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प्रदर्शनी में कवि सम्मेलन-मुशायरा
Updated Mon, 21 Aug 2017 12:32 AM IST
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बिजनौर। जिला कृषि, औद्योगिक व सांस्कृतिक प्रदर्शनी के अंतर्गत इंदिरा बाल भवन में आयोजित कवि सम्मेलन-मुशायरे में शायरों के कलाम देर रात तक सुने गए। जिले के वरिष्ठ व प्रख्यात कवि हुक्का बिजनौरी कार्यक्रम में सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्व चेयरमैन फरीद अहमद, सूर्यमणि रघुवंशी, व्यापारी नेता मनोज कुच्छल ने फीता काटकर किया। कार्यक्रम का आगाज इम्तियाज अजहर ने नाते पाक व रमेश राजहंस ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर किया। शायर नाजिर वहीद ने फरमाया कि रोशनी के हर एक इमकान पर डाला पर्दा, एक लड़की ने मेरी सोच पर जुल्फें रख दीं। रफी बढ़ापुरी के शेर दुश्मनी को इस दिल से इस तरह मिटाएं हम, शीश कुछ झुकाओ तुम सिर को कुछ झुकाएं हम को बहुत पसंद किया गया। मैराज बिजनौरी के शेर मोहब्बत से रहो तुम भी मोहब्बत से रहें हम भी, जरा सी जिंदगी है दुश्मनी अच्छी नहीं होती पर खूब तालियां बजीं। नाजिम अशरफ ने फरमाया कि जो हौंसला है तो अपना चराग रोशन कर, मेरा चराग बुझाने से कुछ नहीं होगा। डा.अतिक दानिश के शेर कभी खंजर ,कभी नश्तर ,कभी शमशीर होती है, जुबां ही मीन है दानिश जुबां ही शीर होती है पर खूब दाद मिली। इसके अलावा नरेंद्रजीत अनाम, हुड़दंग नगीनवी, सिराज सैफी, अरमान धामपुरी, अरुण कुमार, प्रदीप डेजी, रफी बढ़ापरी, आमिर गांधी आदि के कलामों को भी पसंद किया गया। संचालन कर रहे गयूर आसिफ को भी सम्मानित किया गया। संयोजक मरगूब रहमानी, मुशब्बर हुसैन, आसिफ अंसारी, इमरान अंसारी, जीशान मलिक, मोहम्मद अफजाल, इमरान, शमशुद्दीन रहे।
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बिजनौर। जिला कृषि, औद्योगिक व सांस्कृतिक प्रदर्शनी के अंतर्गत इंदिरा बाल भवन में आयोजित कवि सम्मेलन-मुशायरे में शायरों के कलाम देर रात तक सुने गए। जिले के वरिष्ठ व प्रख्यात कवि हुक्का बिजनौरी कार्यक्रम में सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्व चेयरमैन फरीद अहमद, सूर्यमणि रघुवंशी, व्यापारी नेता मनोज कुच्छल ने फीता काटकर किया। कार्यक्रम का आगाज इम्तियाज अजहर ने नाते पाक व रमेश राजहंस ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर किया। शायर नाजिर वहीद ने फरमाया कि रोशनी के हर एक इमकान पर डाला पर्दा, एक लड़की ने मेरी सोच पर जुल्फें रख दीं। रफी बढ़ापुरी के शेर दुश्मनी को इस दिल से इस तरह मिटाएं हम, शीश कुछ झुकाओ तुम सिर को कुछ झुकाएं हम को बहुत पसंद किया गया। मैराज बिजनौरी के शेर मोहब्बत से रहो तुम भी मोहब्बत से रहें हम भी, जरा सी जिंदगी है दुश्मनी अच्छी नहीं होती पर खूब तालियां बजीं। नाजिम अशरफ ने फरमाया कि जो हौंसला है तो अपना चराग रोशन कर, मेरा चराग बुझाने से कुछ नहीं होगा। डा.अतिक दानिश के शेर कभी खंजर ,कभी नश्तर ,कभी शमशीर होती है, जुबां ही मीन है दानिश जुबां ही शीर होती है पर खूब दाद मिली। इसके अलावा नरेंद्रजीत अनाम, हुड़दंग नगीनवी, सिराज सैफी, अरमान धामपुरी, अरुण कुमार, प्रदीप डेजी, रफी बढ़ापरी, आमिर गांधी आदि के कलामों को भी पसंद किया गया। संचालन कर रहे गयूर आसिफ को भी सम्मानित किया गया। संयोजक मरगूब रहमानी, मुशब्बर हुसैन, आसिफ अंसारी, इमरान अंसारी, जीशान मलिक, मोहम्मद अफजाल, इमरान, शमशुद्दीन रहे।
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