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रंगारंग कार्यक्रमों के साथ शिल्पकार विश्वकर्मा जयंती मनी

Tue, 18 Sep 2018 12:30 AM IST
Updated Tue, 18 Sep 2018 12:30 AM IST
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रंगारंग कार्यक्रमों के साथ शिल्पकार विश्वकर्मा जयंती मनी
रंगारंग कार्यक्रम के साथ मनाई शिल्पकार विश्वकर्मा जयंती
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धामपुर। धामपुर चीनी मिल की ओर से सोमवार को विश्वकर्मा जयंती के उपलक्ष्य में कारखाने में मशीनों की पूजा की। भगवान विश्वकर्मा से कारखाने को बेहतर ढंग से चालू कराने की कामना की। इस मौके पर यज्ञ का आयोजन किया गया। जिसमें चीनी मिल के अधिकारियों ने आहुतियों देकर बुराईयों को दूर करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के मुख्य यजमान डीएसएम ग्रुप के मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष संदीप शर्मा, निष्काम गुप्ता, विजय गुप्ता, सुधीर कुमार, अमित शर्मा, योगेंद्र सिंह, एपी मिश्रा, विश्वकर्मा कमेटी के सदस्य चंद्रजीत सिंह, राम सिंह, किशनलाल बटुटे, शमीम, शेखर, किशन, आजाद सिंह , कुलदीप शर्मा,जेपी गोस्वामी, सुरेश कुमार सक्सेना, डा. पंकज कुमार रहे। इस दौरान चीनी मिल की ओर से कीर्तन मंडली की व्यवस्था की गई थी।
गांव बसेड़ा खुर्द स्थित जनता इंटर कलेज में संपन्न हुए कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर विद्यालय के प्रधानाचार्य लोकमन सिंह, सुशील कुमार शर्मा, रामकुमार शर्मा, मनोज कुमार, रविंद्र कुमार, पुनीत कुमार ने विश्वकर्मा के आदर्शों पर प्रकाश डाला। छात्र तहरीन बानो, आयशा, शिवानी रानी, समरीन, संजीव कुमार, राजीव कुमार, मोहित कुमार, शिवम कुमार, शहजाद आलम रहे। गांव जैतरा के मां शांति बाई सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में आचार्य सोमदत्त, देवांक , सुशील शर्मा, प्रधानाचार्य सुरेश चंद यादव, कृष्ण कुमार, भूपेंद्र कुमार, प्रकाश , अरविंद कुमार, श्वेता कुमारी, शीतल रानी ने बच्चों को विश्वकर्मा जी के बारे में जानकारी दी।
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रामगोपाल रामचंद्र सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज में विश्वकर्मा जयंती कार्यक्रम हर्षोल्लास से मना। सांस्कृतिक विभाग की ओर रंगारंग कार्यक्रम हुए। आचार्य विजेंद्र शर्मा ने कहा कि महर्षि अंगरा के ज्येष्ठ पुत्र बृहस्पति की बहिन भुवना और अष्टम ऋषि महर्षि प्रभास के पुत्र विश्वकर्मा देवताओं के आचार्य थे। प्रधानाचार्य चंद्र किशोर ने कहा कि यह सर्वव्यापक, सर्वज्ञ, शक्ति संपन्न और अनंत हैं। आगे चलकर अनेक विश्वकर्मा बने। विश्वकर्मा के गुणों को धारण करने वाले श्रेष्ठ पुरुषों को विश्वकर्मा की उपाधि से अलंकृत किया गया है। आज के दिन औद्योगिक प्रतिष्ठानों कारखानों आदि में मशीनों व कलपुर्जों की पूजा की जाती है।
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