{"_id":"5b9958b0867a557f02566d00","slug":"11536776368-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"भूसे में आग लगती तो होता बड़ा हादसा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भूसे में आग लगती तो होता बड़ा हादसा
Updated Wed, 12 Sep 2018 11:49 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भूसे में आग लगती तो होता बड़ा हादसा
बिजनौर। मोहित पेट्रो केमिकल फैक्ट्री में गनीमत रही कि हादसे के दौरान वहां पड़े भूसे में आग नहीं लगी वरना बड़ा हादसा हो जाता। टैंक से कुछ दूरी पर भूसा पड़ा हुआ था। भूसे को देखकर अफसर भी आश्चर्य में पड़ गए और कहने लगे कि गनीमत रही कि विस्फोट के बाद भूसे में आग नहीं लगी। वरना आग इतनी भयंकर होती कि इसे बुझाना मुश्किल हो जाता। जाने कितने श्रमिक आग की चपेट में आ जाते।
देर होने से बची जान
गांव गजरौलाशिव निवासी हितेश भी फैक्ट्री में नौकरी करता है। बुधवार को वह देर से अपनी ड्यूटी पर पहुंचा। हादसे के दस मिनट बाद हितेश फैक्ट्री के अंदर गया। हादसे को देखकर उसके हाथ पांव फूल गए। हितेश के मुताबिक अगर वह ड्यूटी के समय पर पहुंचता तो हादसे की चपेट में आ सकता था।
एंट्री रजिस्टर जलवाया
घायलों के मुताबिक फैक्ट्री स्वामी ने एंट्री रजिस्टर फैक्ट्री से उठवाकर उसे जलवा दिया है। ताकि कर्मचारियों का कोई सबूत न बचे। फैक्ट्री मालिकों की यह बात गलत है कि फैक्ट्री बंद है। फैक्ट्री चालू थी और श्रमिक उसमें काम कर रहे थे। फैक्ट्री में रात में नौ बजे के बाद कोई खाना नहीं मिलता था। कैंटीन फैक्ट्री में नहीं है। जो कर्मचारी खाना नहीं लाता था, वह रातभर भूखा रहता था।
विज्ञापन
बुझ गया इकलौता चिराग
हादसे में मरा गजरौलाशिव निवासी रवि अपने मां बाप की अकेली संतान था। रवि के मरने से घर का चिराग बुझ गया। रवि की दो साल पहले शादी हुई थी। ग्राम प्रधान शशांक राजपूत के मुताबिक रवि फैक्ट्री में नौकरी करके घर का खर्चा चला रहा था। रवि के मरने से परिजनों में कोहराम मचा है।
विज्ञापन
बिजनौर। मोहित पेट्रो केमिकल फैक्ट्री में गनीमत रही कि हादसे के दौरान वहां पड़े भूसे में आग नहीं लगी वरना बड़ा हादसा हो जाता। टैंक से कुछ दूरी पर भूसा पड़ा हुआ था। भूसे को देखकर अफसर भी आश्चर्य में पड़ गए और कहने लगे कि गनीमत रही कि विस्फोट के बाद भूसे में आग नहीं लगी। वरना आग इतनी भयंकर होती कि इसे बुझाना मुश्किल हो जाता। जाने कितने श्रमिक आग की चपेट में आ जाते।
देर होने से बची जान
गांव गजरौलाशिव निवासी हितेश भी फैक्ट्री में नौकरी करता है। बुधवार को वह देर से अपनी ड्यूटी पर पहुंचा। हादसे के दस मिनट बाद हितेश फैक्ट्री के अंदर गया। हादसे को देखकर उसके हाथ पांव फूल गए। हितेश के मुताबिक अगर वह ड्यूटी के समय पर पहुंचता तो हादसे की चपेट में आ सकता था।
विज्ञापन
एंट्री रजिस्टर जलवाया
घायलों के मुताबिक फैक्ट्री स्वामी ने एंट्री रजिस्टर फैक्ट्री से उठवाकर उसे जलवा दिया है। ताकि कर्मचारियों का कोई सबूत न बचे। फैक्ट्री मालिकों की यह बात गलत है कि फैक्ट्री बंद है। फैक्ट्री चालू थी और श्रमिक उसमें काम कर रहे थे। फैक्ट्री में रात में नौ बजे के बाद कोई खाना नहीं मिलता था। कैंटीन फैक्ट्री में नहीं है। जो कर्मचारी खाना नहीं लाता था, वह रातभर भूखा रहता था।
विज्ञापन
बुझ गया इकलौता चिराग
हादसे में मरा गजरौलाशिव निवासी रवि अपने मां बाप की अकेली संतान था। रवि के मरने से घर का चिराग बुझ गया। रवि की दो साल पहले शादी हुई थी। ग्राम प्रधान शशांक राजपूत के मुताबिक रवि फैक्ट्री में नौकरी करके घर का खर्चा चला रहा था। रवि के मरने से परिजनों में कोहराम मचा है।