{"_id":"5f172dde8ebc3e63a61f23ad","slug":"weavers-get-solar-home-lighting-system-bhadohi-news-vns5371523167","type":"story","status":"publish","title_hn":"बुनकरों को मिला सोलर होम लाईटिंग सिस्टम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुनकरों को मिला सोलर होम लाईटिंग सिस्टम
विज्ञापन
आईआईसीटी में महिला बुनकर को सोलर लाइट सिस्टम देते निदेशक डा.आलोक कुमार
- फोटो : BHADOHI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भदोही। भदोही, मिर्जापुर, वाराणसी कालीन परिक्षेत्र के बुनकरों को केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय द्वारा सोलर होम लाइटिंग सिस्टम उपलब्ध कराने की योजना मंगलवार से पुन: शुरू की गई। 16 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीनदयाल हस्तकला संकुल वाराणसी में तीन बुनकरों को सिस्टम प्रदान कर शुरूआत की थी। योजना क्रियान्वित करने वाले भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) के निदेशक डॉ. आलोक कुमार ने मंगलवार को 99 बुनकरों को सिस्टम दिए। बता दें कि केंद्र सरकार से डिजाइन और तकनीकी उन्नयन योजना के तहत तीन जनपदों के 2187 बुनकरों को चयनित किया गया है।
निदेशक ने कहा कि यह योजना सीधे सीधे बुनकरों को और कालीन उद्योग को लाभ पहुंचाएगी। कहा कि कालीन उद्योग की धुरी ये बुनकर हैं। कालीन परिक्षेत्र में बिजली की समस्या हमेशा से रही है। कटौती के समय दिन के उजाले में काम हो सकता है, लेकिन रात में बिजली बिन बुनाई कार्य प्रभावित होता है। इससे सीधे-सीधे बुनकरों की और उद्यमियों का नुकसान होता है। यदि कालीन बनाने के ऑर्डर अत्यावश्यक हो तो उद्यमियों को भारी नुकसान सहना पड़ता है। इसी नजरिए से विकास आयुक्त हस्तशिल्प केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के निर्देश पर यह योजना बनाई थी।
बताया कोविड-19 के दृष्टिगत जैसे-जैसे बुनकर आते जाएंगे, वैसे वैसे लोगों को सिस्टम दिए जाने की योजना है। यह प्रक्रिया लगभग एक महीने चलेगी। सभी जनपदों के बुनकरों को इसकी जानकारी दे दी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
निदेशक ने कहा कि यह योजना सीधे सीधे बुनकरों को और कालीन उद्योग को लाभ पहुंचाएगी। कहा कि कालीन उद्योग की धुरी ये बुनकर हैं। कालीन परिक्षेत्र में बिजली की समस्या हमेशा से रही है। कटौती के समय दिन के उजाले में काम हो सकता है, लेकिन रात में बिजली बिन बुनाई कार्य प्रभावित होता है। इससे सीधे-सीधे बुनकरों की और उद्यमियों का नुकसान होता है। यदि कालीन बनाने के ऑर्डर अत्यावश्यक हो तो उद्यमियों को भारी नुकसान सहना पड़ता है। इसी नजरिए से विकास आयुक्त हस्तशिल्प केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के निर्देश पर यह योजना बनाई थी।
विज्ञापन
बताया कोविड-19 के दृष्टिगत जैसे-जैसे बुनकर आते जाएंगे, वैसे वैसे लोगों को सिस्टम दिए जाने की योजना है। यह प्रक्रिया लगभग एक महीने चलेगी। सभी जनपदों के बुनकरों को इसकी जानकारी दे दी गई है।
विज्ञापन