{"_id":"5c3e2847bdec22732f092fa6","slug":"11547577415-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तकनीक और उन्नत बीजों से किसान चमका रहे अपनी तकदीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तकनीक और उन्नत बीजों से किसान चमका रहे अपनी तकदीर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तकनीक और उन्नत बीजों से किसान चमका रहे अपनी तकदीर
बिजनौर। जीतोड़ मेहनत के साथ तकनीक और उन्नत बीजों को अपनाकर किसानों की आमदनी बढ़ाने की कोशिशों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। किसानों की आमदनी पिछले कुछ सालों में बढ़ी है। उन्नत प्रजाति के बीज अपनाने से किसानों का फसलों का उत्पादन काफी बढ़ा है। इससे किसानों की आमदनी में इजाफा हुआ है। अगर यही क्रम जारी रहा तो किसानों की आमदनी और बढ़ेगी।
किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए वर्ष 2022 तक का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत किसानों को उन्नत प्रजाति के बीज दिए जा रहे हैं। किसानों को जैविक व सहफसली खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। तकनीक के बारे में भी बताया जा रहा है। बीते कुछ सालों से किसान उन्नत प्रजाति के बीज ही बो रहे हैं। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। जिले के किसानों का फसल उत्पादन पहले के मुकाबले काफी बढ़ा है। इसका सीधा मतलब है कि आमदनी में भी इजाफा हुआ है।
साल गन्ना धान गेहूं सरसों
2011-12 576.88 23.97 32.94 11.40
2012-13 584.72 25.24 31.93 13.74
2013-14 599.32 23.29 33.04 12.74
2014-15 657.44 26.16 27.03 8.84
2015-16 686.56 25.90 31 11.74
2016-17 784.04 25.29 34.57 12.77
2017-18 843.50 25.11 34.69 15.18
नोट: ये आंकड़े गन्ना कृषि विभाग ने एकत्र किए हैं। यह आंकड़े क्विंटल प्रति हेक्टेयर में है। धान का रकबा आखिरी साल कम होने के कारण उत्पादन कम हुआ है।
गन्ने में बंपर पैदावार
गन्ने ने जिले के किसानों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। अर्ली प्रजाति और ट्रैंच विधि किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। गन्ने की प्रजाति 0238 ने किसानों को बहुत फायदा पहुंचाया है। इसे बोने से उत्पादन काफी बढ़ा है।
विज्ञापन
सहफसली खेती बनी वरदान
सहफसली खेती जिले के किसानों के लिए उपलब्धि है। जिले के किसान सहफसली खेती की ओर रुझान कर रहे हैं। इसके अलावा किसानों को खेतों की डोल, घेर आदि में अपने खर्च लायक सब्जी बोने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।
सहायक व्यवसाय अपनाए
जिले के किसान दुग्ध उत्पादन, शहद उत्पादन तथा अन्य सहायक व्यवसायों से भी जुड़ रहे हैं। दुग्ध उत्पादन सहायक व्यवसाय का दर्जा ले चुका है। जिले के किसान तकनीक भी अपना रहे हैं। काफी किसान पॉली हाउस में खेती कर रहे हैं और अपनी फसलों को बड़े शहरों में ले जाकर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं।
फसल खरीदने की नहीं व्यवस्था
भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह का कहना है कि यह सही है कि फसलों का उत्पादन बढ़ा है, लेकिन किसानों की फसलों को खरीदने की उचित व्यवस्था नहीं हो रही है। हाल ही में आलू, गन्ने व गेहूं की फसल का हाल सबने देखा है। किसानों की फसलों की उचित मूल्य पर बिकने की व्यवस्था होनी चाहिए।
आमदनी बढ़ना अच्छे संकेत
