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हास्य व्यंग के इंटरनेशनल शायर हिलाल स्योहारवी
Updated Wed, 15 Nov 2017 12:30 AM IST
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गरीबों का लहू तो आपकी कारों का डीजल है...
स्योहारा(बिजनौर)। अपनी शायरी से व्यवस्था पर चोट करने वाले हिलाल स्योहारवी की आज पुण्यतिथि है। हिलाल स्योहारवी ने हिंदुस्तान ही नहीं पूरी दुनिया में अपनी शायरी की छाप छोड़ी। हिलाल स्योरहवी ने शायर ने अपनी व्यवस्था पर तंज कसते हुए सुनाया था कि न तुम संभले तो फिर नया तूफान आएगा। मदद को राम आएंगे न फिर रहमान आएगा। शेरों के माध्यम से समाज को आगाह करने वाले शायर हिलाल स्योहारवी का वास्तविक नाम हबीबुर्रहमान था। शायरी में आने के बाद उन्होंने अपना उपनाम हिलाल जिसका अर्थ होता है चांद रख लिया। 15 नवंबर 2012 को उनकी मृत्यु हुई थी। हिलाल की नज्मों के लोग उन्हें आज भी लोग याद करते हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मौत पर इनके इस कता ने बहुत ख्याति पाई। बजा कहा जो शहीदाने वतन कहा तुझको, ये हैसियत तुझे दुनिया में नाम करके मिली। अब इससे बढ़के तेरा एहतराम क्या होगा, मिली जो मौत भी तुझको सलाम करके मिली। हिलाल ने अपनी शायरी से जहां महफिलों में कहकहे लगवाए वहीं नेताओं, व्यवस्था, राजनीति, सांप्रदायिकता, पूंजीवाद पर चोट करने से कभी नहीं चूके। उनका कता यह कता ऐ बानगी है, गरीबी को मिटा देने की बातें सिर्फ बातें हैं, जो खुद दौलत के भूखे हो गरीबी क्या मिटाएंगे, गरीबों का लहू तो आपकी कारों का डीजल है, गरीबी मिट गई तो आप क्या रिक्शा चलाऐंगे।
एक श्रमिक के रूप में अपना जीवन शुरू करने वाले हिलाल स्योहरवी ने मजदूरों के दुख दर्द और तकलीफों को बड़े नजदीक से देखा। फिर उसे शायरी का रूप देकर तंजोमिजहा की चाशनी में डुबो कर दुनिया के सामने इस ढंग से प्रस्तुत किया कि कड़वी बातें भी मिठास के साथ दिल की गहराइयों में उतर जाएं। उन्होंने अपनी शायरी से सोई हुई व्यवस्था को झकझोरा, उसकी खामियों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि तुम अपनी गरीबी को मिटाते नहीं खुद ही, क्या -क्या न मिला तुम को सहारा नहीं समझे। हर शहर में मुद्दत से है रातों को अंधेरा, तुम लोग सियासत का इशारा नहीं समझे।
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हिलाल स्योहारवी की एक नज्म मेरा हिंदोस्तां यहां मौसम सलौने और सुहाने, हिमालय बर्फ की चादर है ताने,
नदी नाले सुनाते हैं तराने, जमां अपनी उगलती है खजाने, इसी धरती पे जन्नत का गुमां है। ये भारत है मेरा हिंदोस्तां है। पदक सोने का कोई मुल्क पाले, कोई फुटबॉल कितना ही उछाले, कोई तैराक सौ तमगे लगाले, यहां के खेल भी सबसे निराले, इलेक्शन में जो जीते पहलवां है। ये भारत है मेरा हिंदोस्तां है।।
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स्योहारा(बिजनौर)। अपनी शायरी से व्यवस्था पर चोट करने वाले हिलाल स्योहारवी की आज पुण्यतिथि है। हिलाल स्योहारवी ने हिंदुस्तान ही नहीं पूरी दुनिया में अपनी शायरी की छाप छोड़ी। हिलाल स्योरहवी ने शायर ने अपनी व्यवस्था पर तंज कसते हुए सुनाया था कि न तुम संभले तो फिर नया तूफान आएगा। मदद को राम आएंगे न फिर रहमान आएगा। शेरों के माध्यम से समाज को आगाह करने वाले शायर हिलाल स्योहारवी का वास्तविक नाम हबीबुर्रहमान था। शायरी में आने के बाद उन्होंने अपना उपनाम हिलाल जिसका अर्थ होता है चांद रख लिया। 15 नवंबर 2012 को उनकी मृत्यु हुई थी। हिलाल की नज्मों के लोग उन्हें आज भी लोग याद करते हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मौत पर इनके इस कता ने बहुत ख्याति पाई। बजा कहा जो शहीदाने वतन कहा तुझको, ये हैसियत तुझे दुनिया में नाम करके मिली। अब इससे बढ़के तेरा एहतराम क्या होगा, मिली जो मौत भी तुझको सलाम करके मिली। हिलाल ने अपनी शायरी से जहां महफिलों में कहकहे लगवाए वहीं नेताओं, व्यवस्था, राजनीति, सांप्रदायिकता, पूंजीवाद पर चोट करने से कभी नहीं चूके। उनका कता यह कता ऐ बानगी है, गरीबी को मिटा देने की बातें सिर्फ बातें हैं, जो खुद दौलत के भूखे हो गरीबी क्या मिटाएंगे, गरीबों का लहू तो आपकी कारों का डीजल है, गरीबी मिट गई तो आप क्या रिक्शा चलाऐंगे।
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एक श्रमिक के रूप में अपना जीवन शुरू करने वाले हिलाल स्योहरवी ने मजदूरों के दुख दर्द और तकलीफों को बड़े नजदीक से देखा। फिर उसे शायरी का रूप देकर तंजोमिजहा की चाशनी में डुबो कर दुनिया के सामने इस ढंग से प्रस्तुत किया कि कड़वी बातें भी मिठास के साथ दिल की गहराइयों में उतर जाएं। उन्होंने अपनी शायरी से सोई हुई व्यवस्था को झकझोरा, उसकी खामियों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि तुम अपनी गरीबी को मिटाते नहीं खुद ही, क्या -क्या न मिला तुम को सहारा नहीं समझे। हर शहर में मुद्दत से है रातों को अंधेरा, तुम लोग सियासत का इशारा नहीं समझे।
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हिलाल स्योहारवी की एक नज्म मेरा हिंदोस्तां यहां मौसम सलौने और सुहाने, हिमालय बर्फ की चादर है ताने,
नदी नाले सुनाते हैं तराने, जमां अपनी उगलती है खजाने, इसी धरती पे जन्नत का गुमां है। ये भारत है मेरा हिंदोस्तां है। पदक सोने का कोई मुल्क पाले, कोई फुटबॉल कितना ही उछाले, कोई तैराक सौ तमगे लगाले, यहां के खेल भी सबसे निराले, इलेक्शन में जो जीते पहलवां है। ये भारत है मेरा हिंदोस्तां है।।