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शिक्षित युवाओं के हाथों में %गांव की सरकार%
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ज्ञानपुर। कालीन नगरी में पहली बार गांव की सरकार शिक्षित और युवाओं के हाथ में होगी। 130 ग्राम पंचायतों में उच्च शिक्षा ग्रहण कर चुके प्रधान कमान संभालेंगे। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने वाले भी 150 से अधिक हैं। शिक्षित और युवाओं के हाथों में गांव की सरकार की कमान पहुंचने के बाद लोगों की उम्मीद भी काफी बढ़ गई है।
देश की आत्मा गावों में बसती है। सरकार गांव के विकास पर विशेष फोकस देती है। पेयजल, स्वच्छता समेत अन्य योजनाओं पर हर साल करोड़ो रूपये खर्च होते हैं, लेकिन पढ़े लिखे प्रधान के न होने का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। ग्राम पंचायत अधिकारी या कुछ लोगों के ईशारे पर प्रधान को चलना पड़ता है। जिससे गांव का समुचित विकास नहीं हो पाता। लेकिन दरअसल 2021 के पंचायत चुनाव में ऐसा नहीं है। जिले में पहले चरण में 15 अप्रैल को मतदान हुआ। 26 जिला पंचायत, 546 ग्राम पंचायत, 661 बीडीसी और तीन हजार से अधिक ग्राम पंचायत सदस्यों के लिए मतदान हुआ। दो मई से शुरू हुई मतगणना चार मई तक चली, हालांकि तीन मई को ही सभी ग्राम प्रधान निर्वाचित हो गए।
निर्वाचन विभाग के आंकड़ो पर गौर करें तो पहली बार उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले उम्मीदवार मतदाताओं की पसंद रहे। जिससे 546 ग्राम पंचायत वाले जिले में 90 प्रधान स्नातक, परास्नातक संग अन्य डिग्री हासिल कर चुके हैं जबकि 2015 में यह संख्या 50 से भी कम रही। आंकड़ों पर गौर करें तो निरक्षर 60, पाचवीं पास 150, आठवीं पास 34, हाईस्कूल उत्तीर्ण 85, इंटरमीडिएट 60, स्नातक 70 और परास्नातक 40 प्रधान निर्वाचित हुए।
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देश की आत्मा गावों में बसती है। सरकार गांव के विकास पर विशेष फोकस देती है। पेयजल, स्वच्छता समेत अन्य योजनाओं पर हर साल करोड़ो रूपये खर्च होते हैं, लेकिन पढ़े लिखे प्रधान के न होने का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। ग्राम पंचायत अधिकारी या कुछ लोगों के ईशारे पर प्रधान को चलना पड़ता है। जिससे गांव का समुचित विकास नहीं हो पाता। लेकिन दरअसल 2021 के पंचायत चुनाव में ऐसा नहीं है। जिले में पहले चरण में 15 अप्रैल को मतदान हुआ। 26 जिला पंचायत, 546 ग्राम पंचायत, 661 बीडीसी और तीन हजार से अधिक ग्राम पंचायत सदस्यों के लिए मतदान हुआ। दो मई से शुरू हुई मतगणना चार मई तक चली, हालांकि तीन मई को ही सभी ग्राम प्रधान निर्वाचित हो गए।
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निर्वाचन विभाग के आंकड़ो पर गौर करें तो पहली बार उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले उम्मीदवार मतदाताओं की पसंद रहे। जिससे 546 ग्राम पंचायत वाले जिले में 90 प्रधान स्नातक, परास्नातक संग अन्य डिग्री हासिल कर चुके हैं जबकि 2015 में यह संख्या 50 से भी कम रही। आंकड़ों पर गौर करें तो निरक्षर 60, पाचवीं पास 150, आठवीं पास 34, हाईस्कूल उत्तीर्ण 85, इंटरमीडिएट 60, स्नातक 70 और परास्नातक 40 प्रधान निर्वाचित हुए।
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