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कालीन नगरी में गहरा सकता है यूरिया का संकट

Fri, 17 Dec 2021 12:27 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 17 Dec 2021 12:27 AM IST
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Urea crisis may deepen in the carpet city
जिले में गेहूं की बोआई करीब 80 से 90 फीसदी हो चुकी है। पहली सिंचाई के बाद अब किसान यूरिया का छिड़काव करने में जुट गए हैं। डीएपी की किल्लत से जूझ रहे किसानों को अब यूरिया के लिए भी परेशान होना पड़ सकता है। इसका मुख्य कारण यह है कि 12 हजार एमटी की तुलना में समितियों पर तीन हजार एमटी से भी कम यूरिया उपलब्ध है। जल्द ही आपूर्ति न हुई तो डीएपी की तरह यूरिया के लिए भी किसानों को परेशान होना पड़ सकता है।
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जिले में 50 हजार हेक्टेयर में रबी की फसलों की खेती हुई है। इसमें गेहूं की 42 हजार और आठ हजार हेक्टेयर में तिलहन, दलहन की खेती की गई है। गेहूं की बोआई को लेकर नवंबर के शुरूआत से लेकर दिसंबर के पहले सप्ताह तक समितियों, किसान सेवा केंद्रों पर डीएपी की किल्लत थी। सभी किसानों को समय से डीएपी नहीं मिल सकी। इससे उन्हें निजी दुकानों से डीएपी महंगे दाम पर खरीदने के लिए विवश होना पड़ा। शुरूआती दौर में गेहूं की खेती करने वाले किसान सिंचाई कर चुके हैं। अब यूरिया के छिड़काव के लिए वे समितियों का चक्कर लगाने लगे हैं, लेकिन अधिकतर स्थानों पर यूरिया उपलब्ध ही नहीं है। व्यवस्था को लेकर जल्द ही पहल न हुई तो आने वाले समय में किसानों की चिंता और भी बढ़ सकती है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में 12 हजार एमटी यूरिया की जरूरत है, जबकि 2600 एमटी यूरिया फिलहाल उपलब्ध है। दरवांसी के किसान सरफराज आलम, निर्भय सिंह, सुशील सिंह ने कहा कि समितियों पर यूरिया के लिए गए थे, लेकिन अभी ताला बंद है। दो-तीन दिन में छिड़काव करना है। यदि आपूर्ति नहीं हुई तो निजी दुकानों से खरीदनी पड़ेगी।
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जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार का कहना है कि 15 दिसंबर से 15 जनवरी तक यूरिया की जरूरत होती है। फिलहाल 2600 एमटी यूरिया उपलब्ध है। इसे समितियों पर भेजा जा रहा है। दो रैक यूरिया इसी सप्ताह आ जाएगी। जरूरत के हिसाब से यूरिया की आपूर्ति उच्च स्तर से की जा रही है। किसानों को यूरिया के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। 2600 एमटी यूरिया मौजूद है। जिसे समितियों पर भेजा जा रहा है। दो रैक यूरिया इसी सप्ताह पहुंच जाएगी। जरूरत के हिसाब से यूरिया की आपूर्ति ऊपर से की जा रही है। किसानों को यूरिया के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
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