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पत्नी के रूखसत होने के बाद उसकी याद में लिखे नगमें
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पत्नी की याद में इजहार ने लिख दिए 1600 गाने
चांदपुर। शरीर खत्म होने के बाद भी दिलों से सच्ची मोहब्बत खत्म नहीं होती है। इजहार ठेकेदार इसकी मिसाल थे। इजहार ठेकेदार ने पत्नी नूरजहां के दुनिया से रुखसत होने के बाद उनकी यादों को नगमों में पिरो दिया। पत्नी से पहली मुुलाकात से आखिरी पल तक की दास्तान को नगमों का रूप देकर हमेशा के लिए अमर कर दिया। उन्होंने पत्नी की याद में करीब 1600 गाने लिखकर नगमों की किताब लिख दी। उनके इंतकाल के बाद परिजनों ने उनका दफीना पत्नी नूरजहां की कब्र केे पास ही किया।
चांदपुर के मोहल्ला काजीजादगान निवासी इजहार ठेकेदार का निकाह चांदपुर के मोहल्ला शाहचंदन निवासी नूरजहां से हुआ था। रिश्ता तय होने के बाद से ही इजहार नूरजहां से बेपनाह प्यार करने लगे थे। इस मोहब्बत को दोनों एक दूसरे को खत के जरिये साझा करते थे। 1962 में निकाह के बाद से दोनों का प्यार समंदर से भी गहरा हो गया था। पत्नी के इंतकाल के बाद इजहार बूरी तरह टूट गए थे। पत्नी नूरजहां की मोहब्बत के हर पल को सहेजकर इजहार ने नगमों में पिरो दिया। रात दिन देखे बिना ही पत्नी की याद में नगमे लिखने लगे। इजहार ने अपनी किताब में पत्नी नूरजहां की खूबसूरती का खूब जिक्र किया है। इजहार की इच्छा थी कि उनके इंतकाल के बाद उनका दफीना पत्नी नूरजहां की कब्र के पास ही किया जाए। इजहार के दामाद नफीस अहमद ने बताया कि 24 अप्रैल 2013 को इजहार ने पत्नी की याद में अंतिम सांस ली। उनका दफीना उनकी इच्छानुसार ही पत्नी की कब्र के पास ही किया गया था।
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चांदपुर। शरीर खत्म होने के बाद भी दिलों से सच्ची मोहब्बत खत्म नहीं होती है। इजहार ठेकेदार इसकी मिसाल थे। इजहार ठेकेदार ने पत्नी नूरजहां के दुनिया से रुखसत होने के बाद उनकी यादों को नगमों में पिरो दिया। पत्नी से पहली मुुलाकात से आखिरी पल तक की दास्तान को नगमों का रूप देकर हमेशा के लिए अमर कर दिया। उन्होंने पत्नी की याद में करीब 1600 गाने लिखकर नगमों की किताब लिख दी। उनके इंतकाल के बाद परिजनों ने उनका दफीना पत्नी नूरजहां की कब्र केे पास ही किया।
चांदपुर के मोहल्ला काजीजादगान निवासी इजहार ठेकेदार का निकाह चांदपुर के मोहल्ला शाहचंदन निवासी नूरजहां से हुआ था। रिश्ता तय होने के बाद से ही इजहार नूरजहां से बेपनाह प्यार करने लगे थे। इस मोहब्बत को दोनों एक दूसरे को खत के जरिये साझा करते थे। 1962 में निकाह के बाद से दोनों का प्यार समंदर से भी गहरा हो गया था। पत्नी के इंतकाल के बाद इजहार बूरी तरह टूट गए थे। पत्नी नूरजहां की मोहब्बत के हर पल को सहेजकर इजहार ने नगमों में पिरो दिया। रात दिन देखे बिना ही पत्नी की याद में नगमे लिखने लगे। इजहार ने अपनी किताब में पत्नी नूरजहां की खूबसूरती का खूब जिक्र किया है। इजहार की इच्छा थी कि उनके इंतकाल के बाद उनका दफीना पत्नी नूरजहां की कब्र के पास ही किया जाए। इजहार के दामाद नफीस अहमद ने बताया कि 24 अप्रैल 2013 को इजहार ने पत्नी की याद में अंतिम सांस ली। उनका दफीना उनकी इच्छानुसार ही पत्नी की कब्र के पास ही किया गया था।
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