जिला कृषि अधिकारी अवधेश मिश्रा के अनुसार किसानों की फसलों का उत्पादन बढ़ा है। यह एक अच्छा संकेत है। अभी उत्पादन और बढ़ेगा। सभी किसान जैविक खेती और उन्नत बीजों को अपनाएंगे तो किसी तरह की समस्या नहीं आएगी। किसानों की आमदनी बढ़ना तो अभी शुरूआत है।
विज्ञापन
बिजनौर। जीतोड़ मेहनत के साथ तकनीक और उन्नत बीजों को अपनाकर किसानों की आमदनी बढ़ाने की कोशिशों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। किसानों की आमदनी पिछले कुछ सालों में बढ़ी है। उन्नत प्रजाति के बीज अपनाने से किसानों का फसलों का उत्पादन काफी बढ़ा है। इससे किसानों की आमदनी में इजाफा हुआ है। अगर यही क्रम जारी रहा तो किसानों की आमदनी और बढ़ेगी।
किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए वर्ष 2022 तक का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत किसानों को उन्नत प्रजाति के बीज दिए जा रहे हैं। किसानों को जैविक व सहफसली खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। तकनीक के बारे में भी बताया जा रहा है। बीते कुछ सालों से किसान उन्नत प्रजाति के बीज ही बो रहे हैं। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। जिले के किसानों का फसल उत्पादन पहले के मुकाबले काफी बढ़ा है। इसका सीधा मतलब है कि आमदनी में भी इजाफा हुआ है।
विज्ञापन
साल गन्ना धान गेहूं सरसों
2011-12 576.88 23.97 32.94 11.40
2012-13 584.72 25.24 31.93 13.74
2013-14 599.32 23.29 33.04 12.74
2014-15 657.44 26.16 27.03 8.84
2015-16 686.56 25.90 31 11.74
2016-17 784.04 25.29 34.57 12.77
2017-18 843.50 25.11 34.69 15.18
नोट: ये आंकड़े गन्ना कृषि विभाग ने एकत्र किए हैं। यह आंकड़े क्विंटल प्रति हेक्टेयर में है। धान का रकबा आखिरी साल कम होने के कारण उत्पादन कम हुआ है।
गन्ने में बंपर पैदावार
गन्ने ने जिले के किसानों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। अर्ली प्रजाति और ट्रैंच विधि किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। गन्ने की प्रजाति 0238 ने किसानों को बहुत फायदा पहुंचाया है। इसे बोने से उत्पादन काफी बढ़ा है।
विज्ञापन
सहफसली खेती बनी वरदान
सहफसली खेती जिले के किसानों के लिए उपलब्धि है। जिले के किसान सहफसली खेती की ओर रुझान कर रहे हैं। इसके अलावा किसानों को खेतों की डोल, घेर आदि में अपने खर्च लायक सब्जी बोने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।
सहायक व्यवसाय अपनाए
जिले के किसान दुग्ध उत्पादन, शहद उत्पादन तथा अन्य सहायक व्यवसायों से भी जुड़ रहे हैं। दुग्ध उत्पादन सहायक व्यवसाय का दर्जा ले चुका है। जिले के किसान तकनीक भी अपना रहे हैं। काफी किसान पॉली हाउस में खेती कर रहे हैं और अपनी फसलों को बड़े शहरों में ले जाकर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं।
फसल खरीदने की नहीं व्यवस्था
भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह का कहना है कि यह सही है कि फसलों का उत्पादन बढ़ा है, लेकिन किसानों की फसलों को खरीदने की उचित व्यवस्था नहीं हो रही है। हाल ही में आलू, गन्ने व गेहूं की फसल का हाल सबने देखा है। किसानों की फसलों की उचित मूल्य पर बिकने की व्यवस्था होनी चाहिए।
आमदनी बढ़ना अच्छे संकेत
जिला कृषि अधिकारी अवधेश मिश्रा के अनुसार किसानों की फसलों का उत्पादन बढ़ा है। यह एक अच्छा संकेत है। अभी उत्पादन और बढ़ेगा। सभी किसान जैविक खेती और उन्नत बीजों को अपनाएंगे तो किसी तरह की समस्या नहीं आएगी। किसानों की आमदनी बढ़ना तो अभी शुरूआत है।