{"_id":"5995e4614f1c1bf8168b4687","slug":"131502995553-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कहीं बंजर न हो जाए बिजनौर की धरती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कहीं बंजर न हो जाए बिजनौर की धरती
Updated Fri, 18 Aug 2017 01:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जमीन से पोषक तत्वों की लगातार हो रही कमी
बिजनौर। जिले की धरती की कोख से पोषक तत्वों से खाली होती जा रही है। जिंक, एनपीकेे, आयरन, बोगन, ऑर्गेनिक कार्बन, जीवांश पदार्थों व नाइट्रोजन आदि पोषक तत्व जिले की मिट्टी से कम होते जा रहे हैं। किसान भी पोषक तत्वों के बारे में जागरूक नहीं हो रहे हैं। अगर यही हाल रहा तो एक दिन बिजनौर की धरती बंजर भी हो सकती है।
मिट्टी की सेहत यानि उसमें मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा को जानने के लिए कृषि विभाग द्वारा मृदा स्वास्थ्य कार्ड अभियान चलाया गया है। इस अभियान के अंतर्गत जिले में एक लाख पांच हजार ग्रिड के सैंपल लिए गए थे। 2.5 हेक्टेअर एरिया को एक ग्रिड मानकर सैंपल लिए गए थे। मिट्टी के इन सैंपलों की जांच की गई तो 70 प्रतिशत नमूनों में नाइट्रोजन और फास्फोरस की मात्रा बहुत कम पाई गई। इनके अलावा जिंक, एनपीकेे, आयरन, बोगन, ऑर्गेनिक कार्बन, जीवांश पदार्थों की मात्रा भी बहुत कम पाई गई। पोषक तत्व ही फसलों के विकास में मुख्य भूमिका निभाते हैं। अगर किसान इस पर ध्यान नहीं देंगे तो जमीन से ये पोषक तत्व बिल्कुल खत्म हो जाएंगे और फसलों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होगा।
ऐसे करें पोषक तत्वों की पूर्ति
पोषक तत्वों की कमी को हरी खाद, कंपोस्ट खाद, गोबर वाले खाद, मिल की खली की खाद, हड्डी के चूरे व जैविक खाद से पूरा किया जा सकता है। इसके अलावा अलग-अलग पोषक तत्वों के अलग-अलग खाद भी बाजार में उपलब्ध हैं।
विज्ञापन
उपकृषि निदेशक जेपी चौधरी के अनुसार मिट्टी के सैंपलों की जांच में पोषक तत्वों की कमी मिली है। इस संबंध में रिपोर्ट कार्ड किसानों को उपलब्ध करा दिए गए हैं। किसानों को अपनी जमीन के पोषक तत्वों के बारे में पता कर उनकी उपलब्धता पूरी करनी चाहिए।
विज्ञापन
बिजनौर। जिले की धरती की कोख से पोषक तत्वों से खाली होती जा रही है। जिंक, एनपीकेे, आयरन, बोगन, ऑर्गेनिक कार्बन, जीवांश पदार्थों व नाइट्रोजन आदि पोषक तत्व जिले की मिट्टी से कम होते जा रहे हैं। किसान भी पोषक तत्वों के बारे में जागरूक नहीं हो रहे हैं। अगर यही हाल रहा तो एक दिन बिजनौर की धरती बंजर भी हो सकती है।
मिट्टी की सेहत यानि उसमें मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा को जानने के लिए कृषि विभाग द्वारा मृदा स्वास्थ्य कार्ड अभियान चलाया गया है। इस अभियान के अंतर्गत जिले में एक लाख पांच हजार ग्रिड के सैंपल लिए गए थे। 2.5 हेक्टेअर एरिया को एक ग्रिड मानकर सैंपल लिए गए थे। मिट्टी के इन सैंपलों की जांच की गई तो 70 प्रतिशत नमूनों में नाइट्रोजन और फास्फोरस की मात्रा बहुत कम पाई गई। इनके अलावा जिंक, एनपीकेे, आयरन, बोगन, ऑर्गेनिक कार्बन, जीवांश पदार्थों की मात्रा भी बहुत कम पाई गई। पोषक तत्व ही फसलों के विकास में मुख्य भूमिका निभाते हैं। अगर किसान इस पर ध्यान नहीं देंगे तो जमीन से ये पोषक तत्व बिल्कुल खत्म हो जाएंगे और फसलों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होगा।
विज्ञापन
ऐसे करें पोषक तत्वों की पूर्ति
पोषक तत्वों की कमी को हरी खाद, कंपोस्ट खाद, गोबर वाले खाद, मिल की खली की खाद, हड्डी के चूरे व जैविक खाद से पूरा किया जा सकता है। इसके अलावा अलग-अलग पोषक तत्वों के अलग-अलग खाद भी बाजार में उपलब्ध हैं।
विज्ञापन
उपकृषि निदेशक जेपी चौधरी के अनुसार मिट्टी के सैंपलों की जांच में पोषक तत्वों की कमी मिली है। इस संबंध में रिपोर्ट कार्ड किसानों को उपलब्ध करा दिए गए हैं। किसानों को अपनी जमीन के पोषक तत्वों के बारे में पता कर उनकी उपलब्धता पूरी करनी चाहिए।