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रेहड़ में दस दिन में 12 की मौत
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रेहड़ में दस दिन में 12 की मौत
रेहड़। एक ओर कोरोना का कहर कुछ कम होता नजर आ रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में हुई मौत का आंकड़ा डरा रहा है। भले ही इन मौत का कारण कोराना न रहा हो, लेकिन बुखार, सांस लेने में परेशानी आदि लक्षण लोगों की जान पर भारी पड़ रहे हैं। रेहड़ की बात करें तो दस दिनों में 12 से अधिक मौत होने से लोग सहमे हुए हैं। इनमें कुछ तो एक ही मोहल्ले में मात्र तीस मीटर के दायरे के हैं।
मौत का सिलसिला गांव निवासी रसूला बेगम 90 वर्ष से शुरू हुआ। इसके बाद इनके आसपास रहने वाली नीना 40 वर्ष पत्नी कारी खलील, मुन्नी 70 वर्ष गुल्लू, फरीदा, मकसूद के बाद मजहर 58 वर्ष मजहर के परिवार की ही भूरे 42 वर्ष, गफ्फार, रहमतुल्लाह, बीना 42 वर्ष पत्नी नन्हे, महमूदा पत्नी अय्यूब, रामकली पत्नी राम सिंह, उर्मिला देवी पत्नी लालता प्रसाद व पोखर सिंह तथा नवील अहमद शामिल हैं। चूंकि इनमें किसी का भी स्वास्थ्य परीक्षण नहीं कराया था। अत: ग्रामीण इसे बीमारी से मौत होना बता रहे हैं। गांव में वर्तमान में आधी आबादी बुखार से पीड़ित है। लक्ष्मी पत्नी दीपक, पूर्व प्रधान अजीजुल इस्लाम, रीतू पत्नी मनोज का आइसोलेशन में उपचार चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें रोगियों की पहचान में जुटी हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कासमपुरगढ़ी की टीम ने प्राथमिक विद्यालय में परीक्षण कैंप लगाया, लेकिन मात्र 12 लोगों ने ही कोरोना टेस्ट कराया।
सैनिटाइजर का छिड़काव कराया : ग्राम प्रधान
ग्राम प्रधान फूलजहां की ओर से गांव में नाली, सड़कों की सफाई तथा सैनिटाइजेशन कराया जा रहा है। लोगों से अपील की जा रही है कि बीमार होने पर वह जांच कराएं, ताकि बीमारी पर समय को नियंत्रण में किया जा सके।
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गांव में भेजी जा रही टीम : चिकित्सा अधीक्षक
चिकित्सा अधीक्षक सीएचसी अफजलगढ़ डॉ. रजनीश कुमार सिंह का कहना है कि कोविड की जांच के लिए गांव-गांव टीमें भेजी जा रही हैं। एक दिन पूर्व ही रेहड़ में टीम भेजी गई थी, जिसमें मात्र 12 लोगों ने ही अपनी जांच कराई।
गांव में मौत का पता कराया जाएगा। वहां के एमओआईसी से गांव में जांच कराई जाएगी और सर्वे भी कराया जाएगा। जो बीमार मिलेंगे, उन्हें बेहतर उपचार दिलाया जाएगा - धीरेंद्र कुमार सिंह, एसडीएम धामपुर।
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रेहड़। एक ओर कोरोना का कहर कुछ कम होता नजर आ रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में हुई मौत का आंकड़ा डरा रहा है। भले ही इन मौत का कारण कोराना न रहा हो, लेकिन बुखार, सांस लेने में परेशानी आदि लक्षण लोगों की जान पर भारी पड़ रहे हैं। रेहड़ की बात करें तो दस दिनों में 12 से अधिक मौत होने से लोग सहमे हुए हैं। इनमें कुछ तो एक ही मोहल्ले में मात्र तीस मीटर के दायरे के हैं।
मौत का सिलसिला गांव निवासी रसूला बेगम 90 वर्ष से शुरू हुआ। इसके बाद इनके आसपास रहने वाली नीना 40 वर्ष पत्नी कारी खलील, मुन्नी 70 वर्ष गुल्लू, फरीदा, मकसूद के बाद मजहर 58 वर्ष मजहर के परिवार की ही भूरे 42 वर्ष, गफ्फार, रहमतुल्लाह, बीना 42 वर्ष पत्नी नन्हे, महमूदा पत्नी अय्यूब, रामकली पत्नी राम सिंह, उर्मिला देवी पत्नी लालता प्रसाद व पोखर सिंह तथा नवील अहमद शामिल हैं। चूंकि इनमें किसी का भी स्वास्थ्य परीक्षण नहीं कराया था। अत: ग्रामीण इसे बीमारी से मौत होना बता रहे हैं। गांव में वर्तमान में आधी आबादी बुखार से पीड़ित है। लक्ष्मी पत्नी दीपक, पूर्व प्रधान अजीजुल इस्लाम, रीतू पत्नी मनोज का आइसोलेशन में उपचार चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें रोगियों की पहचान में जुटी हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कासमपुरगढ़ी की टीम ने प्राथमिक विद्यालय में परीक्षण कैंप लगाया, लेकिन मात्र 12 लोगों ने ही कोरोना टेस्ट कराया।
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सैनिटाइजर का छिड़काव कराया : ग्राम प्रधान
ग्राम प्रधान फूलजहां की ओर से गांव में नाली, सड़कों की सफाई तथा सैनिटाइजेशन कराया जा रहा है। लोगों से अपील की जा रही है कि बीमार होने पर वह जांच कराएं, ताकि बीमारी पर समय को नियंत्रण में किया जा सके।
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गांव में भेजी जा रही टीम : चिकित्सा अधीक्षक
चिकित्सा अधीक्षक सीएचसी अफजलगढ़ डॉ. रजनीश कुमार सिंह का कहना है कि कोविड की जांच के लिए गांव-गांव टीमें भेजी जा रही हैं। एक दिन पूर्व ही रेहड़ में टीम भेजी गई थी, जिसमें मात्र 12 लोगों ने ही अपनी जांच कराई।
गांव में मौत का पता कराया जाएगा। वहां के एमओआईसी से गांव में जांच कराई जाएगी और सर्वे भी कराया जाएगा। जो बीमार मिलेंगे, उन्हें बेहतर उपचार दिलाया जाएगा - धीरेंद्र कुमार सिंह, एसडीएम धामपुर।