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पद्मश्री रामयत्न शुक्ल के निधन से शोक की लहर

Wed, 21 Sep 2022 01:00 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 21 Sep 2022 01:00 AM IST
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Wave of mourning due to the demise of Padmashree Ramayatna Shukla
काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष देवभाषा संस्कृत के मूर्धन्य विद्वान पद्मश्री प्रो. रामयत्न शुक्ला (90) का मंगलवार को निधन हो गया। वह जिले के कोनिया क्षेत्र के कलातुलसी गांव के निवासी थे। निधन की सूचना मिलते ही कलातुलसी सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनके निधन के साथ ही संस्कृत जगत के एक युग का अंत हो गया।
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आचार्य रामचंद्र शुक्ल का जन्म 1932 में जिले के दक्षिणांचल गंगा नदी से गिरे कोनिया क्षेत्र की गंगा तटीय गांव कला तुलसी में हुआ था। उनकी प्राथमिक शिक्षा गांव के प्राथमिक पाठशाला में हुयी थी। बचपन से ही उनमें संस्कृत के प्रति विशेष रुचि रही। उनके पिता पं. रामनिरंजन शुक्ल संस्कृत के विद्वान थे। प्रो. रामयत्न शुक्ल ने धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज और स्वामी चैतन्य भारती से वेदांत शास्त्र, पंडित प्रवर हरिराम शुक्ला से मीमांसा शास्त्र और पंडित रामचंद्र शास्त्री से दर्शन शास्त्र, योग शास्त्र की शिक्षा प्राप्त की थी। वे बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में प्रोफेसर के पद पर सेवाएं दे चुके हैं। वह संस्कृत की नि:शुल्क शिक्षा देते थे। छात्रों की हर समस्या का समाधान करते थे। वे संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में व्याकरण विभाग के अध्यक्ष भी रह चुके थे। उनके निधन की पुष्टि उनके बड़े पुत्र रामाश्रय शुक्ल ने करते हुए बताया कि शाम छह बजे गुरू ग्राम अस्पताल वाराणसी में अंतिम सांस ली।
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नामचीन हस्तियों को दिया था शिक्षा दान
शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती, प्रख्यात विद्वान जगतगुरु रामभद्राचार्य, रामानंदाचार्य सहित तमाम नामचीन हस्तियों को विद्यादान देने वाले वाले प्रो. रामयत्न शुक्ल 1961 में सन्यासी संस्कृत महाविद्यालय में बताओ प्राध्यापक नियुक्त हुए थे। उन्हें इस क्षेत्र में काशी हिंदू विश्वविद्यालय में अपनी सेवाएं दी फिर 1982 में रिटायर हो गए वर्तमान में वह आजीवन काशी विद्युत परिषद के अध्यक्ष हैं। वह सनातन संस्कृति परिषद के संस्थापक हैं। देव भाषा संस्कृत के उत्थान और प्रचार-प्रसार के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिला था। वर्ष 2015 में संस्कृत के शीर्ष सम्मान विश्व भारती से भी सम्मानित किया जा चुका है। प्रोफेसर शुक्ला को 26 जनवरी को पद्मश्री के लिए नामित किया गया था लेकिन कोरोनावायरस से यह सम्मान वर्ष 2022 में देश के तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में राष्ट्रपति भवन में पद्मश्री अवार्ड से नवाजा था। उनके निधन पर रमाशंकर शुक्ल, राहुल दूबे, हनुमान प्रसाद शुक्ला, कमलाशंकर मिश्रा, राकेश पांडेय, आचार्य रामसेवक पांडेय, श्री कांत शुक्ल, छोटेलाल शुक्ल आदि ने शोक जताया है।
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