स्कूल-कॉलेजों के पाठ्यक्रम में शामिल हो भगवद्गीता, बृहस्पति भवन में महोत्सव का आयोजन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
घरों में बच्चों को भगवद्गीता जरूर पढ़ाएं। स्कूल-कॉलेजों के पाठ्यक्रम में इसे शामिल किया जाना चाहिए। यूएस, ब्रिटेन से लेकर जर्मनी तक भगवद्गीता पढ़ाई जाती है। हमारे देश में हमारी ही भगवद्गीता (भगवान कृष्ण की गाथा) नहीं सुनाई जाती है। ओम पहनना पड़ जाए तो शर्म आती है। अपने धर्म पर जब तक हम खुद गर्व नहीं करेंगे तो दूसरों को क्या बताएंगे। यह विचार रविवार को सीसीएसयू के बृहस्पति भवन में आयोजित गीता ज्ञान महोत्सव में वक्ताओं ने व्यक्त किए। महोत्सव में अयोध्या से आए जगत गुरू महंत परम हंसाचार्य महाराज ने गीता का महत्व समझाया। उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि अमेरिका के बड़े दार्शनिक हुए हैं इमरसन। उनको एक कॉलेज में बाइबिल पढ़ाने के लिए रखा गया तो वह गीता पढ़ाने लगे।
मैनेजमेंट ने उनसे इसका कारण पूछा। इस पर इमरसन ने कहा कि आपने मुझे क्रिश्चियन बाइबिल पढ़ाने के लिए रखा था, लेकिन मैं यूनिवर्सल बाइबिल पढ़ा रहा हूं। इस पर उनको वहां से हटा दिया गया। इमरसन एक बार इंग्लैंड के बड़े दार्शनिक कारलाई से मिलने गए। कारलाई ने उनसे कहा कि आप तो डॉलर के देश से आए हैं, हमारे लिए क्या उपहार लाए हैं। इमरसन ने कहा कि अमेरिका के पास तो पूरे यूरोप से लोग आए हैं। हमारी तो कोई संस्कृति ही नहीं है। यह कहकर वह रोने लगे।
उन्होंने कहा कि फिर भी मैं आपके लिए एक मूल्यवान उपहार लाया हूं और उन्होंने गीता भेंट की। इस पर कारलाई ने कहा कि मैंने भी आपके लिए एक उपहार रखा है। उन्होंने भी इमरसन को गीता भेंट की। यह घटना एक पत्रिका में छपी। एक फिलॉसफी के अध्यापक ने मसूरी में यह पत्रिका पढ़ी। उसके बाद से उन्होंने पाश्चात्य गीता अपना ली। उस शिक्षक का नाम सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णनन था। उन्होंने कहा कि रक्त, मांस या हड्डी से किसी के धर्म को परिभाषित नहीं कर सकते हैं। लेकिन गीता एक ऐसा मानवीय ज्ञान है, जो कि हर मानव के लिए है। ऐसी गीता कम्युनल नहीं हो सकती।
अखिल भारतीय संत परिषद के राष्ट्रीय संयोजक यति नरसिंहानंद सरस्वती ने कहा कि अन्याय और अत्याचार की अति का परिणाम महाभारत है और महाभारत का आरंभ गीता है। युद्धभूमि में अवतरित हुआ यह अतुलनीय ग्रंथ अपने आप में मानव जीवन के आध्यात्म और मनोविज्ञान का अनुपम ग्रंथ है। यह व्यक्ति या समाज के जीवन का संपूर्ण मार्गदर्शन करता है। उन्होंने कहा कि अहिंसा को समझने से पहले हिंसा को समझो। वेद कहता है कि जिस कार्य से निर्दोषों का हनन होता है, उनकी हत्या होती है, उसे हम हिंसा कहते हैं। जिस पराक्रम, वीरता से हिंसा को समाज से दूर किया जाता है, उसे अहिंसा कहा जाता है।
अंतरराष्ट्रीय महिला अखाड़ा की महामंडलेश्वर शिवानी दुर्गा ने कहा कि शास्त्र ही हमारा सबसे बड़ा शस्त्र है। जिसके पास शास्त्र का ज्ञान है उसके पास शस्त्र का ज्ञान होगा ही। क्योंकि उसकी वाणी में शस्त्र पैदा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि भगवद्गीता को स्कूल-कॉलेजों के पाठ्यक्रम में शामिल करने की जरूरत है। सांस्कृतिक गौरव संस्थान के राष्ट्रीय महामंत्री दिनेश चंद्र त्यागी ने कहा की गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने बताया है कि जीवन की कामना रखने वालों में मैं नीति हूं। हमें यह समझ लेना चाहिए कि कोई व्यक्ति या राष्ट्र तभी प्रगति और विजय को प्राप्त कर सकता है जब उसकी नीति सही हो।
कई राज्यों से पहुंचे महंत-महामंडलेश्वर
सांस्कृतिक गौरव संस्थान के तत्वावधान एवं स्व. शकुंतला ईश्वर सिंह की पुण्य स्मृति में आयोजित महोत्सव में कई शहरों से आए गीता मनीषियों और प्रचारकों ने भाग लिया। महोत्सव में महामंडलेश्वर निलिमानंद, डॉ. पीयूष गुप्ता, आर्य विदुषी आयुषी राणा ने भी विचार रखे। अध्यक्षता समाज सेवी अजय गुप्ता और संचालन हिंदू स्वाभिमान की राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत यति मां चेतनानंद सरस्वती ने किया। महोत्सव का आरंभ आनंद प्रकाश अग्रवाल ने किया। इसके बाद सत्यकाम इंटरनेशनल की छात्रा नलिनी सिंह ने गीता के श्लोकों का पाठ किया।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में डॉ. ईश्वर सिंह, मुख्य संयोजक कपिल त्यागी और मुख्य समन्वयक अमर शर्मा, राजेश निगम, अमर शर्मा, सचिन मित्तल, सुनील चड्ढ़ा, आशीष नारायण त्यागी, शंभू पहलवान, सागर पोसवाल, आशुतोष, विक्रांत शर्मा, वरुण शर्मा, सतेंद्र कुमार, विक्रांत गुप्ता, सुनील भाटी, अजय सोम, दीपक जोशी, विपिन त्यागी, नितीश भारद्वाज आदि मौजूद रहे।
देश में बदलाव की जरूरत है
यति नरसिंहानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि म्यांमार से रोहिंग्या यहां आकर रह रहे हैं। आज समय ठीक नहीं है। पुलिस और पीएसी नहीं होती तो पिछले दिनों पता नहीं शहरों का क्या हाल होता। देश में बदलाव की जरूरत है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो खुद का घर नहीं बचेगा। ऐसे में गीता के कुछ श्लोक नहीं बल्कि महाभारत के साथ गीता को पढ़ना। उन्होंने कहा कि अगर गीता को सही से पढ़ लेते तो आज देश की यह सूरत नहीं होती। देश की जनगणना को पूर्व की सरकार ने गलत तरह से दिखाया। मैं जानता हूं कि डासना में जिसके 15 बच्चे हैं, उनको 2011 की जनगणना में सिर्फ दो दिखाया गया। उन्होंने कहा कि शहर में इस बार लोकसभा चुनाव का परिणाम क्या होता, यह लोग जानते हैं। किस तरह से भीड़ सड़कों पर आ गई थी, जब चुनाव परिणाम घोषित भी नहीं हुआ था। देश में क्या होने वाला है, यह अभी आप नहीं सोच रहे हैं।