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जिले में आठ साल बाद फिर मिले ग्लैंडर्स/फार्सी के लक्षण

Fri, 14 Jul 2017 12:27 AM IST
Updated Fri, 14 Jul 2017 12:27 AM IST
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जिले में आठ साल बाद फिर मिले ग्लैंडर्स/फार्सी के लक्षण
आठ साल बाद फिर मिले ग्लैंडर्स फार्सी के लक्षण
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बिजनौर।
जिले में आठ साल बाद फिर ग्लैंडर्स फार्सी बीमारी मिली है। अश्व प्रजाति में पाई जाने वाली इस संक्रामक बीमारी से इंसान भी ग्रसित हो जाते हैं। नजीबाबाद में दो खच्चरों में इस बीमारी के लक्षण मिलने से पशुपालन विभाग में खलबली है। विभाग इन खच्चरों को दर्दरहित मौत देने की तैयारी में जुट गया है।
साल 2009-2010 में जिले में ग्लैंडर्स फार्सी के तीन केस मिले थे। इसके चलते तीन घोड़ों को मारना पड़ा था। ग्लैंडर्स फार्सी का इलाज बहुत महंगा और बहुत लंबा होता है। पशुओं से इस बीमारी का संक्रमण इंसान में होने की आशंका रहती है। जिले में इस बीमारी के मिलने के बाद यहां घोड़ों, गधों आदि के मेले लगाने पर रोक लग चुकी है। पशुपालन विभाग इस बीमारी का पता लगाने के लिए हर महीने 20 पशुओं के ब्लड आदि सैंपल लेकर जांच के लिए हिसार स्थित प्रयोगशाला में भेजता है। पिछले महीने भेजे गए सैंपल में नजीबाबाद के गांव राहतपुर निवासी नाजिम के दो खच्चरों में ग्लैंडर्स फार्सी होने की पुष्टि हुई है।
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यह हैं लक्षण
ग्लैंडर्स फार्सी से पीड़ित घोड़े, गधे, खच्चर, टट्टू को तेज बुखार आता है। नाक से स्राव होता है। खांसी होती है और सांस लेने में परेशानी होती है। पूरे शरीर पर छाले पड़ जाते हैं। कुछ केस में पशुओं को बुखार नहीं होता। कभी-कभी यह बीमारी बकरियों में भी देखने को मिलती है। इसके शिकार पशुओं के संपर्क में आने से इंसानों में भी इस बीमारी के फैलने की आशंका होती है। वायरस जनित यह बीमारी बहुत तेजी से फैलती है।
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दी जाती है दर्दरहित मौत
ग्लैंडर्स फार्सी से पीड़ित पशु को दर्दरहित मौत देने की प्रक्रिया को यूथेनेसिया कहा जाता है। इसमें पहले पीड़ित पशु को इंजेक्शन देकर बेहोश किया जाता है। पशु के बेहोश होने के बाद उसे जहर का इंजेक्शन दिया जाता है। बेहोशी में ही बिना दर्द पशु की मौत हो जाती है। इससे पहले पशुओं को गोली मारकर मारा जाता था।
सरकार ने बढ़ाया मुआवजा
पहले ग्लैंडर्स फार्सी पीड़ित पशु को मारने पर पशु मालिक को केवल 50 रुपये मुआवजा मिलता था। साल 2015 में शासन ने इस मुआवजे को बढ़ा दिया है। अब घोड़े को मारने पर 25 हजार तथा बाकी अश्ववंश को मारने पर मालिक को 16-16 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाता है।
पशुओं के सैंपल लेंगे : डॉ. भूपेंद्र सिंह
जिला पशुधन चिकित्साधिकारी डॉ. भूपेंद्र सिंह के अनुसार, गांव राहतपुर के पास पांच किलोमीटर के दायरे में शत-प्रतिशत और दस किलोमीटर के दायरे में 50 प्रतिशत अश्ववंशों के सैंपल लेकर जांच कराई जाएगी। पीड़ित खच्चर अभी पहाड़ों पर गए हैं। उनके मालिक से संपर्क कर जल्दी उनको दर्दरहित मौत दी जाएगी।


डीएम ने घोषित किया कंट्रोल एरिया
डीएम जगतराज ने ग्लैंडर्स फार्सी बीमारी को रोकने के लिए बिजनौर में तत्काल प्रभाव से कंट्रोल एरिया घोषित कर दिया है। अश्व प्रजाति को जिले से बाहर ले जाने व लाने, अश्व प्रजाति को एक स्थान पर एकत्र करने पर रोक लगा दी गई है। उन्होंने पशु के रक्त के नमूने लेने आए पशु चिकित्साधिकारियों के कार्य में बाधा न उत्पन्न करने की अपील की है।
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