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Bhadohi News: 2020 से सलाखों के पीछे है विजय मिश्रा
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सपा व निषाद पार्टी के पूर्व विधायक विजय मिश्रा को प्रयागराज हाईकोर्ट की एमपीएमएलए कोर्ट की ओर से आजीवन कारावास की सजा से एक बड़ा झटका लगा है।
साल 2023 में दुष्कर्म के मामले में पहले से ही 13 साल सजा सुनाए जाने के बाद राजनीतिक कॅरिअर पर विराम लग चुका था। सजा के बाद चुनाव लड़ने की उसकी पूरी संभावनाए समाप्त हो चुकी थी। भदोही राजनीति में एक समय ऐसा भी था, जब बाहुबली विजय मिश्रा का सिक्का चलता था।
साल 2002 से लेकर 2017 तक प्रदेश में सरकार चाहे किसी भी रही हो, ज्ञानपुर विधानसभा से विजय मिश्रा अपना परचम लहराता था । विधायक के पद पर रहते हुए अपने धनबल और बाहुबल की बदौलत उसने अपने परिवार के लोगों को न सिर्फ राजनीति से जोड़ा, बल्कि उन्हें महत्वपूर्ण पदों पर काबिज कराया। उसकी पत्नी रामलली मिश्रा निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष और मिर्जापुर में विनीत सिंह को हराकर एमएलसी बनी थी। उसने अपने भतीजे मनीष मिश्रा को ब्लॉक प्रमुख भी बनाया।
तीन बार सपा से विधायक रहने के बाद 2017 में जब सपा ने उनका टिकट काट दिया तो वह निषाद पार्टी से चुनाव लड़कर विधायक बना। दो साल का कार्यकाल पूरा ही हुआ था कि इस बीच उनके बाहुबल के मामले सामने आने लगे और उनके ऊपर दर्ज 84 मुकदमों की हिस्ट्रीशीट खुल गई। पुलिस ने 2020 में गिरफ्तार कर इन्हें जेल भेजा और आज तक वह बाहर नहीं आया।
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यहीं नहीं उसके बेटे कारोबारी विष्णु मिश्रा, भतीजा मनीष मिश्रा और परिवार के अन्य कई सदस्य जेल की सलाखों के पीछे हैं। 2023 में दुष्कर्म के मामले में उसे पहली बार 13 साल की सजा हुई।
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साल 2023 में दुष्कर्म के मामले में पहले से ही 13 साल सजा सुनाए जाने के बाद राजनीतिक कॅरिअर पर विराम लग चुका था। सजा के बाद चुनाव लड़ने की उसकी पूरी संभावनाए समाप्त हो चुकी थी। भदोही राजनीति में एक समय ऐसा भी था, जब बाहुबली विजय मिश्रा का सिक्का चलता था।
साल 2002 से लेकर 2017 तक प्रदेश में सरकार चाहे किसी भी रही हो, ज्ञानपुर विधानसभा से विजय मिश्रा अपना परचम लहराता था । विधायक के पद पर रहते हुए अपने धनबल और बाहुबल की बदौलत उसने अपने परिवार के लोगों को न सिर्फ राजनीति से जोड़ा, बल्कि उन्हें महत्वपूर्ण पदों पर काबिज कराया। उसकी पत्नी रामलली मिश्रा निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष और मिर्जापुर में विनीत सिंह को हराकर एमएलसी बनी थी। उसने अपने भतीजे मनीष मिश्रा को ब्लॉक प्रमुख भी बनाया।
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तीन बार सपा से विधायक रहने के बाद 2017 में जब सपा ने उनका टिकट काट दिया तो वह निषाद पार्टी से चुनाव लड़कर विधायक बना। दो साल का कार्यकाल पूरा ही हुआ था कि इस बीच उनके बाहुबल के मामले सामने आने लगे और उनके ऊपर दर्ज 84 मुकदमों की हिस्ट्रीशीट खुल गई। पुलिस ने 2020 में गिरफ्तार कर इन्हें जेल भेजा और आज तक वह बाहर नहीं आया।
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यहीं नहीं उसके बेटे कारोबारी विष्णु मिश्रा, भतीजा मनीष मिश्रा और परिवार के अन्य कई सदस्य जेल की सलाखों के पीछे हैं। 2023 में दुष्कर्म के मामले में उसे पहली बार 13 साल की सजा हुई।