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लोकसभा चुनाव में भाजपा को सबक सिखाएगी पिछड़ा वर्ग उत्थान समिति
Updated Sat, 29 Sep 2018 12:43 AM IST
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पिछड़ा वर्ग उत्थान समिति ने दी चेतावनी
बिजनौर। अति पिछड़ा वर्ग उत्थान समिति ने जाटों को आरक्षण सूची से बाहर नहीं करने पर 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को सबक सिखाने की चेतावनी दी है। इसे लेकर समिति कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा।
समिति पदाधिकारी और कार्यकर्ता प्रदेश अध्यक्ष तेजपाल सिंह सैनी के नेतृत्व में एकत्रित हुए और कलक्ट्रेट पहुुंचकर डीएम अटल कुमार राय को ज्ञापन सौंपा। इससे पूर्व हुई बैठक में प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि करीब 18 वर्ष पूर्व जाटों को पिछड़े वर्ग का आरक्षण का लाभ दिया गया था। आरोप है कि पिछड़े वर्ग में शामिल और जातियों सैनी, माली, गडरिया, कुम्हार, धींवर, नाई, बढ़ई, भुर्जी आदि करीब 78 जातियों को मिलने वाले 27 प्रतिशत आरक्षण में से अकेले 21 प्रतिशत आरक्षण का लाभ जाटों को दिया जा रहा है। वास्तविक पिछड़ी जातियों का वोट बैंक करीब 64 प्रतिशत है। बताया कि केंद्र में पिछड़े वर्ग की सूची में जाट जाति को आरक्षित श्रेणी से हटाया जा चुका है। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में अभी तक इन्हें सूची से अलग नहीं किया गया है। कहा कि वास्तविक पिछड़ी जातियों सैनी, माली, गडरिया, कुम्हार, नाई, धींवर, भुर्जी आदि को आरक्षण का लाभ न के बराबर मिल रहा है। ज्ञापन में जाट जाति को उत्तर प्रदेश की पिछड़ी जाति की सूची से बाहर करने, अनुसूचित जाति की तरह पिछड़ी जाति में क्रिमीलेयर की समाप्त करने, विधान सभा एवं लोकसभा में पिछड़ी जाति के आरक्षण का लाभ देने आदि की मांग की गई। ज्ञापन देने वालों में प्रदेश प्रवक्ता रमेश सिंह सैनी, प्रदेश महासचिव गजेंद्र पाल सिंह प्रजापति, राजपाल सिंह, रघुनाथ कश्यप, राजवीर प्रजापति, रजनीश विश्वकर्मा, डॉ. जाकिर हुसैन, बाबूराम आर्य, ओमप्रकाश कश्यप, राम सिंह, अतर सिंह आर्य, ऋषिपाल सिंह, दीपक कश्यप, आनंद सैनी आदि मौजूद रहे।
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बिजनौर। अति पिछड़ा वर्ग उत्थान समिति ने जाटों को आरक्षण सूची से बाहर नहीं करने पर 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को सबक सिखाने की चेतावनी दी है। इसे लेकर समिति कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा।
समिति पदाधिकारी और कार्यकर्ता प्रदेश अध्यक्ष तेजपाल सिंह सैनी के नेतृत्व में एकत्रित हुए और कलक्ट्रेट पहुुंचकर डीएम अटल कुमार राय को ज्ञापन सौंपा। इससे पूर्व हुई बैठक में प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि करीब 18 वर्ष पूर्व जाटों को पिछड़े वर्ग का आरक्षण का लाभ दिया गया था। आरोप है कि पिछड़े वर्ग में शामिल और जातियों सैनी, माली, गडरिया, कुम्हार, धींवर, नाई, बढ़ई, भुर्जी आदि करीब 78 जातियों को मिलने वाले 27 प्रतिशत आरक्षण में से अकेले 21 प्रतिशत आरक्षण का लाभ जाटों को दिया जा रहा है। वास्तविक पिछड़ी जातियों का वोट बैंक करीब 64 प्रतिशत है। बताया कि केंद्र में पिछड़े वर्ग की सूची में जाट जाति को आरक्षित श्रेणी से हटाया जा चुका है। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में अभी तक इन्हें सूची से अलग नहीं किया गया है। कहा कि वास्तविक पिछड़ी जातियों सैनी, माली, गडरिया, कुम्हार, नाई, धींवर, भुर्जी आदि को आरक्षण का लाभ न के बराबर मिल रहा है। ज्ञापन में जाट जाति को उत्तर प्रदेश की पिछड़ी जाति की सूची से बाहर करने, अनुसूचित जाति की तरह पिछड़ी जाति में क्रिमीलेयर की समाप्त करने, विधान सभा एवं लोकसभा में पिछड़ी जाति के आरक्षण का लाभ देने आदि की मांग की गई। ज्ञापन देने वालों में प्रदेश प्रवक्ता रमेश सिंह सैनी, प्रदेश महासचिव गजेंद्र पाल सिंह प्रजापति, राजपाल सिंह, रघुनाथ कश्यप, राजवीर प्रजापति, रजनीश विश्वकर्मा, डॉ. जाकिर हुसैन, बाबूराम आर्य, ओमप्रकाश कश्यप, राम सिंह, अतर सिंह आर्य, ऋषिपाल सिंह, दीपक कश्यप, आनंद सैनी आदि मौजूद रहे।
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