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समझौता एक्सप्रेस में ब्लास्ट से नजीबाबाद के दंपति की हुई थी मौत
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समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट फैसले से संतुष्ट नहीं हैं परिजन
- समझौता एक्सप्रेस में ब्लास्ट से नजीबाबाद के दंपती की हुई थी मौत
फोटो - 20एनजेडबी07आर
अमर उजाला ब्यूरो
नजीबाबाद (बिजनौर)। समझौता एक्सप्रेस में हुए ब्लास्ट में नजीबाबाद के दंपती की मृत्यु हुई थी। जबकि उनका युवा पुत्र गंभीर रूप से घायल हुआ था। 12 वर्ष बाद आए फैसले में आरोपियों के बरी होने से परिजन आश्चर्य में हैं।
नजीबाबाद के मोहल्ला मुगलूशाह निवासी 68 वर्षीय मो. सिद्दीक अपनी 62 वर्षीय पत्नी अशरफुन्निशा और पुत्र मो. जाकिर के साथ पाकिस्तान जा रहे थे। फरवरी 2007 में दिल्ली से अटारी लाहौर के लिए दंपती अपने पुत्र के साथ समझौता एक्सप्रेस से पाकिस्तान जा रहे थे तभी हरियाणा के पंचकुला क्षेत्र में समझौता एक्सप्रेस में भारतीयों सहित कई दर्जन लोग हताहत हुए थे। इनमें नजीबाबाद के दंपति मो. सिद्दीक और उनकी पत्नी अशरफुन्निशा शामिल थीं। जबकि पुत्र मो. जाकिर बुरी तरह झुलस गया था।
गंभीर रूप से घायल मो. जाकिर का करीब डेढ़ माह तक दिल्ली के अस्पताल में उपचार चला था। मो. जाकिर का चेहरा, हाथ और शरीर बम ब्लास्ट में बुरी तरह झुलस गया था। सरकार ने दंपती के परिवार को मुआवजा राशि दी थी।
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मो. सिद्दीक की पहचान तक नहीं हुई
नजीबाबाद। बम ब्लास्ट इतना भयंकर था कि सिद्दीक दंपती में से केवल डीएनए के माध्यम से अशरफुन्निशा की पहचान हुई थी। जबकि उनके मो. सिद्दीक की पहचान न होने तथा डीएनए न मिलने से पहचान नहीं हो सकी थी।
समझौते से संतुष्ट नहीं जाकिर
नजीबाबाद। समझौता एक्सप्रेस में हुए ब्लास्ट से अपने माता-पिता को गंवाने और स्वयं बुरी तरह झुलसने वाले नजीबाबाद निवासी मो. जाकिर और उनका परिवार फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। नजीबाबाद में सम्राट टेलर कारोबारी मो. जाकिर ने न्यायालय के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए गंभीर मामले में आरोपियों को बरी करने के फैसले पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की है।
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- समझौता एक्सप्रेस में ब्लास्ट से नजीबाबाद के दंपती की हुई थी मौत
फोटो - 20एनजेडबी07आर
अमर उजाला ब्यूरो
नजीबाबाद (बिजनौर)। समझौता एक्सप्रेस में हुए ब्लास्ट में नजीबाबाद के दंपती की मृत्यु हुई थी। जबकि उनका युवा पुत्र गंभीर रूप से घायल हुआ था। 12 वर्ष बाद आए फैसले में आरोपियों के बरी होने से परिजन आश्चर्य में हैं।
नजीबाबाद के मोहल्ला मुगलूशाह निवासी 68 वर्षीय मो. सिद्दीक अपनी 62 वर्षीय पत्नी अशरफुन्निशा और पुत्र मो. जाकिर के साथ पाकिस्तान जा रहे थे। फरवरी 2007 में दिल्ली से अटारी लाहौर के लिए दंपती अपने पुत्र के साथ समझौता एक्सप्रेस से पाकिस्तान जा रहे थे तभी हरियाणा के पंचकुला क्षेत्र में समझौता एक्सप्रेस में भारतीयों सहित कई दर्जन लोग हताहत हुए थे। इनमें नजीबाबाद के दंपति मो. सिद्दीक और उनकी पत्नी अशरफुन्निशा शामिल थीं। जबकि पुत्र मो. जाकिर बुरी तरह झुलस गया था।
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गंभीर रूप से घायल मो. जाकिर का करीब डेढ़ माह तक दिल्ली के अस्पताल में उपचार चला था। मो. जाकिर का चेहरा, हाथ और शरीर बम ब्लास्ट में बुरी तरह झुलस गया था। सरकार ने दंपती के परिवार को मुआवजा राशि दी थी।
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मो. सिद्दीक की पहचान तक नहीं हुई
नजीबाबाद। बम ब्लास्ट इतना भयंकर था कि सिद्दीक दंपती में से केवल डीएनए के माध्यम से अशरफुन्निशा की पहचान हुई थी। जबकि उनके मो. सिद्दीक की पहचान न होने तथा डीएनए न मिलने से पहचान नहीं हो सकी थी।
समझौते से संतुष्ट नहीं जाकिर
नजीबाबाद। समझौता एक्सप्रेस में हुए ब्लास्ट से अपने माता-पिता को गंवाने और स्वयं बुरी तरह झुलसने वाले नजीबाबाद निवासी मो. जाकिर और उनका परिवार फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। नजीबाबाद में सम्राट टेलर कारोबारी मो. जाकिर ने न्यायालय के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए गंभीर मामले में आरोपियों को बरी करने के फैसले पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की है।