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टीबी मरीज
Updated Fri, 25 May 2018 12:36 AM IST
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बिजनौर। टीबी मरीजों को चिह्नित करने वाले निजी चिकित्सकों को प्रोत्साहन योजना के तहत एक हजार रुपये इनाम स्वरूप दिए जाएंगे। ऐसा करने से टीबी रोगियों को ढूंढने में और आसानी होगी। साथ ही मरीजों को समय पर उपचार भी मिल जाएगा। लखनऊ में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है। अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है।
देशभर में सबसे अधिक मौतें टीबी से होती हैं। एक अनुमान के अनुसार इस बीमारी से ग्रसित लोग सालभर में भारत में लाखों लोग काल के गाल में समा जाते हैं। देश से मौतों के आंकड़े को कम कर इस रोग का जड़ से नाश करने के लिए भारत सरकार बेहद गंभीर है। इसके लिए केंद्र सरकार ने 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। सरकार के निर्देशानुसार देशभर में टीबी रोगियों को चिह्नित करने के लिए अभियान चलाया गया था। इसमें लाखों की संख्या में टीबी पॉजिटिव मरीज मिले हैं। जिले में चले डोर-टू-डोर अभियान के माध्यम से 130 लोगों के टीबी होने की पुष्टि हुई थी। अफसरों के मुताबिक चिह्नित सभी मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया है। साथ ही उन्हें पोषण योजना के अंतर्गत रोगी के खाते में 500 रुपये प्रतिमाह भेजने शुरू कर दिए गए हैं। यह योजना एक अप्रैल 2018 से लागू कर दी गई है। जिला क्षय रोग अधिकारी बीएस रावत ने बताया कि जिले में कहीं भी टीबी रोगी का चयन कर उसे सरकारी अस्पताल पहुंचाने वाले निजी चिकित्सक को एक हजार रुपये प्रोत्साहित राशि के रूप में दिए जाएंगे। लखनऊ में हुई मीटिंग में यह निर्णय लिया गया है। साथ ही मेडिकल स्टोरों को भी ये निर्देश दिए गए हैं कि टीबी की दवा खरीदने वाले व्यक्ति का नाम, पता और मोबाइल नंबर नोट किया जाए, जिससे कि टीबी का प्राइवेट इलाज कराने वाले मरीजों का आसानी से पता लगाया जा सके।
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देशभर में सबसे अधिक मौतें टीबी से होती हैं। एक अनुमान के अनुसार इस बीमारी से ग्रसित लोग सालभर में भारत में लाखों लोग काल के गाल में समा जाते हैं। देश से मौतों के आंकड़े को कम कर इस रोग का जड़ से नाश करने के लिए भारत सरकार बेहद गंभीर है। इसके लिए केंद्र सरकार ने 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। सरकार के निर्देशानुसार देशभर में टीबी रोगियों को चिह्नित करने के लिए अभियान चलाया गया था। इसमें लाखों की संख्या में टीबी पॉजिटिव मरीज मिले हैं। जिले में चले डोर-टू-डोर अभियान के माध्यम से 130 लोगों के टीबी होने की पुष्टि हुई थी। अफसरों के मुताबिक चिह्नित सभी मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया है। साथ ही उन्हें पोषण योजना के अंतर्गत रोगी के खाते में 500 रुपये प्रतिमाह भेजने शुरू कर दिए गए हैं। यह योजना एक अप्रैल 2018 से लागू कर दी गई है। जिला क्षय रोग अधिकारी बीएस रावत ने बताया कि जिले में कहीं भी टीबी रोगी का चयन कर उसे सरकारी अस्पताल पहुंचाने वाले निजी चिकित्सक को एक हजार रुपये प्रोत्साहित राशि के रूप में दिए जाएंगे। लखनऊ में हुई मीटिंग में यह निर्णय लिया गया है। साथ ही मेडिकल स्टोरों को भी ये निर्देश दिए गए हैं कि टीबी की दवा खरीदने वाले व्यक्ति का नाम, पता और मोबाइल नंबर नोट किया जाए, जिससे कि टीबी का प्राइवेट इलाज कराने वाले मरीजों का आसानी से पता लगाया जा सके।
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