेश के दो और भाई असम रायफल में जवान हैं। उनकी बड़ी पुत्री शिवानी भी दो वर्ष पहले असम रायफल में भर्ती हुई है। जो बिहार के सिकुबी में ट्रेनिंग पर है। गार्ड ऑफ ऑनर के समय 32 यूपी एनसीसी बटालियन के कर्नल अरिदमन शर्मा, सूबेदार मेजर भौर सिंह बिष्ट और 223 रेजिमेंट के फील्ड सूबेदार व पांच अन्य साथी जवान मौजूद रहे।
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अफजलगढ़। गांव दल्लीवाला निवासी असम रायफल में तैनात 42 वर्षीय जवान महेश सिंह की बीमारी से मृत्यु हो गई। सैनिक अपने पीछे एक पुत्री, दो पुत्रों को छोड़ गया है। असम रायफल की टुकड़ी ने जवान को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। मंगलवार दोपहर रामगंगा घाट पर उसका अंतिम संस्कार किया गया।
सैनिक के भाई नरेश ने बताया कि उनका भाई महेश मणिपुर में असम रायफल की 33 रेजिमेंट में हवलदार के पद पर तैनात था। जिसकी बीमारी के चलते दोनों किडनी खराब हो गई थीं। लगभग छह वर्ष पहले उनकी माता लीला देवी ने अपनी एक किडनी महेश को दी थी। लेकिन एक वर्ष पहले महेश की फिर हालत खराब हो गई। बीते पांच वर्षों से महेश का आर्मी अस्पताल कोलकाता में उपचार चल रहा था। 20 अप्रैल की शाम उपचार के दौरान महेश की मौत हो गई। मंगलवार दोपहर जवान का शव उनके पैतृक गांव पहुंचा। जवान के घर अंतिम दर्शन करने वालों का तांता लग गया। जवान की शव यात्रा आर्मी बैंड के साथ रामगंगा घाट भूतपुरी पहुंची। जहां असम रायफल की एक टुकड़ी ने जवान को गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम सलामी दी। जवान के छोटे पुत्र विशाल ने मुखाग्नि दी। महेश के दो और भाई असम रायफल में जवान हैं। उनकी बड़ी पुत्री शिवानी भी दो वर्ष पहले असम रायफल में भर्ती हुई है। जो बिहार के सिकुबी में ट्रेनिंग पर है। गार्ड ऑफ ऑनर के समय 32 यूपी एनसीसी बटालियन के कर्नल अरिदमन शर्मा, सूबेदार मेजर भौर सिंह बिष्ट और 223 रेजिमेंट के फील्ड सूबेदार व पांच अन्य साथी जवान मौजूद रहे।
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