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बिजनौर डिपो में बसों के संकट से परेशान होंगे यात्री
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बिजनौर। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के बिजनौर डिपो से 13 बसें कम हो गई हैं। अफसरों की मानें तो इन बसों की निर्धारित आयु दस वर्ष और 11 लाख किमी पूरी होने पर ये बसें निगम मुख्यालय को वापस चली गई हैं। वहां से इन बसों की नीलामी की जा चुकी है। इससे एक ओर जहां संचालन पर फर्क पड़ने से प्रतिदिन की आय में घाटा होगा, तो वहीं दूसरी ओर यात्रियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। बिजनौर डिपो की रोजाना करीब तीन लाख रुपये की आमदनी होती है।
उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की ओर से रोडवेज बसों का जीवनकाल दस वर्ष और लगभग 11 लाख किलोमीटर निर्धारित होता है। इसके बाद से नियमानुसार रोडवेज बसों का संचालन नहीं किया जा सकता। अब तक बिजनौर डिपो में कुल 118 बसें शामिल थीं। इनमें 87 उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की और 31 अनुबंधित बसें थीं। एआरएम वी.के. मौर्य के अनुसार वर्तमान में डिपो के पास कुल 105 बसें बची हैं। निगम की 13 बसें ऑक्शन में जाने से अब निगम के पास केवल 74 बसें ही बची हैं, जबकि अनुबंधित सभी 118 बसों का संचालन बदस्तूर जारी है। ऐसे में सवाल ये है कि परिवहन मंत्री अशोक कटारिया के गृह जनपद में बसों को वापस ले लिया गया है और उनके स्थान पर नई बसें नहीं दी गई हैं। होली का त्योहार नजदीक है ऐसे में बसों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए थी, लेकिन बिजनौर इसके एकदम उलट हुआ। वैसे भी होली के त्यौहार पर यात्रियों की आवाजाही दोगुनी हो जाती है। ऐसे में सवाल ये है कि होली जैसे प्रमुख त्यौहार से पूर्व ही बसें बढ़ाने के बजाए बिजनौर डिपो के बेड़े से बसें कम कर ली गईं। इससे अफसरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। जिले के लोगों का सवाल ये है कि जब परिवहन मंत्री के गृह जनपद में ये हाल है तो फिर अन्य जनकपदों की स्थिति क्या होगी अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है।
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उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की ओर से रोडवेज बसों का जीवनकाल दस वर्ष और लगभग 11 लाख किलोमीटर निर्धारित होता है। इसके बाद से नियमानुसार रोडवेज बसों का संचालन नहीं किया जा सकता। अब तक बिजनौर डिपो में कुल 118 बसें शामिल थीं। इनमें 87 उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की और 31 अनुबंधित बसें थीं। एआरएम वी.के. मौर्य के अनुसार वर्तमान में डिपो के पास कुल 105 बसें बची हैं। निगम की 13 बसें ऑक्शन में जाने से अब निगम के पास केवल 74 बसें ही बची हैं, जबकि अनुबंधित सभी 118 बसों का संचालन बदस्तूर जारी है। ऐसे में सवाल ये है कि परिवहन मंत्री अशोक कटारिया के गृह जनपद में बसों को वापस ले लिया गया है और उनके स्थान पर नई बसें नहीं दी गई हैं। होली का त्योहार नजदीक है ऐसे में बसों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए थी, लेकिन बिजनौर इसके एकदम उलट हुआ। वैसे भी होली के त्यौहार पर यात्रियों की आवाजाही दोगुनी हो जाती है। ऐसे में सवाल ये है कि होली जैसे प्रमुख त्यौहार से पूर्व ही बसें बढ़ाने के बजाए बिजनौर डिपो के बेड़े से बसें कम कर ली गईं। इससे अफसरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। जिले के लोगों का सवाल ये है कि जब परिवहन मंत्री के गृह जनपद में ये हाल है तो फिर अन्य जनकपदों की स्थिति क्या होगी अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है।
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