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रसोई गैस डिजिटल
Updated Mon, 28 May 2018 12:23 AM IST
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बिजनौर। जिले के पांच लाख उपभोक्ताओं को सीधे डिजिटल भुगतान से जोड़ा जाएगा। अब गैस एजेंसियां जिले के पांच लाख उपभोक्ताओं को डिजिटल भुगतान से जोड़ने जा रही हैं। अंगुठे के निशान और एटीएम और क्रेडिट कार्ड से उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर दिया जाएगा। कनेक्शन धार के परिवार का कोई भी सदस्य डिजिटल भुगतान से सिलेंडर ले सकेगा।
आठ सितंबर 2016 को पुराने 500 व एक हजार के नोट बंद कर दिए गए थे, तभी से डिजिटल भुगतान से उपभोक्ताओं को जोड़ने के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। कभी डिजिटल भुगतान को न जानने वाले उपभोक्ता अब दुकानों, पेट्रोल पंप आदि पर एटीएम कार्ड या अंगूठे के निशान से भुगतान करते दिख जाते हैं। पोस मशीन और बायोमैट्रिक मशीन दुकानों पर खूब नजर आ रही हैं। बैंक भी उपभोक्ताओं को डिजिटल भुगतान करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसके लिए उपभोक्ताओं के बीच जाकर गोष्ठी आदि भी की जा रही हैं। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी अब गैस एजेंसियों को भी दी जा रही है। गैस एजेंसियां भी अब पोस मशीन व बायोमैट्रिक मशीन से सिलेंडर देंगी। हालांकि डिजिटल भुगतान करने के लिए उपभोक्ताओं को मजबूर नहीं किया जाएगा। जिले में करीब पांच लाख घरों में एलपीजी कनेक्शन हैं। अधिकतर एलपीजी कनेक्शनधारक हर महीने एक सिलेंडर लेते हैं। इसका भुगतान नगद में ही किया जाता है। गैस एजेंसी इन उपभोक्ताओं को डिजिटल पेमेंट के लिए प्रेरित करने को अपने वेंडरों को बायोमैट्रिक मशीन व पोस मशीन देंगी। अंगुठे के निशान या फिर एटीएम और क्रेडिट कार्ड से भुगतान लिया जाएगा। राशन के लिए पात्रों के सभी परिजनों के आधार नंबर लिए जा रहे हैं। इससे कोई भी परिजन अपने अंगुठे के निशान से राशन ले सकता है। हालांकि सिलेंडर के लिए ऐसा नहीं होगा। कोई भी परिजन बिना आधार नंबर दिए ही डिजिटल भुगतान से सिलेंडर ले सकता है। एचपी के एरिया मैनेजर विपिन आनंद के मुताबिक डिजिटल भुगतान के लिए वेंडरों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। डिजिटल भुगतान से जुड़ने से गैस एजेंसी मालिक व उपभोक्ता दोनों को सहूलियत होंगी।
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आठ सितंबर 2016 को पुराने 500 व एक हजार के नोट बंद कर दिए गए थे, तभी से डिजिटल भुगतान से उपभोक्ताओं को जोड़ने के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। कभी डिजिटल भुगतान को न जानने वाले उपभोक्ता अब दुकानों, पेट्रोल पंप आदि पर एटीएम कार्ड या अंगूठे के निशान से भुगतान करते दिख जाते हैं। पोस मशीन और बायोमैट्रिक मशीन दुकानों पर खूब नजर आ रही हैं। बैंक भी उपभोक्ताओं को डिजिटल भुगतान करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसके लिए उपभोक्ताओं के बीच जाकर गोष्ठी आदि भी की जा रही हैं। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी अब गैस एजेंसियों को भी दी जा रही है। गैस एजेंसियां भी अब पोस मशीन व बायोमैट्रिक मशीन से सिलेंडर देंगी। हालांकि डिजिटल भुगतान करने के लिए उपभोक्ताओं को मजबूर नहीं किया जाएगा। जिले में करीब पांच लाख घरों में एलपीजी कनेक्शन हैं। अधिकतर एलपीजी कनेक्शनधारक हर महीने एक सिलेंडर लेते हैं। इसका भुगतान नगद में ही किया जाता है। गैस एजेंसी इन उपभोक्ताओं को डिजिटल पेमेंट के लिए प्रेरित करने को अपने वेंडरों को बायोमैट्रिक मशीन व पोस मशीन देंगी। अंगुठे के निशान या फिर एटीएम और क्रेडिट कार्ड से भुगतान लिया जाएगा। राशन के लिए पात्रों के सभी परिजनों के आधार नंबर लिए जा रहे हैं। इससे कोई भी परिजन अपने अंगुठे के निशान से राशन ले सकता है। हालांकि सिलेंडर के लिए ऐसा नहीं होगा। कोई भी परिजन बिना आधार नंबर दिए ही डिजिटल भुगतान से सिलेंडर ले सकता है। एचपी के एरिया मैनेजर विपिन आनंद के मुताबिक डिजिटल भुगतान के लिए वेंडरों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। डिजिटल भुगतान से जुड़ने से गैस एजेंसी मालिक व उपभोक्ता दोनों को सहूलियत होंगी।
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