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अप्रैल माह में करते हैं 60 करोड़ की कमाई
ब्यूरो/ अमर उजाला ,भदोही
Updated Sat, 02 Apr 2016 07:01 PM IST
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स्कूल
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फीस, किताब और यूनिफार्म के सहारे अभिभावकों का शोषण करने वाले लगभग 30 कान्वेंट स्कूलों के संचालक सरकारी राजस्व को भी चूना लगा रहे हैं। अभिभावकों को किताब, यूनिफॉर्म देते समय कच्ची रसीद के सहारे अपनी कमाई बढ़ा रहे हैं। अप्रैल माह में जिले के कान्वेंट स्कूल लगभग 60 करोड़ की कमाई करते हैं। आयकर विभाग ऐसे संचालकों पर नोटिस की कार्रवाई की कवायद करता है, लेकिन स्कूल संचालकों के राजनीतिक पकड़ के चलते नोटिस तक ही कार्रवाई सिमट जाती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार को समाप्त करने के खिलाफ जहां मुहिम चला रहे हैं, वहीं शिक्षा को व्यवसाय बना चुके तमाम निजी स्कूल संचालक महज एक माह में करोड़ों की काली कमाई कर रहे हैं। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जिले में 30 ऐसे कान्वेंट स्कूल हैं, जहां 50 हजार से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। एक-एक बच्चे पर 10 हजार से अधिक खर्च यूनिफार्म और किताबों पर आता है। इस तरह शिक्षा के बहाने कान्वेंट स्कूल अप्रैल महीने में करीब 60 करोड़ का कारोबार करते हैं। खास बात यह है कि एमिडशन के दौरान स्कूल संचालकों की ओर से अभिभावकों को किताब और यूनिफार्म की पक्की रसीद नहीं दी जाती है। इसके जरिए वह टैक्स चोरी कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाते हैं। आयकर विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अप्रैल माह में करीब छह करोड़ की काली कमाई कान्वेंट स्कूल करते हैं। इनकी लॉबी इतनी मजबूत है कि कार्रवाई होते ही दबाव पड़ने लगता है।
इनसेट
टैक्स चोरी रोकने के लिए समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। पूर्व के वर्षों में कान्वेंट स्कूलों को नोटिस भी भेजा गया था। नया वित्तीय वर्ष शुरू होने के साथ अब फिर नोटिस भेजा जाएगा।
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केएन दूबे
आयकर अधिकारी, भदोही
अभिभावकों की बातें-
अभिभावक आदर्श त्रिपाठी ने कहा कि कान्वेंट स्कूल यूनिफार्म और किताब का कैशमेमो नहीं देते हैं। केवल कागज के टुकड़े पर पैसा लिख दिया जाता है। ऐसे स्कूलों पर कार्रवाई की जरूरत है।
अभिभावक प्रदीप सिंह ने कहा कि अंग्रेजी के नाम पर निजी स्कूलों में अभिभावकों का शोषण किया जा रहा है। सभी कान्वेंट स्कूलों की फीस तय की जानी चाहिए ताकि अभिभावकों को जानकारी रहे।
अभिभावक दीनानाथ ने कहा कि कान्वेंट शिक्षा अपने उद्देश्य से भटक गई है। कहा कि ऐसे विद्यालयों को निचले तबके के छात्रों के बारे में भी सोचना चाहिए, लेकिन दिखावे और चमक-दमक में शिक्षा छूट जाती है।
अभिभावक जावेद अहमद ने कहा कि टैक्स चोरी करने वाले विद्यालयों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। जनता से पैसा वसूलकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना देश की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाना है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार को समाप्त करने के खिलाफ जहां मुहिम चला रहे हैं, वहीं शिक्षा को व्यवसाय बना चुके तमाम निजी स्कूल संचालक महज एक माह में करोड़ों की काली कमाई कर रहे हैं। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जिले में 30 ऐसे कान्वेंट स्कूल हैं, जहां 50 हजार से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। एक-एक बच्चे पर 10 हजार से अधिक खर्च यूनिफार्म और किताबों पर आता है। इस तरह शिक्षा के बहाने कान्वेंट स्कूल अप्रैल महीने में करीब 60 करोड़ का कारोबार करते हैं। खास बात यह है कि एमिडशन के दौरान स्कूल संचालकों की ओर से अभिभावकों को किताब और यूनिफार्म की पक्की रसीद नहीं दी जाती है। इसके जरिए वह टैक्स चोरी कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाते हैं। आयकर विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अप्रैल माह में करीब छह करोड़ की काली कमाई कान्वेंट स्कूल करते हैं। इनकी लॉबी इतनी मजबूत है कि कार्रवाई होते ही दबाव पड़ने लगता है।
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टैक्स चोरी रोकने के लिए समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। पूर्व के वर्षों में कान्वेंट स्कूलों को नोटिस भी भेजा गया था। नया वित्तीय वर्ष शुरू होने के साथ अब फिर नोटिस भेजा जाएगा।
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केएन दूबे
आयकर अधिकारी, भदोही
अभिभावकों की बातें-
अभिभावक आदर्श त्रिपाठी ने कहा कि कान्वेंट स्कूल यूनिफार्म और किताब का कैशमेमो नहीं देते हैं। केवल कागज के टुकड़े पर पैसा लिख दिया जाता है। ऐसे स्कूलों पर कार्रवाई की जरूरत है।
अभिभावक प्रदीप सिंह ने कहा कि अंग्रेजी के नाम पर निजी स्कूलों में अभिभावकों का शोषण किया जा रहा है। सभी कान्वेंट स्कूलों की फीस तय की जानी चाहिए ताकि अभिभावकों को जानकारी रहे।
अभिभावक दीनानाथ ने कहा कि कान्वेंट शिक्षा अपने उद्देश्य से भटक गई है। कहा कि ऐसे विद्यालयों को निचले तबके के छात्रों के बारे में भी सोचना चाहिए, लेकिन दिखावे और चमक-दमक में शिक्षा छूट जाती है।
अभिभावक जावेद अहमद ने कहा कि टैक्स चोरी करने वाले विद्यालयों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। जनता से पैसा वसूलकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना देश की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाना है।