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प्रदूषण से घुटा शहर का दम, जिले में मानीटरिंग का इंतजाम नहीं
Updated Sat, 21 Oct 2017 01:19 AM IST
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प्रदूषण से घुटा शहर का दम, जिले में मानीटरिंग का इंतजाम नहीं
अमरोहा। दिवाली पर लोगों द्वारा छोड़ी गई जमकर आतिशबाजी से शहर का दम घुटा रहा। पूरी रात तमाम लोगों की सांसें फूलती रहीं। कितना प्रदूषण हुआ इसका हिसाब किताब रखने वाला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पूरी तरह खामोश रहा। जनपद में उसकी कोई मानीटरिंग नहीं की गई। अफसोस जनक बात ये है कि दूसरे जिले के रहमोकरम पर अमरोहा है।
आतिशबाजी की थोक दुकानदारों से प्राप्त एक अनुमान के मुताबिक जिले भर में दीपावली के त्योहार पर तकरीबन चार करोड़ रुपये की आतिशबाजी की बिकी है। इसमें अकेले शहर में एक करोड़ से अधिक के पटाखे बिके हैं। जिनको छोड़े जाने से उठने वाले धुएं से वातावरण प्रदूषित हो गया है। जहरीली गंध और धुएं ने शहर का दम घोंटने का काम किया है। तमाम नागरिक पटाखों की तेज आवास व धुएं से पूरी रात परेशान रहे। इसको नियंत्रित करने वाले अफसरों ने कोई ध्यान नहीं दिया। अधिकारियों की बात पर यकीन करें तो जिले में प्रदूषण की मानीटरिंग नहीं होती है। गजरौला की औद्योगिक नगरियों के प्रदूषण की जांच भी दूसरे जिले के अफसर आकर करते हैं। बिजनौर जनपद के अधिकारियों के हवाले ही प्रदूषण की रोकथाम का जिम्मा है। उनके द्वारा ही कार्रवाई की जाती है। जिले में प्रदूषण का पैमाना मापने का कोई भी बंदोबस्त नहीं है। इससे जिलेवासियों को यह पता ही नहीं चलता कि उन्होंने त्योहार पर कितना वातावरण दूषित किया है।
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प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय बिजनौर जिले में है। वहां के अधिकारियों को ही अमरोहा की जिम्मेदारी मिली हुई है। उनके द्वारा ही प्रदूषण की जांच होगी।
एनएस चहल, डीएम
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अमरोहा। दिवाली पर लोगों द्वारा छोड़ी गई जमकर आतिशबाजी से शहर का दम घुटा रहा। पूरी रात तमाम लोगों की सांसें फूलती रहीं। कितना प्रदूषण हुआ इसका हिसाब किताब रखने वाला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पूरी तरह खामोश रहा। जनपद में उसकी कोई मानीटरिंग नहीं की गई। अफसोस जनक बात ये है कि दूसरे जिले के रहमोकरम पर अमरोहा है।
आतिशबाजी की थोक दुकानदारों से प्राप्त एक अनुमान के मुताबिक जिले भर में दीपावली के त्योहार पर तकरीबन चार करोड़ रुपये की आतिशबाजी की बिकी है। इसमें अकेले शहर में एक करोड़ से अधिक के पटाखे बिके हैं। जिनको छोड़े जाने से उठने वाले धुएं से वातावरण प्रदूषित हो गया है। जहरीली गंध और धुएं ने शहर का दम घोंटने का काम किया है। तमाम नागरिक पटाखों की तेज आवास व धुएं से पूरी रात परेशान रहे। इसको नियंत्रित करने वाले अफसरों ने कोई ध्यान नहीं दिया। अधिकारियों की बात पर यकीन करें तो जिले में प्रदूषण की मानीटरिंग नहीं होती है। गजरौला की औद्योगिक नगरियों के प्रदूषण की जांच भी दूसरे जिले के अफसर आकर करते हैं। बिजनौर जनपद के अधिकारियों के हवाले ही प्रदूषण की रोकथाम का जिम्मा है। उनके द्वारा ही कार्रवाई की जाती है। जिले में प्रदूषण का पैमाना मापने का कोई भी बंदोबस्त नहीं है। इससे जिलेवासियों को यह पता ही नहीं चलता कि उन्होंने त्योहार पर कितना वातावरण दूषित किया है।
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प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय बिजनौर जिले में है। वहां के अधिकारियों को ही अमरोहा की जिम्मेदारी मिली हुई है। उनके द्वारा ही प्रदूषण की जांच होगी।
एनएस चहल, डीएम