{"_id":"594d80b74f1c1bb6438b46cd","slug":"131498251447-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"डीएफओ ने नियम कानून ताक पर रख दिया प्रमोशन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डीएफओ ने नियम कानून ताक पर रख दिया प्रमोशन
Updated Sat, 24 Jun 2017 02:27 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डीएफओ नजीबाबाद एवं मुरादाबाद की जांच में हुआ खुलासा
विनियमित किए गए कर्मचारी के लगाए गए थे फर्जी कागजात
अमर उजाला ब्यूरो
अमरोहा।
डीएफओ ने नियम कानून ताक पर रख विनियमित किए गए कर्मचारी का प्रमोशन दे दिया। प्रमोशन के लिए कर्मचारी ने फर्जी कागजातों का इस्तेमाल किया। डीएफओ ने उसके कागजात भी चेक नहीं किए। शुक्रवार को डीएफओे नजीबाबाद और मुरादाबाद व वन सुरक्षा प्रभारी ने मामले की जांच की।
वन विभाग की तरफ से आदेश जारी किया गया था कि वर्ष-1996 से पहले से 2001 तक विभाग में दैनिक मजदूर के रूप में काम करने वाले कर्मचारियों को विनियमित कर दिया जाए। उनको न्यूनतम वेतनमान देेने के आदेश थे। यह आदेश 2015 में आया था। विभाग में दैनिक श्रमिक के रूप में काम कर रहे मनवीर सिंह को तत्कालीन प्रभागीय वन अधिकारी जीएस खुशारिया ने विनियमित कर दिया। इसके बावजूद उसे न्यूनतम वेतन नहीं दिया गया तो वह कोर्ट चला गया। कोर्ट ने विनियमित कर न्यूनतम वेतनमान देने के आदेश जारी किए। इसके बाद मौजूदा प्रभागीय वन अधिकारी ने उसे प्रमोशन देकर वन रक्षक बना दिया। आरोप है कि इसके लिए मनवीर के फर्जी कागजात लगाए गए थे, जो मौजूदा डीएफओ ने चेक भी नहीं किए। यह मामला वन संरक्षक/ क्षेत्रीय निदेशक मुरादाबाद आरपी वर्मा तक पहुंचा। उन्होंने आपत्ति लगाते हुए प्रमोशन को निरस्त कर दिया। वन संरक्षक के निरस्त किए गए आदेश को प्रभागीय वन अधिकारी मोहम्मद उमर खान दबाए रहे।
उधर इसकी शिकायत लगातार वन संरक्षक तक पहुंच रही थीं। शिकायकर्ता डीएफओ पर नियम कानूनों को ताक पर रख मनवीर को प्रमोशन देने का आरोप लगा रहे थे। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए वन संरक्षक ने प्रभागीय वन अधिकारी नजीबाबाद प्रवीण राघव, डीएफओ मुरादाबाद बीसी ब्रह्मा, वन सुरक्षा प्रभारी (रुहेलखंड जोन) एके सिंह को मामले की जांच सौंपी। तीनों अफसर शुक्रवार की दोपहर बाद डीएफओ कार्यालय जटीवन पहुंचे। विनियमित किए गए कर्मचारी के कागजात चेक किए। उसे प्रमोशन देने के बारे में डीएफओ से जानकारी की। इस दौरान पाया गया कि स्थाई किए जाने और इसके बाद प्रमोशन पाने के दौरान ही उसने पढ़ाई की। जो नियम विरुद्घ है। शिकायत सही पाई जाने पर अफसरों ने डीएफओ को कर्मचारी के कागजों समेत मुरादाबाद बुलाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विनियमित किए गए कर्मचारी के लगाए गए थे फर्जी कागजात
अमर उजाला ब्यूरो
अमरोहा।
डीएफओ ने नियम कानून ताक पर रख विनियमित किए गए कर्मचारी का प्रमोशन दे दिया। प्रमोशन के लिए कर्मचारी ने फर्जी कागजातों का इस्तेमाल किया। डीएफओ ने उसके कागजात भी चेक नहीं किए। शुक्रवार को डीएफओे नजीबाबाद और मुरादाबाद व वन सुरक्षा प्रभारी ने मामले की जांच की।
वन विभाग की तरफ से आदेश जारी किया गया था कि वर्ष-1996 से पहले से 2001 तक विभाग में दैनिक मजदूर के रूप में काम करने वाले कर्मचारियों को विनियमित कर दिया जाए। उनको न्यूनतम वेतनमान देेने के आदेश थे। यह आदेश 2015 में आया था। विभाग में दैनिक श्रमिक के रूप में काम कर रहे मनवीर सिंह को तत्कालीन प्रभागीय वन अधिकारी जीएस खुशारिया ने विनियमित कर दिया। इसके बावजूद उसे न्यूनतम वेतन नहीं दिया गया तो वह कोर्ट चला गया। कोर्ट ने विनियमित कर न्यूनतम वेतनमान देने के आदेश जारी किए। इसके बाद मौजूदा प्रभागीय वन अधिकारी ने उसे प्रमोशन देकर वन रक्षक बना दिया। आरोप है कि इसके लिए मनवीर के फर्जी कागजात लगाए गए थे, जो मौजूदा डीएफओ ने चेक भी नहीं किए। यह मामला वन संरक्षक/ क्षेत्रीय निदेशक मुरादाबाद आरपी वर्मा तक पहुंचा। उन्होंने आपत्ति लगाते हुए प्रमोशन को निरस्त कर दिया। वन संरक्षक के निरस्त किए गए आदेश को प्रभागीय वन अधिकारी मोहम्मद उमर खान दबाए रहे।
विज्ञापन
उधर इसकी शिकायत लगातार वन संरक्षक तक पहुंच रही थीं। शिकायकर्ता डीएफओ पर नियम कानूनों को ताक पर रख मनवीर को प्रमोशन देने का आरोप लगा रहे थे। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए वन संरक्षक ने प्रभागीय वन अधिकारी नजीबाबाद प्रवीण राघव, डीएफओ मुरादाबाद बीसी ब्रह्मा, वन सुरक्षा प्रभारी (रुहेलखंड जोन) एके सिंह को मामले की जांच सौंपी। तीनों अफसर शुक्रवार की दोपहर बाद डीएफओ कार्यालय जटीवन पहुंचे। विनियमित किए गए कर्मचारी के कागजात चेक किए। उसे प्रमोशन देने के बारे में डीएफओ से जानकारी की। इस दौरान पाया गया कि स्थाई किए जाने और इसके बाद प्रमोशन पाने के दौरान ही उसने पढ़ाई की। जो नियम विरुद्घ है। शिकायत सही पाई जाने पर अफसरों ने डीएफओ को कर्मचारी के कागजों समेत मुरादाबाद बुलाया है।
विज्ञापन