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गोबर से बनेगा बर्मिंग कंपोस्ट
Updated Sun, 24 Dec 2017 12:14 AM IST
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बिजनौर। किसानों के लिए अच्छी खबर है। अब पशुओं का गोबर बेकार नहीं जाएगा। गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनेगा। गोबर से फैलने वाली गंदगी से निजात मिलेगा। किसान सम्मान दिवस पर उपनिदेशक कृषि भूपेंद्र ने गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनाने में सहायक डी -कंपोजर बैक्टिरिया को लांच किया। किसानों से इस तकनीक का अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया गया है।
उपनिदेशकभूपेंद्र चौधरी के अनुसार जिले के किसान पशुपालन का काम करते हैं। जिले में कई दुग्ध डेयरी संचालित हैं। किसान पशुओं का गोबर या तो कूड़ी पर डालता है या इधर-उधर बेकार फेंक देता है। इससे गंदगी फैलती है। नालियों में गोबर जाने से विभिन्न बीमारी फैलने का खतरा रहता है। अब गोबर बेकार नहीं जाएगा। गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनेगा। गांव गांव कंपोस्ट गड्ढे बनाए जाएंगे। किसान गोबर को उसमें डालेगा। भर जाने पर इसमें डी-कंपोजर बैक्टिरिया डाले जाएंगे। डी-कंपोजर बैक्टिरिया राष्ट्रीय जैविक संस्था गाजियाबाद से मंगवाए गए हैं। जिले को प्रथम चरण में 230 पैकेट मिले हैं। एक पैकेट से एक साल में एक लाख टन गोबर का जैविक खाद बनेगा। पैकेट जिला कृषि अधिकारी दफ्तर में उपलब्ध है।
जिले के किसान जाएंगे आंध्रप्रदेश व कर्नाटक
सीडीओ इंद्रमणि त्रिपाठी के अनुसार वे दक्षिण भारत के दौरे पर गए थे। उन्होंने वहां के गांवों में जाकर कृषि उत्पादन के तरीकों को देखा। वहां किसान जैविक खाद का प्रयोग बड़े पैमाने पर प्रयोग करता है। गोबर से वर्मिंग कंपोस्ट बनाया जाता है। इससे गांवों में स्वच्छता को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रशासन की ओर से किसानों को आत्मा योजना के अंतर्गत आंध्रप्रदेश व कर्नाटक भेजा जाएगा।
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उपनिदेशकभूपेंद्र चौधरी के अनुसार जिले के किसान पशुपालन का काम करते हैं। जिले में कई दुग्ध डेयरी संचालित हैं। किसान पशुओं का गोबर या तो कूड़ी पर डालता है या इधर-उधर बेकार फेंक देता है। इससे गंदगी फैलती है। नालियों में गोबर जाने से विभिन्न बीमारी फैलने का खतरा रहता है। अब गोबर बेकार नहीं जाएगा। गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनेगा। गांव गांव कंपोस्ट गड्ढे बनाए जाएंगे। किसान गोबर को उसमें डालेगा। भर जाने पर इसमें डी-कंपोजर बैक्टिरिया डाले जाएंगे। डी-कंपोजर बैक्टिरिया राष्ट्रीय जैविक संस्था गाजियाबाद से मंगवाए गए हैं। जिले को प्रथम चरण में 230 पैकेट मिले हैं। एक पैकेट से एक साल में एक लाख टन गोबर का जैविक खाद बनेगा। पैकेट जिला कृषि अधिकारी दफ्तर में उपलब्ध है।
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जिले के किसान जाएंगे आंध्रप्रदेश व कर्नाटक
सीडीओ इंद्रमणि त्रिपाठी के अनुसार वे दक्षिण भारत के दौरे पर गए थे। उन्होंने वहां के गांवों में जाकर कृषि उत्पादन के तरीकों को देखा। वहां किसान जैविक खाद का प्रयोग बड़े पैमाने पर प्रयोग करता है। गोबर से वर्मिंग कंपोस्ट बनाया जाता है। इससे गांवों में स्वच्छता को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रशासन की ओर से किसानों को आत्मा योजना के अंतर्गत आंध्रप्रदेश व कर्नाटक भेजा जाएगा।
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