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सुहेल ने गाड़े सफलता के झंडे
Updated Thu, 12 Apr 2018 12:08 AM IST
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बिजनौर। प्रतिभा किसी संसाधन की मोहताज नहीं होती। इसी बात को सही साबित कर दिखाया है सुहेल ने। सुहेल ने सीनियर हॉकी नेशनल चैंपियनशिप में प्रतिभाग कर जिले का नाम देशभर में चमकाया है।
सुहेल जफर बिजनौर के मोहल्ला मिर्दगान निवासी मोहम्मद जफर खान का पुत्र है। भारत की हॉकी सबसे बड़ी प्रतियोगिता सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में अपने हुनर का प्रदर्शन कर अपने माता-पिता और जिले का नाम देशभर में चमकाया है।
सुहेल ने हॉकी की शुरुआत वर्ष 2008 में उनके संरक्षण में स्टेडियम से की थी। मेहनत और लगन से कार्य करने के बल पर सुहेल को स्कूल नेशनल खेलने का मौका मिला। साल 2011 में इसका चयन मध्य प्रदेश हॉकी एकेडमी भोपाल के लिए हुआ। वहां पर सुहेल ने हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक ध्यानचंद से भी हॉकी के गुर सीखे। वर्ष 2012 में पहला सब जूनियर रोहतक में खेला। इसमें सिल्वर मेडल प्राप्त किया। दूसरा सब जूनियर नेशनल 2013 में भोपाल में, तीसरा 2014 में रांची में खेला गया। इसी के साथ लगातार पांच जूनियर नेशनल 2013 से 2017 तक खेलकर हॉकी में नाम रोशन किया। सुहेल ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने गुरुजनों माता-पिता और कोच को दिया है।
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सुहेल जफर बिजनौर के मोहल्ला मिर्दगान निवासी मोहम्मद जफर खान का पुत्र है। भारत की हॉकी सबसे बड़ी प्रतियोगिता सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में अपने हुनर का प्रदर्शन कर अपने माता-पिता और जिले का नाम देशभर में चमकाया है।
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सुहेल ने हॉकी की शुरुआत वर्ष 2008 में उनके संरक्षण में स्टेडियम से की थी। मेहनत और लगन से कार्य करने के बल पर सुहेल को स्कूल नेशनल खेलने का मौका मिला। साल 2011 में इसका चयन मध्य प्रदेश हॉकी एकेडमी भोपाल के लिए हुआ। वहां पर सुहेल ने हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक ध्यानचंद से भी हॉकी के गुर सीखे। वर्ष 2012 में पहला सब जूनियर रोहतक में खेला। इसमें सिल्वर मेडल प्राप्त किया। दूसरा सब जूनियर नेशनल 2013 में भोपाल में, तीसरा 2014 में रांची में खेला गया। इसी के साथ लगातार पांच जूनियर नेशनल 2013 से 2017 तक खेलकर हॉकी में नाम रोशन किया। सुहेल ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने गुरुजनों माता-पिता और कोच को दिया है।
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